Reliance Share Crash: 24% टूटा, 52-Week Low पर पहुंचा शेयर...अब क्या करें Investors?

चिराग ठाकुर

• 03:32 PM • 29 Sep 2026

रिलायंस का शेयर 52 हफ्ते के निचले स्तर के पास है. कमाई बढ़ने के बाद भी बाजार खुदरा कारोबार, बड़े निवेश, नकदी और कच्चे तेल के असर पर कड़ी नजर रखे हुए है.

NewsTak
Google CTA
▌

न्यूज़ हाइलाइट्स

तिमाही नतीजों में मुनाफा 16% और आमदनी 25% से ज्यादा बढ़ी

बाजार की चिंता खुदरा कारोबार की रफ्तार, मार्जिन और रिटर्न को लेकर

Jio, खुदरा और नई ऊर्जा में भारी निवेश से नकदी पर दबाव

Reliance Industries के शेयर में इस साल की तेजी अब काफी हद तक फीकी पड़ चुकी है. ₹1,600 के ऊपर का स्तर देखने के बाद शेयर करीब ₹1,200 के आसपास आ गया है. यानी कुछ ही महीनों में इसमें करीब 24% की गिरावट आई है. मंगलवार के कारोबार में शेयर ₹1,190 के आसपास तक फिसलकर 52-हफ्तों के निचले स्तर पर पहुंच गया.

Read more!

दिलचस्प बात यह है कि कंपनी के हालिया नतीजों में ऐसी कोई बड़ी गिरावट नहीं दिखी. चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में Reliance का मुनाफा सालाना आधार पर 16% बढ़ा, जबकि राजस्व में 25% से ज्यादा की वृद्धि हुई. इसके बावजूद शेयर पर दबाव बना हुआ है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर बाजार Reliance को लेकर इतना सतर्क क्यों है.

Reliance Share में गिरावट की बड़ी वजह क्या है?

Reliance को लेकर बाजार में फिलहाल कई सवाल एक साथ हैं. इनमें सबसे अहम हैं Retail कारोबार की रफ्तार, बढ़ता पूंजीगत खर्च, नकदी प्रवाह और कच्चे तेल की कीमतों से जुड़ी अनिश्चितता.

Reliance ने Jio, Retail और New Energy जैसे कारोबारों में बड़े निवेश किए हैं. लेकिन अब निवेशकों की नजर सिर्फ इस बात पर नहीं है कि कंपनी कितना खर्च कर रही है. सवाल यह है कि इस निवेश से कमाई और नकदी कितनी तेजी से बढ़ती है.

निवेशकों की नजर इन बातों पर

  • Reliance Retail की बिक्री और मार्जिन में कितनी तेजी आती है.
  • Jio की ग्राहक संख्या और प्रति ग्राहक औसत कमाई यानी ARPU का रुझान.
  • बड़े पूंजीगत खर्च के बाद कंपनी कितना Free Cash Flow पैदा कर पाती है.
  • कच्चे तेल की कीमतों का O2C कारोबार की कमाई पर क्या असर पड़ता है.

Jio बना हुआ है बड़ा ग्रोथ ड्राइवर

Reliance की पूरी कहानी में Jio अब भी सबसे अहम हिस्सों में से एक है. बढ़ता ARPU, मजबूत ग्राहक आधार और कारोबार में बढ़ती परिचालन क्षमता कंपनी के लिए सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं.

इसके अलावा Jio Platforms का संभावित IPO भी भविष्य में Reliance के लिए मूल्य सामने लाने वाला एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम हो सकता है. हालांकि, यह अभी संभावित योजना है और इसे निश्चित ट्रिगर के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.

₹10,000 करोड़ जुटाने की तैयारी की खबर क्यों अहम?

Reliance की फंडिंग को लेकर भी हाल में खबर सामने आई है. Bloomberg की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी करीब 1 अरब डॉलर यानी लगभग ₹10,000 करोड़ Asset-Backed Securities के जरिए जुटाने की तैयारी कर रही है.

इन securities के पीछे समूह की कंपनियों से मिलने वाली भविष्य की किराया आय को आधार बनाया जा सकता है. इसमें Reliance Jio Infocomm से जुड़े receivables भी शामिल बताए गए हैं. रिपोर्ट के अनुसार इन notes की अवधि 5 साल और coupon करीब 8.35-8.40% हो सकता है.

सिर्फ इस फंडिंग योजना को कंपनी की वित्तीय कमजोरी मानना सही नहीं होगा. बड़ी कंपनियां विस्तार और पूंजी की जरूरतों के लिए अलग-अलग वित्तीय रास्तों का इस्तेमाल करती हैं. हालांकि, Reliance में पहले से बढ़ते Capex और Free Cash Flow पर बाजार की नजर है, इसलिए यह खबर महत्वपूर्ण बन जाती है.

₹1,200 के बाद शेयर का अगला अहम स्तर क्या है?

तकनीकी तौर पर Reliance का शेयर 200-day EMA यानी करीब ₹1,303 और 45-week moving average यानी करीब ₹1,325 के नीचे कारोबार कर रहा है. ये दोनों स्तर लंबे समय के रुझान को समझने में मदद करते हैं.

फिलहाल ₹1,200 के आसपास पहला अहम सपोर्ट है. अगर यह स्तर निर्णायक रूप से टूटता है, तो ₹1,150-1,170 का क्षेत्र महत्वपूर्ण हो सकता है. इसके बाद ₹1,100-1,150 का स्तर भी नजर में रहेगा.

वहीं तेजी लौटने पर ₹1,300-1,325 का क्षेत्र अहम होगा. इस दायरे के ऊपर टिकना शेयर के तकनीकी रुझान में सुधार का संकेत दे सकता है.

निवेशकों को अब किन संकेतों पर नजर रखनी चाहिए?

सिर्फ 52-week low देखकर Reliance को सस्ता मान लेना सही नहीं होगा. आने वाले quarters में असली तस्वीर कंपनी के कारोबार के आंकड़ों से साफ होगी.

अगर Jio की growth मजबूत रहती है, Retail के मार्जिन में सुधार आता है और Free Cash Flow बेहतर होता है, तो शेयर को लेकर बाजार की धारणा बदल सकती है. दूसरी तरफ Capex बढ़ता रहता है और उसके मुकाबले नकदी पैदा करने की क्षमता कमजोर रहती है, तो दबाव बना रह सकता है.

यानी Reliance में आगे की दिशा सिर्फ ₹1,200 के भाव से तय नहीं होगी. असली नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी का बड़ा निवेश कितनी तेजी से कमाई और मजबूत नकदी प्रवाह में बदलता है.