अक्टूबर की शुरुआत रिलायंस इंडस्ट्रीज के निवेशकों के लिए राहत लेकर आई है. 1 अक्टूबर को करीब ₹1,168 पर बंद हुआ रिलायंस का शेयर अब ₹1,200 के पार निकल चुका है. यानी कुछ ही कारोबारी सत्रों में शेयर में करीब 3 फीसदी की तेजी देखने को मिली है. लेकिन निवेशकों के लिए असली सवाल सिर्फ तेजी का नहीं, बल्कि यह है कि क्या यह तेजी टिकाऊ है?
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1 साल की कमजोरी के बाद रिकवरी
रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर में हालिया तेजी जरूर दिख रही है, लेकिन बड़ी तस्वीर अभी भी पूरी तरह मजबूत नहीं हुई है. बीते 6 महीने में शेयर करीब पौने 7 फीसदी कमजोर हुआ है, जबकि एक साल की अवधि में इसमें 10 फीसदी से ज्यादा की गिरावट रही है. ऐसे में अक्टूबर की शुरुआत में आई खरीदारी को फिलहाल एक रिकवरी के तौर पर देखा जा सकता है. मंगलवार के कारोबार में भी Reliance के शेयर में 2 फीसदी से ज्यादा की तेजी देखने को मिली.
जियो प्लेटफॉर्म्स IPO बना बड़ा ट्रिगर
बाजार में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO को लेकर है. रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स का IPO 21 अक्टूबर को खुल सकता है और इसकी लिस्टिंग 28 अक्टूबर के आसपास होने की संभावना है. IPO के जरिए करीब 3.8 अरब डॉलर यानी ₹33,000 करोड़ से ज्यादा जुटाने की योजना है. अगर ये प्लान तय कार्यक्रम के मुताबिक आगे बढ़ती है, तो यह देश के सबसे बड़े IPO में शामिल हो सकता है. रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए जियो प्लेटफॉर्म्स बेहद अहम कारोबार है. इसलिए जियो की लिस्टिंग सिर्फ जियो के लिए ही नहीं, बल्कि रिलायंस की पूरी वैल्यूएशन के लिए भी जरुरी मानी जा रही है.
जियो की लिस्टिंग से वैल्यू अनलॉक?
रिलायंस एक बड़ा कॉन्ग्लोमरेट है, जिसमें जियो, रिटेल, O2C और न्यू एनर्जी जैसे कई बड़े कारोबार शामिल हैं. अभी तक बाजार इन सभी कारोबारों की वैल्यू को रिलायंस इंडस्ट्रीज के एक ही शेयर भाव के जरिए आंकता है. लेकिन जियो प्लेटफॉर्म्स की अलग लिस्टिंग के बाद पहली बार बाजार जियो की वैल्यू को स्वतंत्र रूप से तय करेगा. यही रिलायंस के लिए वैल्यू अनलॉकिंग का सबसे बड़ा पहलू है. अगर जियो प्लेटफॉर्म्स की लिस्टिंग मजबूत वैल्यूएशन पर होती है, तो रिलायंस के पास मौजूद जियो की हिस्सेदारी की बाजार कीमत भी ज्यादा साफ होकर सामने आएगी.
जियो की पूरी वैल्यू RIL को नहीं मिलेगी
जियो प्लेटफॉर्म्स की मार्केट वैल्यू बढ़ने का पूरा फायदा रिलायंस के शेयर को मिलना जरूरी नहीं है. इसकी एक बड़ी वजह होल्डिंग कंपनी डिस्काउंट है. बाजार आमतौर पर किसी कंपनी की दूसरी कंपनियों में मौजूद हिस्सेदारी को उसकी पूरी बाजार कीमत पर वैल्यू नहीं करता. इसके अलावा रिलायंस के दूसरे कारोबारों की वैल्यूएशन भी शेयर की कुल कीमत को प्रभावित करेगी.
IPO से जियो की बैलेंस शीट भी हो सकती है मजबूत
जियो प्लेटफॉर्म्स IPO से जुटाई जाने वाली रकम का इस्तेमाल कर्ज चुकाने और सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए किया जाना है. इससे जियो की बैलेंस शीट मजबूत हो सकती है और वित्तीय स्थिति बेहतर हो सकती है. इसके बाद बाजार की नजर रिलायंस रिटेल और न्यू एनर्जी जैसे दूसरे कारोबारों की ग्रोथ पर भी रहेगी. यानी रिलायंस की वैल्यू अनलॉकिंग की कहानी सिर्फ जियो IPO तक सीमित नहीं है. जियो की लिस्टिंग के बाद दूसरे कारोबारों की वैल्यू सामने आना अगला बड़ा ट्रिगर हो सकता है.
₹1,766 तक जा सकता है RIL का शेयर?
ब्रोकरेज हाउस नुवामा ने रिलायंस इंडस्ट्रीज पर अपनी BUY रेटिंग बरकरार रखी है और ₹1,766 का टारगेट प्राइस दिया है. मौजूदा स्तर के मुकाबले ये टारगेट काफी ज्यादा है, यानी ब्रोकरेज को रिलायंस में अभी भी अच्छी तेजी की गुंजाइश नजर आ रही है.शेयर अपने 52-हफ्ते के शिखर से भी नीचे है, जो संभावित अपसाइड की गुंजाइश दिखाता है. लेकिन दूसरी तरफ जोखिम भी कम नहीं है. जियो IPO को लेकर बाजार में पहले से काफी उम्मीदें बन चुकी हैं. अगर IPO की प्राइसिंग या लिस्टिंग बाजार की उम्मीदों से कमजोर रहती है, तो रिलायंस में मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है.
डिस्क्लेमर: ये केवल जानकारी और शिक्षा के उद्देश्य से लिखा गया है. इसमें दी गई राय, ब्रोकरेज रिपोर्ट और आंकड़े सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं. यह किसी भी शेयर में खरीदने या बेचने की सलाह नहीं है. शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है. निवेश का कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें.
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