रिलायंस पावर के शेयर में बुधवार को तेज उछाल देखने को मिला. कमजोर वित्तीय नतीजों और लगातार चार कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद यह तेजी बाजार में चर्चा का बड़ा विषय रही.
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इस उछाल की सबसे बड़ी वजह कंपनी का एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई टेक्नोलॉजी से जुड़े कारोबार में उतरने का ऐलान रहा. कंपनी ने कहा है कि वह अपनी सहायक कंपनियों के जरिए इस दिशा में तैयारी कर रही है. इसी के साथ कंपनी ने अपनी चार सहायक कंपनियों के नाम में एआई भी जोड़ा है.
शेयर में कितनी तेजी आई
बुधवार को रिलायंस पावर का शेयर 13 फीसदी से ज्यादा की तेजी के साथ बंद हुआ.पिछले 3 महीने में शेयर करीब 30 फीसदी चढ़ा है.पिछले 1 साल में यह शेयर 59 फीसदी टूटा है.पिछले 3 साल में इस शेयर ने 100 फीसदी रिटर्न दिया है.
AI में एंट्री का ऐलान
कंपनी ने शेयर बाजार को दी जानकारी में कहा कि उसने अपनी कुछ सहायक कंपनियों के मेमोरेंडम ऑफ असोसिएशन में बदलाव किया है. इसका मकसद उन्हें भविष्य में एआई और टेक्नोलॉजी आधारित कारोबार करने लायक बनाना है.
कंपनी ने अपनी चार सहायक कंपनियों के नाम भी बदले हैं
- रिलायंस एआई ग्रीन पावर प्राइवेट लिमिटेड
- रिलायंस एआई पावर प्राइवेट लिमिटेड
- रिलायंस एआई डेटा कंट्रोल प्राइवेट लिमिटेड
- रिलायंस एआई डेटा सी प्राइवेट लिमिटेड
इन नामों से यह संकेत मिलता है कि कंपनी आगे चलकर एआई, डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी आधारित ऊर्जा समाधान पर जोर बढ़ाना चाहती है. हालांकि कंपनी ने अभी यह साफ नहीं किया है कि इन क्षेत्रों में कितना निवेश होगा और कौन से प्रोजेक्ट शुरू किए जाएंगे.
बाजार इस खबर को क्यों अहम मान रहा है
पिछले कुछ साल में एआई दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती टेक्नोलॉजी में शामिल हुआ है. बड़े एआई मॉडल और डेटा सेंटर चलाने के लिए बहुत ज्यादा बिजली की जरूरत होती है. इसी वजह से कई बिजली कंपनियां एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को भविष्य के बड़े मौके के रूप में देख रही हैं.
भारत में भी एआई, डेटा सेंटर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग बढ़ रही है. बाजार में यह धारणा बनी कि रिलायंस पावर भी इसी बढ़ते मौके को पकड़ने की तैयारी कर रही है. इसी उम्मीद ने शेयर में खरीदारी को सहारा दिया.
रिलायंस पावर का मौजूदा कारोबार
रिलायंस पावर, रिलायंस समूह की बिजली उत्पादन कंपनियों में शामिल है. कंपनी भारत और विदेशों में बिजली परियोजनाओं का विकास, निर्माण और संचालन करती है.कंपनी के पास करीब 6000 मेगावाट की चालू बिजली उत्पादन क्षमता है.इसके पोर्टफोलियो में कोयला, गैस और दूसरे ईंधन आधारित बिजली परियोजनाएं शामिल हैं.यानी कंपनी अब अपने पारंपरिक बिजली कारोबार के साथ नई टेक्नोलॉजी में भी मौके तलाश रही है.
वित्तीय तस्वीर क्या कहती है
एआई को लेकर उत्साह जरूर दिखा, लेकिन कंपनी की मौजूदा वित्तीय हालत अभी मजबूत नहीं दिखती. कंपनी के ताजा आंकड़े दबाव की तरफ इशारा करते हैं.मार्च 2026 तिमाही में कंपनी को 494 करोड़ रुपये का घाटा हुआ.एक साल पहले इसी तिमाही में कंपनी ने 125.57 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया था.कंपनी की कुल आय घटकर 1946.33 करोड़ रुपये रह गई, जो पिछले साल समान अवधि में 2065.64 करोड़ रुपये थी.पूरे वित्त वर्ष 2026 में कंपनी को 336.89 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ.वित्त वर्ष 2025 में कंपनी ने 2947.83 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया था.इन आंकड़ों से साफ है कि कंपनी के सामने अभी कामकाज और मुनाफे से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं.
बाजार जानकार क्या कह रहे हैं
बाजार जानकारों का कहना है कि एआई में एंट्री का ऐलान सकारात्मक संकेत जरूर है, लेकिन अभी सतर्क रहना जरूरी है. उनके मुताबिक केवल नाम बदलने या शुरुआती घोषणा के आधार पर बहुत बड़ा निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी हो सकती है.कंपनी एआई कारोबार में कितना निवेश करती है.क्या कोई बड़ा डेटा सेंटर या एआई प्रोजेक्ट शुरू होता है.इन योजनाओं से असली कमाई कब शुरू होती है.कंपनी घाटे से बाहर निकलने में कितनी सफल रहती है.फिलहाल रिलायंस पावर बदलाव के दौर में दिख रही है. एक तरफ उसके पारंपरिक बिजली कारोबार की चुनौतियां हैं, तो दूसरी तरफ एआई और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्र में नए मौके हैं. अगर कंपनी इस दिशा में ठोस निवेश करती है और बेहतर नतीजे दिखाती है, तो आगे उसके लिए कमाई के नए रास्ते खुल सकते हैं. लेकिन अभी यह रणनीति शुरुआती दौर में है, इसलिए आगे का आकलन निवेश, प्रोजेक्ट और वित्तीय नतीजों के आधार पर ही होगा.
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