सेबी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज को इनसाइडर ट्रेडिंग से जुड़े नियमों के पालन में कमी को लेकर प्रशासनिक चेतावनी दी है. यह चेतावनी कंपनी के कंपनी सेक्रेटरी और कंप्लायंस ऑफिसर को भेजी गई है. कंपनी ने कहा है कि इस मामले में उस पर कोई जुर्माना, कारोबारी रोक या वित्तीय पाबंदी नहीं लगी है.
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मामला रिलायंस के कारोबार, मुनाफे या वित्तीय हालत से जुड़ा नहीं है. यह जांच कंपनी के शेयरों में कुछ लोगों की खरीद-बिक्री को लेकर हुई. सेबी के मुताबिक, यह ट्रेड ऐसे समय में हुए जब उनके पास ऐसी गोपनीय जानकारी थी जो आम लोगों के सामने नहीं आई थी.
मामला क्या है?
रिलायंस ने शेयर बाजार को दी जानकारी में कहा कि सेबी ने उसे प्रशासनिक चेतावनी जारी की है. यह पत्र 24 जून को जारी हुआ था और 6 जुलाई को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के जरिए कंपनी को मिला. उसी दिन कंपनी ने यह जानकारी शेयर बाजार को दे दी.
कंपनी के मुताबिक, यह सिर्फ चेतावनी है. इसमें कोई आर्थिक कार्रवाई नहीं हुई है. न कोई जुर्माना लगाया गया है, न कारोबार पर रोक लगी है और न किसी तरह की वित्तीय पाबंदी लगाई गई है.
सेबी की जांच में क्या सामने आया
सेबी ने 1 जून 2024 से 30 अगस्त 2024 के बीच रिलायंस के शेयरों में हुई खरीद-बिक्री की जांच की. जांच का मकसद यह देखना था कि कहीं किसी ने ऐसी गोपनीय जानकारी का फायदा उठाकर ट्रेडिंग तो नहीं की, जो अभी सार्वजनिक नहीं हुई थी. शेयर बाजार में इसे यूपीएसआई कहा जाता है.
आसान भाषा में समझें तो अगर किसी कंपनी के नतीजे, बड़े सौदे या किसी अहम फैसले की जानकारी पहले से कुछ लोगों के पास हो और उसी आधार पर शेयर खरीदे या बेचे जाएं, तो उसे इनसाइडर ट्रेडिंग माना जाता है. भारत में यह कानून के खिलाफ है.
सेबी के मुताबिक, जांच में तीन नाम सामने आए. इनमें दो रिलायंस के कर्मचारी बताए गए हैं और एक कर्मचारी का करीबी रिश्तेदार. इनके नाम हर्ष जैन, कामिनी जैन और हिराई उमंग दोशी हैं.
हर्ष जैन ने 5 जुलाई 2024 को रिलायंस के 2 शेयर खरीदे, जिनकी कीमत करीब 6,385 रुपये थी.कामिनी जैन ने 10 जुलाई को 35 शेयर बेचे, जिनकी कीमत करीब 1 लाख 9 हजार 695 रुपये थी.कामिनी जैन ने 11 जुलाई को 25 शेयर खरीदे, जिनकी कीमत करीब 78 हजार 871 रुपये थी.हिराई उमंग दोशी ने 18 जुलाई को 15 शेयर बेचे, जिनकी कुल कीमत करीब 47 हजार 625 रुपये थी.
सेबी का कहना है कि ये ट्रेड ऐसे समय में किए गए जब इन लोगों के पास यूपीएसआई थी. यानी उनके पास ऐसी जानकारी थी जो अभी आम निवेशकों तक नहीं पहुंची थी. सेबी ने कहा कि यह इनसाइडर ट्रेडिंग से जुड़े नियमों और सेबी कानून की संबंधित धाराओं का उल्लंघन है.
रिलायंस को चेतावनी क्यों मिली
सेबी ने अपनी जांच में यह भी कहा कि रिलायंस को इन ट्रेड की जानकारी खुद से नहीं मिली थी. कंपनी को इसका पता तब चला जब सेबी ने इस बारे में सूचना भेजी. इसी वजह से सेबी ने कंपनी के कंप्लायंस सिस्टम पर सवाल उठाए हैं.
कंप्लायंस ऑफिसर की जिम्मेदारी होती है कि कर्मचारियों की शेयर ट्रेडिंग पर नजर रखी जाए. अगर कोई कर्मचारी नियम तोड़ता है, तो कंपनी को समय रहते इसकी जानकारी मिलनी चाहिए. सेबी ने कहा कि इस चूक को गंभीरता से देखा गया है और आगे ऐसी गलती दोबारा नहीं होनी चाहिए.
सेबी ने यह भी कहा कि अगर भविष्य में ऐसी लापरवाही फिर दिखी, तो कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जा सकती है. दूसरी तरफ, रिलायंस ने कहा है कि वह सेबी की ओर से उठाई गई चिंताओं को दूर करने के लिए जरूरी कदम उठाएगी. हालांकि कंपनी ने अभी यह नहीं बताया है कि जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनके खिलाफ अंदरूनी स्तर पर क्या कार्रवाई होगी.
निवेशकों के लिए क्या मतलब है
फिलहाल इस मामले में रिलायंस पर कोई जुर्माना या कारोबारी प्रतिबंध नहीं लगा है. मामला कंपनी के कुछ कर्मचारियों और उनसे जुड़े लोगों की ट्रेडिंग, साथ ही नियमों के पालन और निगरानी व्यवस्था से जुड़ा है.
कुल मिलाकर, सेबी की यह चेतावनी रिलायंस के कारोबार में गड़बड़ी की नहीं, बल्कि इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों के पालन में कमी की तरफ इशारा करती है. सेबी के मुताबिक कुछ लोगों ने गोपनीय जानकारी के दौरान शेयरों में खरीद-बिक्री की, जबकि रिलायंस का कहना है कि वह उठाई गई चिंताओं को दूर करने के लिए जरूरी कदम उठाएगी.
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