दो साल पहले तक देश की सबसे कीमती कंपनी बनने की दौड़ में Reliance Industries और TCS सबसे आगे दिखते थे. उस समय अकेले TCS का मार्केट कैप करीब ₹16.3 लाख करोड़ था. अब तस्वीर काफी बदल गई है.अब देश की पांच बड़ी IT कंपनियां, TCS, Infosys, HCL Tech, Wiproऔर Tech Mahindra का कुल मार्केट कैप करीब ₹18 लाख करोड़ है. वहीं अकेले Reliance Industries का मार्केट कैप करीब ₹17.7 लाख करोड़ है. इसका मतलब है कि जिस Reliance Ind को कभी अकेले TCS चुनौती देता था, उसके बराबर पहुंचने के लिए अब 5 बड़ी IT कंपनियों की संयुक्त वैल्यू लग रही है.
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किस कंपनी का कितना मार्केट कैप
| कंपनी | मार्केट कैप |
| Reliance Industries | ₹17.7 लाख करोड़ |
| TCS | ₹7.6 लाख करोड़ |
| Infosys | ₹4.3 लाख करोड़ |
| HCL Technologies | ₹3.1 लाख करोड़ |
| Wipro | ₹1.8 लाख करोड़ |
| Tech Mahindra | ₹1.3 लाख करोड़ |
पांच बड़ी आईटी कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब ₹18 लाख करोड़ रहा.ये आंकड़े 3 जुलाई 2026 के बंद भाव के आधार पर हैं.
IT सेक्टर की वैल्यू क्यों घटी?
पिछले डेढ़ से दो साल में भारतीय IT कंपनियों के सामने कई मुश्किलें एक साथ आई हैं. सबसे बड़ा असर अमेरिका और यूरोप में आईटी खर्च की धीमी रफ्तार का रहा है. वहां की बड़ी कंपनियां नए टेक काम शुरू करने के बजाय खर्च कम करने पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं.बाज़ार के जानकार कहते हैं कि जेनरेटिव एआई के तेज इस्तेमाल ने पुराने आईटी सर्विस तरीके पर सवाल बढ़ा दिए हैं. निवेशक अब यह देखना चाहते हैं कि आईटी कंपनियां एआई से कब और कितनी सीधी कमाई कर पाती हैं. इसी वजह से 2026 की पहली छमाही में निफ्टी आईटी इंडेक्स बाजार के कमजोर क्षेत्रों में शामिल रहा.हालांकि, 3 जुलाई को HCL Tech की बड़ी एआई डील की खबर के बाद आईटी शेयरों में कुछ सुधार भी दिखा. इससे यह संकेत मिला कि बड़े काम मिलने पर इस क्षेत्र में फिर से तेजी आ सकती है.
रिलायंस क्यों बना हुआ है मजबूत
दूसरी तरफ, रिलायंस इंडस्ट्रीज का कारोबार सिर्फ तेल और गैस तक सीमित नहीं है. कंपनी का जियो, रिटेल, न्यू एनर्जी, डिजिटल सर्विसेज और उपभोक्ता कारोबार निवेशकों का भरोसा बनाए हुए है. यही वजह है कि बाजार में उतार चढ़ाव के बावजूद कंपनी का मार्केट कैप ₹17 लाख करोड़ से ऊपर बना हुआ है.
क्या IT सेक्टर की वापसी हो सकती है
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आने वाले महीनों में दुनिया भर में आईटी खर्च बढ़ता है और एआई से जुड़े बड़े काम तेजी से मिलने लगते हैं, तो भारतीय आईटी कंपनियों की ग्रोथ फिर मजबूत हो सकती है. लेकिन फिलहाल निवेशकों की नजर सिर्फ बड़े ऑर्डर पर नहीं है. वे यह भी देख रहे हैं कंपनियां एआई को कितनी तेजी से कारोबार और मुनाफे में बदल पाती हैं.
बाजार की पसंद बदली
ये बदलाव सिर्फ मार्केट कैप का नहीं, बल्कि भारतीय शेयर बाजार की बदलती पसंद का भी संकेत है. कुछ साल पहले निवेशकों की पहली पसंद आईटी कंपनियां थीं. अब पूंजी का बड़ा हिस्सा टेलीकॉम, रिटेल, मैन्युफैक्चरिंग, पावर, डिफेंस और कैपिटल गुड्स जैसे क्षेत्रों की ओर बढ़ता दिख रहा है.फिलहाल सबसे बड़ी बात यह है कि रिलायंस अकेले ही देश की पांच बड़ी आईटी कंपनियों के कुल मार्केट कैप के बराबर खड़ा है. आगे आईटी क्षेत्र की चाल इस बात पर निर्भर करेगी कि वैश्विक खर्च कितना बढ़ता है और एआई से कमाई कितनी जल्दी साफ दिखती है. आने वाले समय में यही सवाल बाजार की दिशा तय करने में अहम रहेगा.
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