Share Market : बाजार की गिरावट के बीच Robert Kiyosaki की बड़ी चेतावनी, सोने-चांदी पर लगाया दांव!

तनीषा त्यागी

• 01:17 PM • 29 Sep 2026

शेयर बाजार में लगातार दबाव है और निफ्टी 22600 के पास आ गया है. रॉबर्ट कियोसाकी ने गिरावट के बीच सोना, चांदी और बिटकॉइन पर ध्यान देने की सलाह दी है.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे सत्र भी बिकवाली का दबाव रहा

एफआईआई ने 5353.22 करोड़ रुपये निकाले, जबकि डीआईआई ने खरीदारी की

महंगे कच्चे तेल और बढ़ती बॉन्ड यील्ड से चिंता और बढ़ी

Robert Kiyosaki : भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में गिरावट का दबाव देखने को मिल रहा है. Nifty 50 करीब 22,600 के स्तर तक फिसल चुका है, जबकि निवेशकों के पोर्टफोलियो पर बिकवाली का असर बढ़ता जा रहा है. इसी बीच 'Rich Dad Poor Dad' के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी की बाजार को लेकर दी गई चेतावनी एक बार फिर चर्चा में है. कियोसाकी ने निवेशकों को सोना, चांदी और Bitcoin जैसे एसेट्स पर ध्यान देने की सलाह दी है. साथ ही उन्होंने Baby Boomers को लेकर चिंता जताई है और कहा है कि अगर बाजार में बड़ी गिरावट आती है, तो इस पीढ़ी के निवेशकों के लिए नुकसान की भरपाई करना मुश्किल हो सकता है.

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बाजार में गिरावट अब सिर्फ आशंका नहीं

रॉबर्ट कियोसाकी लंबे समय से बाजार में बड़ी गिरावट की आशंका जताते रहे हैं. लेकिन मौजूदा स्थिति में भारतीय शेयर बाजार में कमजोरी पहले से ही दिखाई दे रही है. Nifty 50 करीब 22,600 के स्तर तक आ चुका है. इससे एक दिन पहले भी बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली थी और अगले कारोबारी सत्र में भी बिकवाली का दबाव बना हुआ है. हालांकि, मौजूदा गिरावट को सीधे तौर पर कियोसाकी की चेतावनी से जोड़ना सही नहीं होगा. भारतीय बाजार पर इस समय कई घरेलू और वैश्विक कारकों का असर है.

FII बिकवाली ने बढ़ाई बाजार की चिंता

बाजार पर दबाव बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs की लगातार बिकवाली शामिल है. 28 सितंबर 2026 को FIIs ने भारतीय इक्विटी में 5,353.22 करोड़ रुपये की बिकवाली की. इसके मुकाबले Domestic Institutional Investors यानी DIIs ने 5,189.02 करोड़ रुपये की खरीदारी की. इससे बाजार को घरेलू संस्थागत निवेशकों की तरफ से कुछ सहारा जरूर मिला, लेकिन विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली का दबाव बना हुआ है. FII और DII की गतिविधियों का अंतर फिलहाल बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत बन गया है. विदेशी निवेशकों की तरफ से लगातार निकासी बाजार में सेंटीमेंट को कमजोर कर रही है.

महंगा क्रूड भी बना बड़ी चिंता

भारतीय शेयर बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी एक महत्वपूर्ण चिंता है. क्रूड की कीमतें ऊंचे स्तर पर पहुंचने से भारत जैसे आयात पर निर्भर देश के लिए लागत और महंगाई से जुड़ी चिंताएं बढ़ सकती हैं. महंगे कच्चे तेल का असर कंपनियों की लागत पर भी पड़ सकता है. ऐसे माहौल में निवेशकों के बीच जोखिम को लेकर सतर्कता बढ़ सकती है और शेयर बाजार पर इसका असर देखने को मिल सकता है. इसके साथ ही ग्लोबल मार्केट से भी भारतीय बाजार को फिलहाल मजबूत सपोर्ट नहीं मिल रहा है. अमेरिकी बॉन्ड मार्केट में यील्ड बढ़ने के कारण एशियाई बाजारों में दबाव देखने को मिला है.

कियोसाकी ने Baby Boomers को क्यों चेताया

रॉबर्ट कियोसाकी की मौजूदा टिप्पणी का एक बड़ा हिस्सा Baby Boomers को लेकर है. Baby Boomers उस पीढ़ी को कहा जाता है, जिनका जन्म 1946 से 1964 के बीच हुआ. कियोसाकी का कहना है कि इस पीढ़ी के कई लोगों ने Financial Planners की सलाह के आधार पर 60/40 निवेश फॉर्मूले को अपनाया. इस रणनीति में निवेश को शेयरों और बॉन्ड जैसे एसेट्स के बीच बांटा जाता है. कियोसाकी की चिंता यह है कि अगर शेयर बाजार के साथ बॉन्ड मार्केट में भी बड़ा दबाव आता है, तो रिटायरमेंट के करीब पहुंच चुके निवेशकों के लिए नुकसान की भरपाई करना आसान नहीं होगा. उनका कहना है कि इस तरह की स्थिति में कुछ Baby Boomers के सामने आर्थिक परेशानियां इतनी गंभीर हो सकती हैं कि उन्हें घर से जुड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़े या रिश्तेदारों के साथ रहने की नौबत आ सकती है. यह कियोसाकी की भविष्य को लेकर जताई गई आशंका है और इसे किसी निश्चित आर्थिक घटना के तौर पर नहीं देखा जा सकता.

सोना, चांदी और Bitcoin पर कियोसाकी का भरोसा

संभावित बाजार संकट से बचने के लिए कियोसाकी ने एक बार फिर निवेशकों को सोना, चांदी और Bitcoin की ओर ध्यान देने की सलाह दी है. उनका निवेश नजरिया लंबे समय से इन एसेट्स को लेकर सकारात्मक रहा है. कियोसाकी का कहना है कि निवेशकों को सिर्फ पारंपरिक वित्तीय बाजारों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए और अपनी Financial Education को भी मजबूत करना चाहिए. उनके मुताबिक, बाजार में संभावित गिरावट के लिए पहले से तैयारी करना जरूरी है. उन्होंने अपनी निवेश रणनीति का जिक्र करते हुए अपार्टमेंट और तेल के कुओं में अपने निवेश की बात भी कही है. हालांकि, किसी भी एसेट में निवेश से जुड़े जोखिम अलग-अलग होते हैं. इसलिए कियोसाकी की राय को एक निवेश सलाह के बजाय उनके व्यक्तिगत निवेश नजरिये के तौर पर देखना जरूरी है.

सोने की कीमत में भी हालिया कमजोरी

दिलचस्प बात यह है कि जिस समय कियोसाकी सोने और चांदी पर ध्यान देने की बात कर रहे हैं, उसी समय दिए गए बाजार आंकड़ों के मुताबिक भारतीय बाजार में दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में कमजोरी देखने को मिल रही है. 5 अक्टूबर 2026 एक्सपायरी वाला 10 ग्राम सोना 350 से ज्यादा अंकों की गिरावट के साथ करीब 1.46 लाख रुपये पर कारोबार कर रहा था. आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक सप्ताह में सोने की कीमत 4.28 फीसदी गिर चुकी है. एक महीने की अवधि में इसमें 5.42 फीसदी की गिरावट रही, जबकि तीन महीने में यह करीब 0.69 फीसदी नीचे है. इससे पता चलता है कि हाल के कम समय में सोने की कीमत पर भी दबाव बना हुआ है.

चांदी में भी जोरदार गिरावट

चांदी की कीमत में भी इसी दौरान कमजोरी देखने को मिली. 4 दिसंबर 2026 एक्सपायरी वाली चांदी 2,221 अंकों की गिरावट के साथ करीब 2.25 लाख रुपये प्रति किलो पर कारोबार कर रही थी. पिछले एक सप्ताह में चांदी 6.33 फीसदी टूट चुकी है. एक महीने में इसकी कीमत 6.15 फीसदी नीचे आई है, जबकि तीन महीने की अवधि में चांदी में 2.04 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. यानी मौजूदा समय में सिर्फ इक्विटी मार्केट ही दबाव में नहीं है, बल्कि दिए गए आंकड़ों के अनुसार सोना और चांदी भी हालिया अवधि में कमजोर हुए हैं.

क्या बाजार में और बड़ी गिरावट आएगी?

फिलहाल भारतीय शेयर बाजार में कमजोरी साफ दिखाई दे रही है, लेकिन आगे बाजार कितना नीचे जाएगा, इसे लेकर कोई निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता. Nifty के 22,600 के आसपास पहुंचने के बीच निवेशकों की नजर FII flows, कच्चे तेल की कीमतों, ग्लोबल बॉन्ड यील्ड और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के संकेतों पर बनी रहेगी. रॉबर्ट कियोसाकी की मौजूदा चेतावनी उनकी लंबे समय से चली आ रही बाजार संबंधी राय का हिस्सा है. उनकी ओर से सोना, चांदी और Bitcoin पर जोर दिया गया है, जबकि भारतीय बाजार में फिलहाल इक्विटी के साथ कीमती धातुओं में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. ऐसे में बाजार के लिए सबसे अहम सवाल यह बना हुआ है कि मौजूदा गिरावट एक तेज correction तक सीमित रहती है या बिकवाली का दबाव आगे भी जारी रहता है.

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