पैसा बचाना अच्छी आदत माना जाता है. बचपन से हमें यही सिखाया जाता है कि कमाई का एक हिस्सा भविष्य के लिए जरूर बचाना चाहिए. लेकिन दुनिया की सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली पर्सनल फाइनेंस किताब *Rich Dad Poor Dad* के लेखक और मशहूर निवेशक रॉबर्ट कियोसाकी इस सोच से पूरी तरह सहमत नहीं हैं. उनका कहना है कि अमीर लोग सिर्फ पैसा बचाने पर भरोसा नहीं करते, बल्कि ऐसी एसेट्स में निवेश करते हैं जो समय के साथ उनकी संपत्ति को बढ़ाने का काम करें.
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हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए एक पोस्ट में कियोसाकी ने एक बार फिर अपनी निवेश रणनीति साझा की. उन्होंने अमेरिका के बढ़ते कर्ज, करेंसी सिस्टम और निवेश के तरीकों पर अपनी राय रखते हुए लोगों से सवाल पूछा कि आखिर वे अपने पैसे के साथ क्या कर रहे हैं.
अमेरिका के बढ़ते कर्ज पर जताई चिंता
रॉबर्ट कियोसाकी ने अपनी पोस्ट में अमेरिका के सरकारी कर्ज का जिक्र किया. उनके मुताबिक साल 2008 में ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस से पहले अमेरिका पर करीब 9.5 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज था. उनका दावा है कि अब यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 39 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है. इसी के साथ उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी सरकार लगातार नई करेंसी सिस्टम में जोड़ रही है. कियोसाकी का मानना है कि जब किसी देश में बड़े पैमाने पर मुद्रा का विस्तार होता है, तो उसकी वजह से करेंसी की वैल्यू पर दबाव आ सकता है. यही कारण है कि वे लंबे समय से कैश की बजाय दूसरी एसेट्स को प्राथमिकता देने की बात करते रहे हैं.
1 ट्रिलियन डॉलर का उदाहरण देकर समझाई बात
अपनी पोस्ट में कियोसाकी ने एक दिलचस्प उदाहरण भी दिया. उन्होंने लिखा कि अगर कोई व्यक्ति हर मिनट सिर्फ 1 डॉलर खर्च करे, तो 1 ट्रिलियन डॉलर खर्च करने में करीब 32 हजार साल लग जाएंगे. इस उदाहरण के जरिए उन्होंने यह बताने की कोशिश की कि ट्रिलियन डॉलर जैसी रकम कितनी बड़ी होती है. उनका कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में नई मुद्रा का सिस्टम में आना लंबे समय में आर्थिक चिंताओं को जन्म दे सकता है.
'The Rich Do Not Save Money' का क्या मतलब है?
रॉबर्ट कियोसाकी ने अपनी मशहूर किताब *Rich Dad Poor Dad* के एक सिद्धांत का जिक्र करते हुए कहा कि अमीर लोग सिर्फ पैसा बचाकर नहीं रखते. उनके मुताबिक संपत्ति बनाने का तरीका यह है कि पैसा ऐसी एसेट्स में लगाया जाए जो समय के साथ अपनी वैल्यू बनाए रखें या उसे बढ़ाएं. यानी उनका फोकस सिर्फ बैंक अकाउंट में कैश रखने पर नहीं, बल्कि ऐसे निवेश पर रहता है जो भविष्य में बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखते हों.
अपने निवेश का भी किया खुलासा
कियोसाकी ने अपनी पोस्ट में यह भी बताया कि उन्होंने अलग-अलग समय पर किन एसेट्स में निवेश किया.
- साल 1965 से चांदी जमा कर रहे हैं
- साल 1971 से सोने में निवेश कर रहे हैं
- साल 2012 से बिटकॉइन खरीद रहे हैं
- साल 2022 से इथेरियम भी अपने पोर्टफोलियो में शामिल किया
इससे साफ है कि उनकी रणनीति लंबे समय तक अलग-अलग एसेट्स में निवेश बनाए रखने की रही है. उनका मानना है कि समय के साथ मजबूत एसेट्स संपत्ति बढ़ाने में मदद कर सकती हैं.
क्या हर निवेशक को यही रणनीति अपनानी चाहिए?
हालांकि कियोसाकी की राय उनकी व्यक्तिगत निवेश सोच को दर्शाती है. इसका मतलब यह नहीं है कि हर निवेशक बिना अपनी स्थिति समझे उसी रास्ते पर चल पड़े. हर निवेशक की आय, वित्तीय लक्ष्य, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की समय सीमा अलग होती है. इसलिए किसी भी निवेश का फैसला केवल किसी मशहूर निवेशक की राय के आधार पर नहीं लिया जाना चाहिए.
हर एसेट के अपने फायदे और जोखिम हैं
सोना और चांदी को लंबे समय से महंगाई के खिलाफ सुरक्षा देने वाले एसेट्स के रूप में देखा जाता है. वहीं बिटकॉइन और इथेरियम जैसी क्रिप्टोकरेंसी में रिटर्न की संभावना अधिक हो सकती है, लेकिन इनमें उतार-चढ़ाव भी काफी ज्यादा रहता है. कई बार कम समय में इनकी कीमतों में बड़ी गिरावट भी देखने को मिलती है. दूसरी ओर बैंक एफडी और सेविंग अकाउंट अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाते हैं, लेकिन कई बार इनका रिटर्न महंगाई की रफ्तार से कम रह जाता है. ऐसे में केवल पैसा बचाना और संपत्ति बनाना, दोनों अलग-अलग बातें हैं.
निवेश से पहले किन बातों का रखें ध्यान?
अगर आप निवेश की शुरुआत करना चाहते हैं या पहले से निवेश कर रहे हैं, तो सबसे पहले अपने वित्तीय लक्ष्य तय करें. यह समझें कि आप कितने जोखिम लेने में सहज हैं. किसी एक एसेट पर पूरी रकम लगाने के बजाय अलग-अलग एसेट्स में संतुलित निवेश करना बेहतर माना जाता है. इसके अलावा, केवल सोशल मीडिया पोस्ट या किसी चर्चित निवेशक की राय देखकर निवेश का फैसला लेने से बचना चाहिए. निवेश हमेशा अपनी जरूरत, समय सीमा और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर करना चाहिए.
क्या है इस पूरी सलाह का सबसे बड़ा संदेश?
रॉबर्ट कियोसाकी का मूल संदेश यह है कि सिर्फ पैसा बचाना ही पर्याप्त नहीं है. उनका मानना है कि पैसा ऐसी जगह लगाया जाना चाहिए जहां वह समय के साथ बढ़ने की क्षमता रखता हो. हालांकि कौन-सा निवेश आपके लिए सही रहेगा, इसका फैसला आपकी व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति और सोच पर निर्भर करता है. यही वजह है कि किसी भी निवेश से पहले पूरी जानकारी जुटाना, जोखिम को समझना और अपने वित्तीय लक्ष्यों के मुताबिक फैसला लेना सबसे बेहतर रणनीति मानी जाती है.
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