Robert Kiyosaki की बड़ी चेतावनी से मचा हड़कंप, बोले, शुरू हो चुका है इतिहास का सबसे बड़ा क्रैश!

सौरभ दीक्षित

• 02:33 PM • 15 Sep 2026

रॉबर्ट कियोसाकी ने दावा किया है कि बड़ा बाजार क्रैश शुरू हो चुका है. जानिए उन्होंने तेल, कर्ज, महंगाई, एआई और रिटायरमेंट बचत पर क्या चेतावनी दी.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

कियोसाकी ने कहा, सबसे बड़ी market गिरावट की शुरुआत अब हो चुकी

उन्होंने तेल, युद्ध, कर्ज और महंगाई को बड़े खतरे बताए

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में ज्यादा उम्मीदें तेज सुधार का कारण बन सकतीं

रिच डैड पुअर डैड के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी ने शेयर बाजार और दुनिया की अर्थव्यवस्था को लेकर नई चेतावनी दी है. उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर दावा किया है कि इतिहास का सबसे बड़ा बाजार क्रैश शुरू हो चुका है. इस बयान के बाद निवेशकों के बीच फिर से चर्चा तेज हो गई है. कियोसाकी का कहना है कि दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ता तनाव, तेल की कीमतों पर दबाव और बाजार में बहुत ज्यादा उम्मीदें आगे चलकर बड़ी गिरावट की वजह बन सकती हैं. हालांकि यह साफ रहना चाहिए कि यह उनकी निजी राय है. यह कोई तय आर्थिक नतीजा या गारंटी नहीं है.

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कियोसाकी ने क्यों दी चेतावनी

कियोसाकी ने अपनी पोस्ट में कहा कि उन्होंने 2002 में रिच डैड्स प्रोफेसी नाम की किताब लिखी थी. उनके मुताबिक उस किताब का मकसद लोगों को शेयर और बॉन्ड बाजार में बड़ी गिरावट के लिए पहले से तैयार करना था. अब उनका दावा है कि 2026 में जिस बड़े क्रैश की उन्होंने बात की थी, उसकी शुरुआत यूरोप और जापान से हो चुकी है और इसका असर दूसरे हिस्सों में भी फैल रहा है.

उन्होंने गिरावट की ये वजहें गिनाईं

• पहला कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर बाजार में बहुत ज्यादा उत्साह है. उनका मानना है कि अगर इस हिस्से में कंपनियों की कीमतें हकीकत से बहुत आगे निकल गई हैं, तो बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है.

• दूसरा कारण ईरान से जुड़ा युद्ध और देशों के बीच बढ़ता तनाव है. कियोसाकी के मुताबिक अगर यह तनाव बढ़ता है तो तेल महंगा हो सकता है, जिससे महंगाई का दबाव बढ़ेगा और उसका असर अर्थव्यवस्था और बाजार दोनों पर पड़ेगा.

• तीसरा कारण बहुत ज्यादा कर्ज है. कियोसाकी लंबे समय से अमेरिका समेत दुनिया पर बढ़ते कर्ज को बड़ा जोखिम बताते रहे हैं.

• चौथा कारण बेबी बूमर पीढ़ी का रिटायर होना है. उनका कहना है कि इस पीढ़ी के बड़े हिस्से के रिटायरमेंट की उम्र में पहुंचने का असर रिटायरमेंट फंड और बाजार पर पड़ सकता है.

खास चेतावनी

कियोसाकी ने खास तौर पर उन लोगों का जिक्र किया है जिनकी उम्र 40 साल से ज्यादा है और जिनकी बचत 401(के), आईआरए, सुपरएनुएशन या आरआरएसपी जैसी रिटायरमेंट योजनाओं में लगी है. उनके मुताबिक ऐसे लोगों को बाजार के जोखिम को हल्के में नहीं लेना चाहिए.

कियोसाकी ने कहा कि निवेशकों को तब तक इंतजार नहीं करना चाहिए, जब तक आम लोगों में घबराहट शुरू न हो जाए. उनकी चेतावनी है कि ऐसी हालत में लोग बैंकों से पैसे निकालने के लिए दौड़ सकते हैं.

कियोसाकी ने अपनी बात को 1929 से 1954 के दौर से भी जोड़ा. उनका कहना है कि पिछली बड़ी मंदी करीब 25 साल चली थी. उन्होंने केनेडी परिवार का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौर में कुछ लोग पहले से तैयारी करके फायदे की स्थिति में थे.

कियोसाकी खुद क्या कर रहे हैं

कियोसाकी के मुताबिक वह सालों से अपनी तैयारी के बारे में बताते रहे हैं. उनका कहना है कि वह अपने कारोबार, कमाई देने वाली रियल एस्टेट, तेल के कुओं में निवेश और नकद के बजाय सोना, चांदी और बिटकॉइन जमा करने पर जोर देते हैं. उनका तर्क है कि बड़े पैमाने पर पैसा छापे जाने से पैसे की कीमत पर दबाव पड़ सकता है.

उन्होंने अपनी पोस्ट में 2026 में प्रकाशित द एंट्रॉपी ट्रैप नाम की किताब का भी जिक्र किया है, जिसे मिकी मैनी ने लिखा है.

रॉबर्ट कियोसाकी का कहना है कि शेयर बाजार में बड़ी गिरावट का दौर शुरू हो चुका है और निवेशकों को पहले से सतर्क रहना चाहिए. वहीं यह भी जरूरी है कि उनकी बात को एक राय और चेतावनी के तौर पर देखा जाए, न कि तय भविष्यवाणी के तौर पर. फिलहाल उनकी पोस्ट ने शेयर बाजार, कर्ज, तेल और महंगाई को लेकर चर्चा जरूर तेज कर दी है.