डॉलर के मुकाबले रुपया दो महीने के मजबूत स्तर पर, RBI के आंकड़ों से सहारा.

तनीषा त्यागी

• 03:59 PM • 03 Sep 2026

डॉलर के मुकाबले रुपया 94.30 पर पहुंच गया. FCNR-B से उम्मीद से ज्यादा विदेशी मुद्रा आई, RBI की सक्रियता और कमजोर डॉलर ने बाजार में इसे सहारा दिया.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

RBI के आंकड़ों ने विदेशी मुद्रा आमद को लेकर भरोसा बढ़ाया

FCNR-B जमा में बाजार के अनुमान से काफी ज्यादा रकम आई

एनआरआई विदेशी मुद्रा सीधे भारतीय बैंकों में FCNR-B जमा करते हैं

Indian Rupee : भारतीय रुपये ने 3 सितंबर को कारोबार की शुरुआत में शानदार मजबूती दिखाई. डॉलर के मुकाबले रुपया 67 पैसे चढ़कर 94.30 के स्तर पर पहुंच गया. यह करीब दो महीने में रुपये का सबसे मजबूत स्तर है. जून के बाद एक दिन में रुपये की यह सबसे बड़ी शुरुआती तेजी रही. रुपये की मजबूती की बड़ी वजह विदेशी मुद्रा की उम्मीद से ज्यादा आमद मानी जा रही है. भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने 2 सितंबर को FCNR-B के जरिए आने वाली रकम के आंकड़े जारी किए, जो बाजार के अनुमान से काफी ज्यादा रहे. इससे करेंसी बाजार में रुपये को लेकर धारणा मजबूत हुई है.

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दो महीने के हाई पर रुपया

3 सितंबर को कारोबार की शुरुआत में रुपया 94.30 प्रति डॉलर पर पहुंच गया. इससे पहले कारोबारी सत्र में रुपया 94.97 के स्तर पर बंद हुआ था. यानी शुरुआती कारोबार में रुपये में 67 पैसे की तेजी आई. इस तेजी के साथ रुपया करीब दो महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया. बाजार में इस मजबूती की सबसे बड़ी वजह RBI से मिले विदेशी मुद्रा आमद के आंकड़े माने जा रहे हैं.

FCNR-B से कितना पैसा आया?

RBI ने 2 सितंबर को बताया कि FCNR-B के जरिए 127 अरब डॉलर से ज्यादा की रकम जुटाई गई है. बाजार को करीब 90 अरब डॉलर की आमद की उम्मीद थी. यानी वास्तविक रकम अनुमान से काफी ज्यादा रही. इसी वजह से इसे रुपये के लिए सकारात्मक माना जा रहा है. External Commercial Borrowings और विदेशी मुद्रा में लिए गए कर्ज को भी जोड़ें तो कुल आमद करीब 136 अरब डॉलर तक पहुंच गई.

FCNR-B क्या है?

FCNR-B यानी Foreign Currency Non-Resident Bank Deposit, NRI के लिए बैंक जमा की सुविधा है. इसके तहत विदेश में रहने वाले भारतीय अपनी विदेशी मुद्रा भारतीय बैंकों में जमा कर सकते हैं. रकम डॉलर, पाउंड और यूरो जैसी विदेशी मुद्राओं में रखी जा सकती है. इसमें NRI को अपनी रकम को रुपये में बदलकर जमा करने की जरूरत नहीं होती. बैंक विदेशी मुद्रा में ही जमा स्वीकार करता है और उस पर तय नियमों के मुताबिक ब्याज देता है.

FCNR-B से रुपये को कैसे फायदा?

जब देश में विदेशी मुद्रा की आमद बढ़ती है, तो वित्तीय व्यवस्था में डॉलर और दूसरी विदेशी मुद्राओं की उपलब्धता बढ़ती है. इससे डॉलर की कमी का दबाव घट सकता है. सीधे शब्दों में कहें तो डॉलर की उपलब्धता बढ़ने और उसकी मांग के मुकाबले आपूर्ति बेहतर होने से रुपये को सहारा मिलता है. इसी वजह से FCNR-B से उम्मीद से ज्यादा रकम आने को रुपये के लिए सकारात्मक माना जा रहा है.

RBI की भूमिका भी अहम

रुपये की मजबूती में RBI की भूमिका भी महत्वपूर्ण है. बाजार में यह धारणा है कि केंद्रीय बैंक डॉलर की खरीद-बिक्री के जरिए रुपये में ज्यादा उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है. जरूरत पड़ने पर RBI के हस्तक्षेप से करेंसी बाजार में स्थिरता आ सकती है.

94.10 का स्तर अहम

Shinhan Bank के Kunal Sodhani के मुताबिक रुपये के लिए फिलहाल 94.10 से 95.50 का दायरा महत्वपूर्ण है. अगर रुपया 94.10 के नीचे टिकता है, तो 93.50 के स्तर तक जाने की संभावना बन सकती है. ऐसे में 94.10 रुपये के लिए अहम स्तर है.

डॉलर में कमजोरी से भी सहारा

रुपये को वैश्विक बाजार से भी समर्थन मिल रहा है. Dollar Index 99.50 के नीचे आ गया है. डॉलर की कमजोरी की एक बड़ी वजह जापानी येन में आई तेजी मानी जा रही है. अगर डॉलर की कमजोरी जारी रहती है, तो इससे भारतीय रुपये समेत दूसरी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं को फायदा मिल सकता है.

महंगा कच्चा तेल बड़ी चुनौती

रुपये के सामने सबसे बड़ा जोखिम कच्चे तेल की कीमत है. Brent crude करीब 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के कारण तेल की कीमतों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है. तेल महंगा होने पर आयात के लिए ज्यादा डॉलर की जरूरत पड़ती है. इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव बन सकता है. वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी भी रुपये के लिए जोखिम है.

आगे रुपये की चाल कैसी रहेगी?

फिलहाल रुपये को FCNR-B से आई मजबूत विदेशी मुद्रा, RBI की सक्रियता और डॉलर में कमजोरी से सहारा मिला है. इसी वजह से रुपया 94.30 के करीब दो महीने के मजबूत स्तर पर पहुंचा है. अब बाजार की नजर 94.10 के स्तर पर रहेगी. इसके नीचे रुपया टिकता है तो 93.50 की ओर बढ़ सकता है. वहीं 94.10 से 95.50 के दायरे में भी कारोबार जारी रह सकता है. आगे रुपये की दिशा तय करने में कच्चे तेल की कीमत, अमेरिका-ईरान तनाव, वैश्विक बॉन्ड यील्ड, डॉलर इंडेक्स और RBI की रणनीति अहम रहेगी.

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