Rupee Rise: ₹95 के नीचे पहुंचा रुपया, लेकिन अगले हफ्ते मंडरा रहा बड़ा खतरा !

चिराग ठाकुर

• 02:31 PM • 05 Sep 2026

रुपया 95 के नीचे जरूर आया है, लेकिन इसकी मजबूती के पीछे बड़ा डॉलर प्रवाह है. 11 सितंबर के बाद कच्चा तेल, आयातकों की डॉलर मांग और फेड की चाल इसकी असली परीक्षा लेंगी.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

हाल की मजबूती में बड़े विदेशी मुद्रा प्रवाह का सबसे बड़ा हाथ रहा

एफसीएनआर जमा का रुपयों में बदलना बाजार में डॉलर बढ़ा गया

11 सितंबर के बाद यह सहारा घटा तो दबाव लौट सकता है

कुछ हफ्तों पहले जिस रुपये के 100 के पार जाने की चिंता हो रही थी, उसी रुपये ने अब जबरदस्त वापसी की है. रुपया पिछले दो महीनों के अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है और प्रति डॉलर ₹95 के स्तर को तोड़कर नीचे आ चुका है. इतना ही नहीं, इस हफ्ते रुपया एशिया में दक्षिण कोरियाई वॉन के बाद दूसरा सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली करेंसी रहा है.

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लेकिन कहानी का दूसरा पहलू भी है. रुपये की इस तेजी के पीछे कुछ ऐसे factors हैं, जिनका असर लंबे समय तक बना रहना मुश्किल है. ऐसे में सवाल सिर्फ यह नहीं है कि रुपया कितना मजबूत हुआ, बल्कि यह है कि इस मजबूती के पीछे कितनी ताकत टिकाऊ है और कितना असर अस्थायी factors का है.

दो महीने में रुपये ने कैसे मारी पलटी?

रुपये की हालिया मजबूती में सबसे बड़ा योगदान विदेशी मुद्रा के बड़े inflow का रहा है. RBI की ओर से FCNR(B) यानी Foreign Currency Non-Resident Bank Deposits से जुड़े फंड को रुपये में convert करने के लिए एक खास concessional window दी गई थी.

इसके जरिए करीब $136.4 अरब का विदेशी मुद्रा inflow आया. इसे आसान भाषा में समझें तो जब विदेशी मुद्रा बाजार में आती है और उसका एक हिस्सा रुपये में convert होता है, तो डॉलर की supply बढ़ती है. Supply बढ़ने पर डॉलर की कीमत पर दबाव आता है और रुपये को मजबूती मिलती है.

रुपये को मिला बड़ा सहारा:

  • करीब $136.4 अरब का foreign currency inflow.
  • डॉलर की supply बढ़ने से रुपये को support.
  • अमेरिकी डॉलर में हालिया कमजोरी का भी फायदा.

FCNR(B) की वजह से आया पैसा, लेकिन अब क्या?

FCNR(B) को लेकर एक बात समझना जरूरी है. इसमें NRI विदेशी मुद्रा में deposits रखते हैं. जब इन funds का conversion रुपये में होता है, तो बाजार में डॉलर की उपलब्धता बढ़ती है.

यहीं से रुपये के लिए असली सवाल शुरू होता है. यह inflow हमेशा बाजार को support नहीं करता रहेगा. 11 सितंबर के आसपास swap settlement process पूरा होने के बाद इस flow-based support के कमजोर पड़ने की आशंका है.

अगर डॉलर की यह अतिरिक्त supply घटती है और दूसरी तरफ importers की डॉलर demand बढ़ती है, तो रुपये पर फिर दबाव आ सकता है.

CR Forex के Amit Pabari के मुताबिक, डॉलर-रुपया जोड़ी आगे चलकर ₹95.50 से ₹96 की तरफ बढ़ सकती है. यानी मौजूदा मजबूती के बाद रुपये के सामने फिर ₹95 का स्तर चुनौती बन सकता है.

अब कच्चा तेल बिगाड़ सकता है पूरा खेल

रुपये के लिए दूसरी और शायद ज्यादा बड़ी चिंता Crude Oil है. Brent crude हाल में $96 प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है और इस हफ्ते इसमें करीब 7% की तेजी आई है.

भारत अपनी crude oil जरूरत का बड़ा हिस्सा import करता है. इसलिए तेल जितना महंगा होगा, उसे खरीदने के लिए उतने ही ज्यादा डॉलर की जरूरत पड़ेगी.

महंगे तेल का रुपये पर सीधा असर:

  • Crude Oil महंगा.
  • Oil imports के लिए ज्यादा डॉलर की जरूरत.
  • डॉलर की demand बढ़ेगी.
  • रुपये पर दबाव बढ़ सकता है.
  • साथ ही inflation का खतरा भी बढ़ेगा.

US Fed पर भी बाजार की नजर

रुपये के लिए तीसरा अहम factor अमेरिकी Federal Reserve है. अगर अमेरिका का inflation या jobs data उम्मीद से ज्यादा मजबूत आता है, तो US interest rates में कटौती की उम्मीद कमजोर हो सकती है.

ऐसी स्थिति में डॉलर मजबूत हो सकता है और emerging market currencies, जिसमें रुपया भी शामिल है, पर दबाव बढ़ सकता है.

रुपये के अहम Support और Resistance

आने वाले दिनों में technical levels भी महत्वपूर्ण रहेंगे. HDFC Securities के मुताबिक डॉलर-रुपये की जोड़ी में ₹94.10 के आसपास support और ₹94.95 के आसपास resistance है.

वहीं LKP Securities का अनुमान है कि near term में रुपया करीब ₹94.25 से ₹95 के दायरे में रह सकता है.

अहम स्तर:

  • Support: ₹94.10
  • Resistance: ₹94.95
  • Near-term Range: ₹94.25–₹95

रुपये की असली परीक्षा अब शुरू होगी

फिलहाल analysts रुपये को लेकर पूरी तरह bearish नहीं हैं. लेकिन आने वाले दिनों में दो factors सबसे ज्यादा मायने रखेंगे - 11 सितंबर के बाद FCNR(B)-related support कितना कम होता है और Crude Oil कितने ऊंचे स्तर पर बना रहता है.

यानी रुपये ने ₹95 के नीचे पहुंचकर जरूर दम दिखाया है, लेकिन अब देखना यह है कि क्या यह मजबूती बिना बड़े dollar inflow के भी कायम रह सकती है.

अगर temporary support हट गया और तेल महंगा बना रहा, तो रुपये की असली परीक्षा शुरू हो सकती है.