ताश के पत्तों की तरह बिखर गया रुपया, 95.28 प्रति डॉलर पर फिसला, कच्चे तेल और मजबूत डॉलर से दबाव, पूरी डिटेल

सौरभ दीक्षित

• 07:24 PM • 07 Aug 2026

डॉलर की मजबूती, कच्चे तेल के बढ़ते दाम और अमेरिकी यील्ड के दबाव में रुपया 95.28 प्रति डॉलर पर पहुंचा. अब बाजार की नजर 95.00-95.10 और 96.00-96.20 के अहम स्तरों पर है.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

शुक्रवार के शुरुआती कारोबार में विदेशी मुद्रा बाजार में दबाव बना रहा

गुरुवार की गिरावट के बाद लगातार दूसरे सत्र में कमजोरी दिखी

कच्चा तेल महंगा होने से आयातकों की डॉलर जरूरत बढ़ सकती है

डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की कमजोरी एक बार फिर चर्चा में है. शुक्रवार 7 अगस्त को शुरुआती कारोबार में रुपया 6 पैसे फिसलकर 95.28 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया. इसका मतलब है कि 1 डॉलर खरीदने के लिए अब करीब 95 रुपये 28 पैसे देने पड़ रहे हैं.

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रुपये पर दबाव की सबसे बड़ी वजह डॉलर की मजबूती, अमेरिका की बढ़ती ट्रेजरी यील्ड और कच्चे तेल के दाम माने जा रहे हैं. जानकारों का कहना है कि अगर यह दबाव बना रहा, तो आगे रुपये की चाल पर असर पड़ सकता है. हालांकि 96 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंचने का कोई पक्का दावा नहीं किया गया है.

शुक्रवार को क्या हुआ

इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में शुक्रवार को रुपया 95.27 के स्तर पर खुला. कारोबार आगे बढ़ने पर यह 95.28 रुपये प्रति डॉलर तक कमजोर हो गया. यह पिछले बंद भाव के मुकाबले 6 पैसे की गिरावट थी.

गुरुवार को रुपया 14 पैसे कमजोर होकर 95.22 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था.शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में यह और 6 पैसे फिसला.इस तरह लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में रुपये पर दबाव दिखा.

रुपये पर दबाव क्यों है

जानकारों के मुताबिक रुपये पर दबाव के पीछे कई कारण हैं. इनमें डॉलर की मजबूती, अमेरिका की ऊंची ट्रेजरी यील्ड और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें शामिल हैं. आसान भाषा में समझें तो भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का विदेशों से खरीदता है. जब तेल महंगा होता है, तो भारतीय खरीदारों को ज्यादा डॉलर की जरूरत पड़ती है. इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर पड़ सकता है.

कच्चे तेल की कीमत क्यों अहम है

शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड करीब 1.20 फीसदी चढ़कर 83.48 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. यानी तेल फिर 83 डॉलर के आसपास आ गया. जानकारों का कहना है कि तेल के ऊंचे दाम रुपये के लिए चिंता बढ़ाते हैं, क्योंकि इससे आयात बिल बढ़ सकता है.

तेल महंगा होने पर ज्यादा डॉलर में भुगतान करना पड़ता है.डॉलर की मांग बढ़ने से रुपये पर दबाव आता है.यही वजह है कि कच्चे तेल की चाल रुपये के लिए बहुत अहम मानी जाती है.

डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी यील्ड का असर

अमेरिकी डॉलर भी मजबूत बना हुआ है. डॉलर इंडेक्स 0.02 फीसदी बढ़कर 99.95 पर कारोबार कर रहा था. डॉलर इंडेक्स दुनिया की 6 प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की ताकत दिखाता है. जब डॉलर मजबूत होता है, तो भारतीय रुपये जैसी उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ सकता है.

जानकारों के मुताबिक तेल 83 डॉलर के आसपास, डॉलर 100 के करीब और अमेरिकी यील्ड ऊंची रहने से रुपये पर दबाव बना रह सकता है. उनके अनुसार 95.00 से 95.10 का स्तर रुपये के लिए अहम सपोर्ट माना जा रहा है. अगर कमजोरी बढ़ती है, तो 96.00 से 96.20 का दायरा भी सामने आ सकता है.

हॉर्मुज का तनाव क्यों जरूरी है

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया का बहुत अहम तेल व्यापार मार्ग है. अगर यहां तनाव बढ़ता है, तो तेल की सप्लाई और कीमतों को लेकर चिंता बढ़ सकती है. इसका सीधा असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश पर पड़ सकता है. तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ सकता है और ज्यादा डॉलर की जरूरत पड़ने पर रुपये पर दबाव आ सकता है. इसका असर महंगाई तक भी पहुंच सकता है.

आगे किन बातों पर रहेगी नजर

कच्चे तेल की कीमत.डॉलर की मजबूती.अमेरिका की ट्रेजरी यील्ड.हॉर्मुज से जुड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रम.

फिलहाल तस्वीर यह है कि रुपया 95 के आसपास दबाव में बना हुआ है. 95.00 से 95.10 का स्तर अहम माना जा रहा है, जबकि 96.00 से 96.20 का दायरा अगला संभावित स्तर बताया जा रहा है. जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में रुपये की दिशा सिर्फ घरेलू बाजार नहीं, बल्कि डॉलर, अमेरिकी यील्ड, कच्चे तेल और हॉर्मुज से जुड़ी स्थिति भी तय करेगी.