Russia Gold Reserve Crisis: 25 साल बाद रूस धड़ाधड़ बेच रहा सोना… क्या आर्थिक संकट में फंस चुका है पुतिन का देश? जानें इसके पीछे की वजह

Gold Silver Price Update: यूक्रेन युद्ध, पश्चिमी प्रतिबंध और बढ़ते आर्थिक दबाव के बीच रूस अब अपना गोल्ड रिजर्व बेचने पर मजबूर हो गया है. 24 साल की सबसे बड़ी गिरावट के बीच रूस धड़ाधड़ सोना बाजार में उतार रहा है. इसका असर भारत समेत ग्लोबल गोल्ड मार्केट पर भी दिखने लगा है, जहां सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज हुई.

Gold Silver Price Today
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सौरभ दीक्षित

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Gold Silver Rate Today: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर साफ देखने को मिल रहा है. इस बीच रूस की अर्थव्यवस्था से जुड़ी एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है. दुनिया के सबसे बड़े सोना जमा करने वाले देशों में गिना जाने वाला रूस अब अपना सोना बेचने पर मजबूर हो गया है. रूस के गोल्ड रिजर्व में पिछले 24 साल की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है और वह धड़ाधड़ अपना सोना बाजार में निकाल रहा है. दूसरी तरफ, अगर भारत की बात करें तो 26 मई को घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखी गई है. इस खबर में हम विस्तार से जानेंगे कि सोने-चांदी की कीमतों में यह गिरावट क्यों आई है, रूस अपना सोना क्यों बेच रहा है और इस पूरे घटनाक्रम का आम आदमी के लिए क्या मतलब है.

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भारतीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों का हाल

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर 26 मई को दोपहर करीब साढ़े 12 बजे सोने और चांदी की कीमतों में भारी कमजोरी दर्ज की गई. 5 जून 2026 की डिलीवरी वाला सोना करीब 1000 रुपये की बड़ी गिरावट के साथ 1,58,094 रुपये प्रति किलो पर ट्रेड कर रहा था. वहीं, 3 जुलाई 2026 की डिलीवरी वाली चांदी में भी तगड़ी बिकवाली देखी गई और यह 5243 रुपये की गिरावट के साथ 2,71,474 रुपये प्रति किलो पर कारोबार कर रही थी. कीमतों में आई इस अचानक गिरावट ने निवेशकों और आम खरीदारों का ध्यान अपनी ओर खींचा है.

रूस के सोने के भंडार में 24 साल की सबसे बड़ी गिरावट

रूस के गोल्ड रिजर्व को लेकर जो नए आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद हैरान करने वाले हैं. अप्रैल 2026 में रूस के सोने के भंडार में पिछले 24 साल की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. सेंट्रल बैंक ऑफ रशिया के पास मई 2026 तक लगभग 73.9 मिलियन औंस सोना ही बचा है. रूस ने सिर्फ अप्रैल के महीने में ही लगभग 2 लाख औंस सोना बेच दिया. अगर साल 2026 की शुरुआत से देखें तो जनवरी से अप्रैल तक रूस के गोल्ड रिजर्व में करीब 9 लाख औंस यानी लगभग 28 टन सोने की कमी आ चुकी है. इससे पहले साल 2002 में रूस के सोने के भंडार में इतनी बड़ी कमी देखी गई थी.

पहला कारण: यूक्रेन युद्ध का भारी-भरकम खर्च और बजट घाटा

आखिर दुनिया के इतने शक्तिशाली देश रूस को अपना सोना बेचने की जरूरत क्यों पड़ रही है, इसके पीछे तीन मुख्य वजहें हैं. पहली और सबसे बड़ी वजह है यूक्रेन के साथ पिछले कई सालों से चल रहा लंबा युद्ध. इस युद्ध के कारण हथियार, सेना, मिसाइल और रक्षा बजट पर रूस के अरबों डॉलर खर्च हो रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 तक रूस का बजट घाटा यानी सरकार की कमाई और खर्च के बीच का अंतर लगभग 4.6 ट्रिलियन रूबल तक पहुंच गया है. सीधे शब्दों में कहें तो रूस की सरकार जितना कमा रही है, उससे कहीं ज्यादा खर्च कर रही है, जिसके कारण उसे अपने सोने के भंडार का इस्तेमाल करना पड़ रहा है.

दूसरा कारण: पश्चिमी देशों के प्रतिबंध और तेल-गैस से कम कमाई

रूस को सोना बेचने पर मजबूर करने वाली दूसरी बड़ी वजह तेल और गैस से होने वाली कमाई में आई भारी कमी है. रूस की पूरी अर्थव्यवस्था काफी हद तक कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की बिक्री पर टिकी हुई है. लेकिन यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंधों और कमजोर एक्सपोर्ट के कारण रूस की कमाई काफी घट गई है. पहले रूस यूरोप के देशों को बड़ी मात्रा में तेल और गैस बेचता था, लेकिन अब कई देशों ने रूस से पूरी तरह दूरी बना ली है, जिससे पैदा हुए वित्तीय संकट को संभालने के लिए रूस अपना रिजर्व बेच रहा है.

तीसरा कारण: अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए विदेशी मुद्रा की जरूरत

सोना बेचने के पीछे तीसरी बड़ी वजह विदेशी मुद्रा की आपात जरूरत है. अंतरराष्ट्रीय बाजार से जरूरी सामानों का आयात करने के लिए रूस को डॉलर और चीनी युआन जैसी विदेशी करेंसी की भारी आवश्यकता है. आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि रूस अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण डॉलर का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है, इसलिए वह अपना सोना बेचकर बदले में चीन की करेंसी 'युआन' खरीद रहा है. ऐसा करने से वह अपना इंटरनेशनल ट्रेड और जरूरी सामानों का आयात बिना किसी रुकावट के जारी रख पा रहा है.

रूस के आम नागरिकों में सोना खरीदने की मची होड़

इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक बेहद दिलचस्प बात यह है कि जहां एक तरफ रूस की सरकार अपना सोना बेच रही है, वहीं वहां के आम लोग तेजी से सोना खरीद रहे हैं. असल में रूस के नागरिकों को डर सता रहा है कि आने वाले समय में उनकी स्थानीय करेंसी 'रूबल' की कीमत और ज्यादा गिर सकती है. अपनी गाढ़ी कमाई और बचत को सुरक्षित रखने के लिए लोग सोने को सबसे सुरक्षित जरिया मान रहे हैं. यही वजह है कि साल 2025 में रूस के लोगों ने रिकॉर्ड 75 टन से ज्यादा सोना खरीदा, जो रूस के कुल सालाना सोने के उत्पादन का लगभग 25 प्रतिशत है.

पश्चिमी देशों से दूरी और चीन पर बढ़ती रूस की निर्भरता

आर्थिक संकट और प्रतिबंधों से घिरे होने के कारण रूस अब अपने सोने का एक बहुत बड़ा हिस्सा चीन को बेच रहा है. रिपोर्ट बताती है कि साल 2025 की पहली छमाही में ही चीन ने रूस से सोना और दूसरी कीमती धातुओं का इम्पोर्ट लगभग दोगुना कर दिया था. चीन को सोना बेचने से रूस को तात्कालिक रूप से आर्थिक मोर्चे पर कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन यह स्थिति साफ तौर पर दर्शाती है कि रूस अब पश्चिमी देशों की बजाय पूरी तरह से चीन की अर्थव्यवस्था पर निर्भर होता जा रहा है.

क्या वाकई गंभीर आर्थिक संकट में फंस चुका है रूस?

इस स्थिति को देखकर सवाल उठता है कि क्या रूस की अर्थव्यवस्था पूरी तरह संकट में है? जानकारों का कहना है कि रूस अभी पूरी तरह से कंगाल या आर्थिक रूप से तबाह नहीं हुआ है, क्योंकि उसके पास अभी भी एक बहुत बड़ा गोल्ड रिजर्व मौजूद है. हालांकि, लगातार चार महीने तक सोने के भंडार को बेचना यह साफ संकेत देता है कि रूस पर आर्थिक दबाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है. लगातार चलते युद्ध, कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, घटते एक्सपोर्ट और बढ़ते सरकारी खर्च ने रूस की आर्थिक स्थिति को अंदर से कमजोर जरूर कर दिया है.

ग्लोबल गोल्ड मार्केट पर इस महासंकट का असर

कुल मिलाकर देखा जाए तो अगर रूस लंबे समय तक इसी तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपना सोना बेचता रहा, तो ग्लोबल गोल्ड मार्केट में सोने की कीमतों पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है. दूसरी तरफ, चीन जिस तरह से लगातार सोना खरीद रहा है, उससे यह संकेत भी मिलता है कि दुनिया के कई बड़े देश अब अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता को कम करना चाहते हैं. डॉलर के विकल्प के रूप में ये देश सोने और दूसरी मजबूत क्षेत्रीय करेंसी (जैसे युआन) की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं, जो भविष्य में वैश्विक अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल सकता है.

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