दुनिया के कई केंद्रीय बैंक पिछले कुछ सालों में तेजी से सोना जमा कर रहे हैं. चीन और भारत जैसे देश भी अपने सोने के भंडार बढ़ा रहे हैं. ऐसे माहौल में रूस का सोना बेचना बड़ी खबर बन गया है.
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रूस ने 2026 के पहले छह महीनों में करीब 44 टन सोना बेचा है. यही बात इस खबर को अहम बनाती है, क्योंकि रूस पिछले करीब दो दशकों तक लगातार सोना खरीदने वाले बड़े देशों में रहा है.
आंकड़े क्या कहते हैं
जुलाई 2026 की शुरुआत में रूस के केंद्रीय बैंक के पास करीब 2,282 टन सोना बचा था. साल की शुरुआत से उसके सोने के भंडार में 43.5 टन की कमी आ चुकी है. इसका मतलब है कि रूस लगातार छह महीने से अपना सोना घटा रहा है.
सोना बेचने की सबसे बड़ी वजह
रिपोर्ट के मुताबिक, इसकी सबसे बड़ी वजह बढ़ता सरकारी खर्च है. यूक्रेन युद्ध लंबा खिंच चुका है और ऐसे हालात में हथियार, सेना, रक्षा बजट और अर्थव्यवस्था, सब पर दबाव बढ़ता है. मार्च के अंत तक रूस का बजट घाटा 4.6 ट्रिलियन रूबल तक पहुंच गया था. आसान शब्दों में कहें तो सरकार की कमाई से ज्यादा खर्च हो रहा था.
जानकार क्या कह रहे हैं
जानकारों का कहना है कि रूस की तेल और गैस से होने वाली कमाई इस साल उम्मीद से कमजोर रही. जब निर्यात से डॉलर और दूसरी विदेशी मुद्रा कम आने लगी, तब विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने की जरूरत महसूस हुई. इसी वजह से रूस ने सोना बेचकर चीनी युआन जैसी विदेशी मुद्रा खरीदी, ताकि जरूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल किया जा सके.
रूस का पुराना रुख क्या रहा है
रूस ने 2002 से 2025 के बीच अपने भंडार में करीब 1,900 टन सोना जोड़ा था. एक समय उसे दुनिया के बड़े सरकारी सोना खरीदारों में गिना जाता था. लेकिन यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बाद उसकी चाल बदलती दिख रही है.
एक नजर जरूरी आंकड़ों पर
- 2026 के पहले छह महीनों में रूस ने करीब 44 टन सोना बेचा.
- जुलाई 2026 की शुरुआत में रूस के पास करीब 2,282 टन सोना बचा था.
- मार्च के अंत तक रूस का बजट घाटा 4.6 ट्रिलियन रूबल तक पहुंच गया था.
- रूस के मौजूदा सोने के भंडार की कीमत करीब 299 अरब डॉलर आंकी गई है.
भारत में सोना और चांदी का भाव
24 जुलाई को एमसीएक्स पर 5 अगस्त 2026 डिलीवरी वाला सोना हल्की तेजी के साथ 1,43,066 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ. वहीं 4 सितंबर 2026 डिलीवरी वाली चांदी 2,926 रुपये की तेजी के साथ 2,22,301 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई.
क्या रूस के पास अब भी बड़ा सोना भंडार है
हां, रूस के पास अब भी 2,282 टन सोना मौजूद है. कीमत के हिसाब से यह करीब 299 अरब डॉलर बैठता है. यानी सोना बेचने के बाद भी रूस दुनिया के बड़े सोना भंडार वाले देशों में बना हुआ है.
कुल मिलाकर, यूक्रेन युद्ध, बढ़ता सरकारी खर्च, तेल और गैस से कमजोर कमाई और विदेशी मुद्रा की जरूरत, इन सबने रूस को अपने सोने के भंडार का एक हिस्सा बेचने की तरफ धकेला है. यह मामला दिखाता है कि लंबे युद्ध का असर सिर्फ मोर्चे पर नहीं, बल्कि किसी देश के खजाने और पूरी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है.
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