दुनिया के कई केंद्रीय बैंक अपने भंडार में सोना जोड़ रहे हैं, लेकिन रूस लगातार उलटा कदम उठा रहा है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, रूस के सोना भंडार में लगातार छठे महीने गिरावट आई है. जून के आखिर तक उसके सोना भंडार की कुल कीमत 298.99 अरब डॉलर रह गई, जो 300 अरब डॉलर से नीचे है. आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि रूस के कुल आधिकारिक भंडार में कमी आई है. विदेशी मुद्रा भंडार लगभग स्थिर रहा, लेकिन सोना भंडार घटता गया. विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे सरकारी खर्च, बजट घाटा, यूक्रेन युद्ध पर बढ़ता खर्च और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का दबाव बड़ी वजह हो सकते हैं.
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भारत में सोना और चांदी का भाव
10 जुलाई को दोपहर करीब 12.30 बजे मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर 5 अगस्त 2026 डिलीवरी वाला सोना 795 रुपये की गिरावट के साथ 1,44,505 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था. वहीं 4 सितंबर 2026 डिलीवरी वाली चांदी 2,900 रुपये से ज्यादा की गिरावट के साथ 2,23,453 रुपये प्रति किलो पर कारोबार कर रही थी.
रूस के भंडार में कितनी कमी आई
रूस के केंद्रीय बैंक के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मई के अंत तक उसके कुल आधिकारिक भंडार 747.4 अरब डॉलर थे. जून के अंत तक यह घटकर 720.4 अरब डॉलर रह गए. वहीं विदेशी मुद्रा भंडार मई में 392.3 अरब डॉलर था, जो जून के अंत तक 392.4 अरब डॉलर हो गया. इससे साफ है कि विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ा बदलाव नहीं हुआ, लेकिन सोना भंडार में लगातार कमी आई.
जून के आखिर तक रूस के सोना भंडार की कीमत 298.99 अरब डॉलर रही.यह लगातार छठा महीना है जब रूस के सोना भंडार में गिरावट दर्ज की गई.साल की शुरुआत से केंद्रीय बैंक के भंडार में करीब 9 लाख औंस सोना कम हुआ.सिर्फ एक महीने में करीब 2 लाख औंस की कमी आई.जनवरी से अप्रैल के बीच भंडार में करीब 27.9 टन की कमी दर्ज हुई.इसे 2002 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट माना जा रहा है.
रूस सोना क्यों बेच रहा है
विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे सबसे बड़ी वजह सरकारी खर्च और बजट घाटा है. विश्लेषकों के मुताबिक, रूस यूक्रेन युद्ध पर भारी खर्च कर रहा है और पश्चिमी देशों के आर्थिक प्रतिबंधों का असर भी उसकी अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है. मार्च के आखिर तक रूस का बजट घाटा करीब 4.6 ट्रिलियन रूबल पहुंच गया था. विश्लेषकों का यह भी कहना है कि अगर केंद्रीय बैंक मदद नहीं करता, तो यह घाटा 5 ट्रिलियन रूबल से ज्यादा हो सकता था. इसी वजह से सरकार के खर्च पूरे करने के लिए सोना बेचे जाने की बात कही जा रही है.
पहले खरीदार, अब बिकवाली
2002 से 2025 तक रूस दुनिया के बड़े सोना खरीदार देशों में शामिल रहा. इन 24 वर्षों में उसने 1,900 टन से ज्यादा सोना खरीदा. 2008 से 2012 के बीच रूस ने करीब 500 टन सोना खरीदा. 2014 से 2019 के बीच उसने करीब 1,200 टन सोना अपने भंडार में जोड़ा. यानी लंबे समय तक रूस अपने सोना भंडार को मजबूत करता रहा. लेकिन 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद तस्वीर बदल गई और अब रूस खरीदने के बजाय सोना बेच रहा है.
उत्पादन और घरेलू मांग का हाल
रूस अभी भी दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उत्पादक देश है. वहां हर साल 300 टन से ज्यादा सोने का उत्पादन होता है. पहले स्थान पर चीन है. दूसरी तरफ रूस के अंदर सोने की मांग भी बढ़ी है. 2024 में रूस के लोगों ने करीब 75.6 टन सोना खरीदा, जो उसके कुल सालाना उत्पादन का लगभग 25 फीसदी है. यानी देश में बनने वाले सोने का बड़ा हिस्सा घरेलू खरीदारों ने ले लिया.
कुल मिलाकर ताजा आंकड़े बताते हैं कि रूस का सोना भंडार लगातार घट रहा है. वजह के तौर पर बजट घाटा, यूक्रेन युद्ध पर खर्च, विदेशी मुद्रा की जरूरत और प्रतिबंधों का दबाव सामने आ रहा है. अगर यही हाल रहा, तो आने वाले महीनों में भी रूस को अपने भंडार से सोना बेचना पड़ सकता है.
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