SBI का नया Hybrid Fund लॉन्च, इक्विटी और डेट दोनों में लगेगा पैसा, ₹5,000 से निवेश की शुरुआत

संदीप शर्मा

10 Aug 2026 (अपडेटेड: Aug 10 2026 4:25 PM)

एसबीआई म्यूचुअल फंड का नया बैलेंस्ड हाइब्रिड फंड 10 से 24 अगस्त तक खुला है. इसमें इक्विटी और डेट का संतुलित मेल है, पर रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

SBI का नया Balanced Hybrid Fund लॉन्च

NFO 10 से 24 अगस्त 2026 तक खुला रहेगा

40-60% पैसा इक्विटी और 40-60% डेट में निवेश किया जाएगा

₹5,000 से निवेश शुरू, रिटर्न की कोई गारंटी नहीं

SBI Mutual Fund ने निवेशकों के लिए एक नया SBI Balanced Hybrid Fund लॉन्च किया है. यह एक ओपन-एंडेड हाइब्रिड म्यूचुअल फंड है, जो निवेशकों के पैसे को इक्विटी और डेट दोनों में लगाएगा. इसका मकसद शेयर बाजार से ज्यादा मुनाफा कमाने और फिक्स्ड डिपॉजिट जैसी स्कीमों से सुरक्षित रिटर्न पाने के बीच संतुलन बनाना है. इस नए फंड का NFO यानी New Fund Offer 10 अगस्त 2026 से 24 अगस्त 2026 तक खुला रहेगा. कंपनी ने साफ किया है कि इस स्कीम में किसी तरह के रिटर्न की गारंटी नहीं है.

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फंड में पैसा कहां लगाया जाएगा?

SBI Balanced Hybrid Fund में निवेश का एक तय दायरा रखा गया है. फंड की कुल संपत्ति का 40% से 60% हिस्सा इक्विटी और उससे जुड़े साधनों में लगाया जाएगा. 40% से 60% हिस्सा डेट सिक्योरिटीज में निवेश किया जाएगा.इक्विटी हिस्से में कंपनियों के शेयर और REITs जैसे साधन शामिल हो सकते हैं. वहीं डेट वाले हिस्से में सिक्योरिटाइज्ड डेट, डेट डेरिवेटिव्स और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश किया जा सकता है.फंड जरूरत के हिसाब से डेट-केंद्रित म्यूचुअल फंड की यूनिट्स और SEBI या RBI से मंजूर दूसरे निवेश साधनों में भी पैसा लगा सकता है.

बाजार की स्थिति के हिसाब से रखा जाएगा संतुलन

इस फंड की खास बात यह है कि इसमें इक्विटी और डेट के बीच निवेश का संतुलन एक तय दायरे में रखा जाएगा. इसका मकसद बाजार की अलग-अलग परिस्थितियों में जोखिम और रिटर्न के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करना है.यानी यह फंड पूरी तरह शेयर बाजार पर निर्भर नहीं होगा और न ही पूरी तरह डेट निवेश पर.

विदेशी बाजार में भी निवेश की सुविधा

SBI Balanced Hybrid Fund को विदेशी बाजारों में भी निवेश करने की अनुमति होगी. स्कीम ADR, GDR, विदेशी कंपनियों के शेयर, Overseas ETF और विदेशी डेट सिक्योरिटीज में निवेश कर सकती है.हालांकि, विदेशी निवेश की सीमा स्कीम की कुल संपत्ति के 35% तक रखी गई है.SEBI के नियमों के मुताबिक, स्कीम ओवरसीज सिक्योरिटीज में 25 मिलियन डॉलर तक और ओवरसीज ETF में 10 मिलियन डॉलर तक निवेश कर सकती है.

NFO में कितने रुपये से कर सकते हैं निवेश?

इस फंड के NFO में निवेश की न्यूनतम राशि ₹5,000 रखी गई है.इसके बाद अतिरिक्त निवेश ₹1 और उसके गुणकों में किया जा सकता है. हालांकि, अतिरिक्त खरीद के लिए न्यूनतम राशि ₹1,000 होगी. फंड का बेंचमार्क Nifty 50 Hybrid Composite Debt 50:50 Index है.

1 साल के अंदर पैसा निकालने पर क्या होगा?

इस फंड में एग्जिट लोड के भी नियम हैं. अलॉटमेंट की तारीख से एक साल के भीतर निवेश की गई यूनिट्स में से 10% तक यूनिट्स को रिडीम या दूसरी स्कीम में स्विच करने पर कोई एग्जिट लोड नहीं लगेगा. अगर एक साल के भीतर 10% से ज्यादा यूनिट्स रिडीम या स्विच आउट की जाती हैं, तो अतिरिक्त यूनिट्स पर 1% का एग्जिट लोड लगेगा. वहीं, अलॉटमेंट की तारीख से एक साल के बाद रिडीम या स्विच आउट करने पर कोई एग्जिट लोड नहीं लगेगा.

फंड मैनेजर कौन होगा?

SBI Balanced Hybrid Fund के डेट हिस्से की जिम्मेदारी राजीव राधाकृष्णन संभालेंगे. वह SBI Funds Management में फिक्स्ड इनकम रिसर्च के प्रमुख भी हैं. वहीं, फंड के इक्विटी हिस्से का प्रबंधन तन्मय देसाई करेंगे.

SBI Funds Management के MD और CEO देबाशिष मिश्रा के मुताबिक, SBI Balanced Hybrid Fund का लॉन्च कंपनी के हाइब्रिड निवेश प्लेटफॉर्म को और मजबूत करता है. उनका कहना है कि यह फंड इक्विटी और फिक्स्ड इनकम यानी डेट मार्केट में निवेश का एक अनुशासित तरीका देता है. इसे बदलती बाजार परिस्थितियों में निवेशकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है.

किन निवेशकों के लिए हो सकता है फंड?

SBI Balanced Hybrid Fund उन निवेशकों के लिए एक विकल्प हो सकता है जो अपने निवेश में इक्विटी और डेट दोनों का मिश्रण चाहते हैं. इक्विटी हिस्सा लंबी अवधि में ग्रोथ की संभावना देता है, जबकि डेट हिस्सा पोर्टफोलियो में अपेक्षाकृत स्थिरता लाने में मदद कर सकता है. हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि हाइब्रिड फंड होने के बावजूद इसमें रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है. इक्विटी में निवेश होने की वजह से बाजार में उतार-चढ़ाव का असर इस फंड पर भी पड़ सकता है.

डिस्क्लेमर: निवेश करने से पहले स्कीम से जुड़े सभी दस्तावेज, जोखिम और शर्तों को ध्यान से पढ़ें. म्यूचुअल फंड निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं.