देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के शानदार नतीजे पेश किए हैं. बैंक का मुनाफा और ब्याज से होने वाली कमाई (NII) बाजार के अनुमान से बेहतर रही, जिसके बाद शुक्रवार को SBI के शेयर में तेजी देखने को मिली. हालांकि, मजबूत नतीजों के बीच कुछ ऐसे संकेत भी मिले हैं, जिन पर आने वाले समय में निवेशकों की नजर रहेगी.
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शेयर में आई तेजी
जून तिमाही के नतीजों के बाद शुक्रवार को SBI का शेयर करीब 1.25% की बढ़त के साथ बंद हुआ. शेयर के प्रदर्शन पर नजर डालें तो पिछले एक महीने में इसमें करीब 5.5% की तेजी आई है. हालांकि, पिछले 6 महीनों में शेयर करीब 4.25% कमजोर हुआ है. वहीं, एक साल में इसने करीब 36% और तीन साल में करीब 90% का शानदार रिटर्न दिया है.
मुनाफा और NII ने किया प्रभावित
अप्रैल-जून तिमाही में SBI का शुद्ध मुनाफा 10.2% बढ़कर 21,121 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह 19,160 करोड़ रुपये था. यह आंकड़ा बाजार के अनुमान से भी बेहतर रहा.बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) सालाना आधार पर 15% बढ़कर 46,992 करोड़ रुपये पहुंच गई. वहीं, प्री-प्रोविजन ऑपरेटिंग प्रॉफिट 33,530 करोड़ रुपये रहा, जो अनुमान से काफी ऊपर है.
एसेट क्वालिटी में सुधार जारी
- ग्रॉस NPA घटकर 1.47% रह गया, जो पिछले साल समान तिमाही में 1.49% था
- नेट NPA भी 0.39% से घटकर 0.38% पर आ गया
- इसके अलावा बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) भी बेहतर हुआ, जिससे ब्याज से होने वाली कमाई मजबूत बनी रही
इन आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
नतीजों में कुछ ऐसे संकेत भी मिले हैं, जिन पर निवेशकों की नजर रहेगी.तिमाही के दौरान बैंक का प्रोविजन बढ़कर 5,047 करोड़ रुपये हो गया. वहीं, नए खराब लोन (Slippages) बढ़कर 7,359 करोड़ रुपये पहुंच गए, जबकि पिछली तिमाही में यह 5,548 करोड़ रुपये थे.इसके साथ ही स्लिपेज रेश्यो 0.47% से बढ़कर 0.57% हो गया. फिलहाल बैंक की कुल एसेट क्वालिटी मजबूत बनी हुई है, लेकिन अगर आने वाली तिमाहियों में स्लिपेज बढ़ते रहे तो इसका असर NPA और मुनाफे दोनों पर पड़ सकता है.
बाजार की नजर अब किस पर?
विश्लेषकों का मानना है कि SBI के तिमाही नतीजे मजबूत रहे हैं और बैंक ने लगभग हर बड़े ऑपरेटिंग पैरामीटर पर उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है. मजबूत NII, बेहतर एसेट क्वालिटी और तेज लोन ग्रोथ बैंक के लिए सकारात्मक संकेत हैं.हालांकि, आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि बैंक स्लिपेज को किस तरह नियंत्रित रखता है, नेट इंटरेस्ट मार्जिन को बनाए रख पाता है या नहीं, और लोन ग्रोथ की मौजूदा रफ्तार जारी रहती है या नहीं. यही कारक आगे SBI के शेयर की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.
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