SEBI के Closing Auction Session यानी CAS में प्रस्तावित बदलावों से एक्सपायरी डे पर बाजार में दिखने वाली तेज उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता कम हो सकती है. Jefferies का मानना है कि नए प्रस्ताव एक्सचेंज और ब्रोकिंग कंपनियों के लिए राहत लेकर आ सकते हैं. हालांकि, इसके बावजूद ब्रोकरेज हाउस BSE के शेयर को लेकर अभी भी सकारात्मक नहीं है. Jefferies ने BSE पर अपनी 'Underperform' रेटिंग बरकरार रखी है. ब्रोकरेज ने शेयर के लिए 2,940 रूपये का टारगेट प्राइस दिया है. यह BSE के पिछले बंद भाव 3,384 रूपये से 13 फीसदी से ज्यादा की संभावित गिरावट की ओर इशारा करता है. दूसरी तरफ, Jefferies को Groww की पैरेंट कंपनी Billionbrains Garage Ventures में ज्यादा संभावनाएं नजर आ रही हैं. ब्रोकरेज ने इसमें 'Buy' रेटिंग दी है और 240 रूपये का टारगेट प्राइस रखा है.
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SEBI ने CAS को लेकर क्या बदलाव प्रस्तावित किए हैं?
SEBI ने हाल ही में Closing Auction Session यानी CAS से जुड़े नियमों में बदलाव के लिए कंसल्टेशन पेपर जारी किया है. इसमें एक्सपायरी वाले दिन इंडेक्स और स्टॉक डेरिवेटिव्स के सेटलमेंट प्राइस तय करने के लिए दो विकल्प सुझाए गए हैं. इसके अलावा Continuous Trading Session यानी CTS, CAS और डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग के समय में बदलाव से जुड़े प्रस्ताव भी रखे गए हैं. Jefferies के मुताबिक, इन प्रस्तावित बदलावों से एक्सपायरी डे पर बाजार में पैदा होने वाली अनिश्चितता कम हो सकती है. खासतौर पर डेरिवेटिव्स के सेटलमेंट प्राइस को लेकर किए गए बदलाव अहम माने जा रहे हैं. प्रस्ताव के तहत डेरिवेटिव्स का सेटलमेंट प्राइस VWAP यानी Volume Weighted Average Price के आधार पर तय करने या VWAP और CAS के मिश्रित तरीके का विकल्प दिया गया है. इसके साथ ही CAS के दौरान रेफरेंस प्राइस से +/-1 फीसदी के बाहर लगाए गए लिमिट ऑर्डर्स को कैंसल करने की व्यवस्था में भी बदलाव का प्रस्ताव है. Jefferies के मुताबिक, इससे सेटलमेंट प्राइस में हेरफेर की आशंका को लेकर चिंता कम हो सकती है. वहीं, बिना निष्पादित हुए iceberg orders को CAS में ट्रांसफर करने का प्रस्ताव भी है. इससे CAS विंडो के दौरान लिक्विडिटी बढ़ाने में मदद मिल सकती है.
एक्सपायरी डे की वोलैटिलिटी पर क्या होगा असर?
CAS सिस्टम अगस्त में लागू किया गया था. इसके बाद एक्सपायरी डे के आखिरी घंटे में इंडेक्स की कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिला और इससे घरेलू प्रॉप ट्रेडर्स को नुकसान बढ़ने की बात सामने आई. Jefferies ने घरेलू प्रॉप ट्रेडर्स से बातचीत के आधार पर कहा है कि डेरिवेटिव्स के सेटलमेंट प्राइस को दोबारा VWAP आधारित करने और +/-1 फीसदी की सीमा से बाहर रखे गए लिमिट ऑर्डर्स को कैंसल न कर पाने की स्थिति से एक्सपायरी डे पर आखिरी समय की वोलैटिलिटी कम हो सकती है. SEBI के कंसल्टेशन पेपर पर प्रतिक्रिया देने की अंतिम तारीख 3 अक्टूबर है. Jefferies के अनुसार, प्रस्तावित बदलावों को अक्टूबर या नवंबर में लागू किए जाने की संभावना हो सकती है.
अगस्त में ऑप्शंस कारोबार पर पड़ा था असर
CAS लागू होने के बाद अगस्त 2026 में ऑप्शंस प्रीमियम टर्नओवर और ऑर्डर्स पर असर देखने को मिला. हालांकि, सितंबर में अब तक दोनों में सुधार हुआ है. Jefferies के मुताबिक, ऑप्शन ट्रेडर्स को CAS की प्रक्रिया को समझने का ज्यादा समय मिलने के साथ गतिविधि में रिकवरी देखने को मिली है. यानी शुरुआती झटके के बाद बाजार के प्रतिभागी नए सिस्टम के साथ धीरे-धीरे तालमेल बैठा रहे हैं.
फिर भी BSE पर Jefferies क्यों है Bearish?
CAS से जुड़े प्रस्तावों को सकारात्मक मानने के बावजूद Jefferies BSE के शेयर पर अपनी नकारात्मक राय बदलने के मूड में नहीं है. ब्रोकरेज के मुताबिक, पिछले करीब दो वर्षों में पूरा ऑप्शंस इंडस्ट्री सेगमेंट बहुत ज्यादा नहीं बढ़ा है. ऐसे में BSE के लिए मार्केट शेयर बढ़ाने की गुंजाइश भी अब सीमित होती दिखाई दे रही है. Jefferies का मानना है कि एक्सपायरी डे पर Sensex और Nifty का Average Daily Traded Value यानी ADTO अब लगभग समान स्तर पर पहुंच गया है. इससे BSE के मार्केट शेयर में आगे बड़ी बढ़ोतरी की संभावना सीमित हो सकती है.
Bank Guarantee नियम भी बन सकता है चुनौती
BSE के लिए एक और चिंता RBI की ओर से बैंक गारंटी से जुड़े नियमों में सख्ती है. Jefferies का अनुमान है कि इन सख्त नियमों का असर प्रीमियम टर्नओवर पर पड़ सकता है. ब्रोकरेज के मुताबिक, अगले एक साल में प्रीमियम टर्नओवर पर करीब 10 फीसदी तक नकारात्मक असर पड़ने की संभावना है. इसके अलावा BSE में जून 2027 तक संभावित मैनेजमेंट ट्रांजिशन भी Jefferies की चिंता की वजहों में शामिल है. यही वजह है कि CAS में बदलावों से एक्सचेंज के लिए ऑपरेशनल माहौल बेहतर होने की उम्मीद के बावजूद Jefferies को BSE के शेयर में पर्याप्त अपसाइड नजर नहीं आ रहा है.
Groww पर Jefferies को क्यों ज्यादा भरोसा?
Jefferies भारत की इक्विटी ग्रोथ स्टोरी में निवेश के लिए Groww को BSE से बेहतर विकल्प मान रहा है. ब्रोकरेज के मुताबिक, CAS से जुड़ी अनिश्चितता कम होने का फायदा Groww को भी मिल सकता है. कंपनी के रेवेन्यू में F&O यानी Futures and Options कारोबार की हिस्सेदारी करीब 55 फीसदी है. Jefferies का अनुमान है कि FY26 से FY29 के बीच Groww करीब 30 फीसदी का PAT CAGR हासिल कर सकती है. इसके पीछे ब्रोकिंग कारोबार में करीब 18 फीसदी की ग्रोथ, पुराने ग्राहकों से मिलने वाला कारोबार, मार्केट शेयर में संभावित बढ़ोतरी और नए बिजनेस इनिशिएटिव्स को अहम कारण माना गया है. कंपनी मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी और वेल्थ मैनेजमेंट जैसे नए क्षेत्रों में भी आगे बढ़ रही है. Jefferies को उम्मीद है कि इन पहलों के साथ करीब 10 प्रतिशत अंक का मार्जिन विस्तार भी देखने को मिल सकता है. इसके अलावा FY27 के बाद Groww की ओर से US stocks की सुविधा शुरू करने की योजना है. Jefferies का अनुमान है कि इससे FY28 की कमाई में करीब 5 से 9 फीसदी तक अतिरिक्त योगदान मिल सकता है.
Groww पर 240 रूपये का टारगेट
Jefferies ने Groww की पैरेंट कंपनी Billionbrains Garage Ventures पर 'Buy' रेटिंग दी है. ब्रोकरेज ने शेयर का टारगेट प्राइस 240 रूपये रखा है. पिछले बंद भाव 200.24 रूपये के मुकाबले यह करीब 20 फीसदी की संभावित तेजी का संकेत देता है. इस तरह Jefferies की रणनीति साफ दिखाई देती है. एक तरफ CAS में बदलावों को एक्सचेंज और ब्रोकर्स के लिए सकारात्मक माना जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ BSE की कमाई और मार्केट शेयर ग्रोथ को लेकर ब्रोकरेज सतर्क है. इसके मुकाबले Groww में F&O गतिविधि की रिकवरी, ब्रोकिंग कारोबार की संभावित ग्रोथ, नए बिजनेस और US stocks जैसे नए अवसरों को भविष्य की कमाई के लिए अहम ग्रोथ ड्राइवर माना जा रहा है.
आखिर CAS है क्या और यह कैसे काम करता है?
Stock exchanges ने 3 अगस्त से CAS सिस्टम लागू किया था. इसका उद्देश्य F&O से जुड़े शेयरों के क्लोजिंग प्राइस तय करने के तरीके में बदलाव करना है. इस व्यवस्था के तहत F&O सेगमेंट में शामिल शेयरों की सामान्य ट्रेडिंग दोपहर 3:15 बजे खत्म हो जाती है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि शेयर में कारोबार पूरी तरह बंद हो जाता है. 3:15 बजे के बाद ये शेयर 20 मिनट के Closing Auction Session में चले जाते हैं. यह ऑक्शन विंडो 3:35 बजे तक चलती है. इसी दौरान खरीद और बिक्री के ऑर्डर्स को एकत्र करके एक equilibrium price तय किया जाता है, जो शेयर का आधिकारिक closing price निर्धारित करने में इस्तेमाल होता है.
दूसरी तरफ, जो शेयर F&O सेगमेंट का हिस्सा नहीं हैं, उनमें सामान्य कारोबार 3:30 बजे तक जारी रहता है. CAS का मकसद क्लोजिंग प्राइस की बेहतर price discovery करना और आखिरी समय में होने वाली ट्रेडिंग के असर को कम करना है. हालांकि, सिस्टम लागू होने के बाद एक्सपायरी डे पर बढ़ी वोलैटिलिटी ने इसके डिजाइन और सेटलमेंट प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए. अब SEBI के नए प्रस्तावों के जरिए इन्हीं चिंताओं को दूर करने की कोशिश की जा रही है. अगर प्रस्तावित बदलाव लागू होते हैं, तो एक्सपायरी डे पर कारोबार की अनिश्चितता कम हो सकती है. लेकिन Jefferies की राय में सिर्फ CAS में सुधार BSE के शेयर में तेजी के लिए पर्याप्त नहीं है. ब्रोकरेज की नजर अब ऑप्शंस इंडस्ट्री की ग्रोथ, BSE के मार्केट शेयर, बैंक गारंटी नियमों के प्रभाव और आने वाले मैनेजमेंट ट्रांजिशन पर है.
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