क्लोजिंग ऑक्शन सेशन यानी CAS को लेकर सेबी के नए कदम के बाद BSE, ग्रो , एंजेल वन, नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट, और मोतीलाल ओसवाल के शेयरों में तेजी देखने को मिली. SEBI अब डेरिवेटिव्स की एक्सपायरी पर सेटलमेंट प्राइस तय करने के तरीके की समीक्षा करेगा. शेयर बाजार में डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग से जुड़े नियमों को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. मार्केट रेगुलेटर SEBI अब डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी पर सेटलमेंट प्राइस तय करने के तरीके की समीक्षा करेगा. ये फैसला इक्विटी कैश मार्केट में क्लोजिंग ऑक्शन सेशन लागू होने के बाद बाजार से मिले फीडबैक के आधार पर लिया गया है. SEBI के इस ऐलान के बाद बाजार में कुछ ब्रोकिंग और एक्सचेंज कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिली. BSE का शेयर करीब 5% चढ़कर 3,466 रुपये के दिन के उच्च स्तर तक पहुंचा. एंजेल वन में करीब 8% की तेजी आई. वहीं मोतीलाल ओसवाल में 2% से ज्यादा और ग्रो में 3% से ज्यादा की बढ़त देखने को मिली.
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क्या है CAS?
क्लोजिंग ऑक्शन सेशन एक ऑक्शन सिस्टम है, जिसके जरिए शेयरों की क्लोजिंग प्राइस तय की जाती है. ये व्यवस्था खास तौर पर उन शेयरों के लिए महत्वपूर्ण है जिनमें डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट उपलब्ध हैं. SEBI ने 3 अगस्त 2026 से इक्विटी कैश मार्केट में CAS लागू किया था. इसके तहत CAS में तय होने वाली क्लोजिंग प्राइस का इस्तेमाल डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी पर सेटलमेंट प्राइस तय करने के लिए भी किया जा रहा है. लेकिन CAS लागू होने के बाद एक्सपायरी वाले दिन शेयरों और ऑप्शंस की कीमतों में अचानक उतार-चढ़ाव को लेकर बाजार के कुछ हिस्सों से चिंता जताई गई.
एक्सपायरी डे पर क्यों बढ़ी चिंता?
डेरिवेटिव्स की एक्सपायरी के दिन अंतिम कुछ मिनटों में कीमतों में तेज बदलाव ट्रेडर्स के लिए बड़ा जोखिम पैदा कर सकता है. खासकर जब कोई ऑप्शन एक्सपायरी के बिल्कुल करीब हो, तब CAS के दौरान शेयर की क्लोजिंग प्राइस में अचानक बदलाव होने पर ऑप्शन की कीमत में भी बड़ा उतार-चढ़ाव आ सकता है. इसी वजह से कई ट्रेडर्स और मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने सेटलमेंट प्राइस तय करने की मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं. SEBI ने भी कहा है कि CAS लागू होने के शुरुआती अनुभव और बाजार से मिले फीडबैक में एक बड़ा मुद्दा CAS से तय क्लोजिंग प्राइस के आधार पर डेरिवेटिव्स की एक्सपायरी सेटलमेंट प्राइस तय करना रहा है.
डेरिवेटिव्स कारोबार पर क्या असर पड़ा?
CAS लागू होने के बाद डेरिवेटिव्स मार्केट में ट्रेडिंग वॉल्यूम पर भी असर देखने को मिला.अगस्त 2026 में NSE का कुल इक्विटी डेरिवेटिव्स टर्नओवर करीब 34.48 लाख करोड़ रुपये रहा. यह नवंबर 2023 के बाद सबसे निचले स्तर पर था.वहीं BSE का अगस्त का इक्विटी डेरिवेटिव्स टर्नओवर करीब 32.2 लाख करोड़ रुपये रहा, जो जून 2025 के बाद सबसे कम था.बाजार के जानकारों के मुताबिक CAS के कारण एक्सपायरी के दिन बढ़ी अनिश्चितता की वजह से कुछ ट्रेडर्स ने खासकर कारोबार के आखिरी आधे घंटे में डेरिवेटिव्स गतिविधियां कम की हैं.
ऑप्शन राइटर्स क्यों सतर्क हुए?
ब्रोकरेज फर्म Jefferies के मुताबिक CAS की सबसे बड़ी चुनौती एक्सपायरी वाले दिन की अनिश्चितता है. अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव के कारण ऑप्शन राइटर्स यानी ऑप्शन बेचने वाले ट्रेडर्स बाजार से दूरी बना सकते हैं. इससे प्रोपराइटरी ट्रेडर्स के लिए मुनाफा कमाना भी मुश्किल हो सकता है. Jefferies ने CAS से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए कुछ संभावित उपायों का भी सुझाव दिया है. इनमें ऑप्शंस एक्सपायरी को CAS विंडो से अलग करना, स्टॉक लेंडिंग और बॉरोइंग सिस्टम को बेहतर करना और ऑक्शन पूल को मजबूत करना शामिल हैं.
अब SEBI क्या करेगा?
SEBI ने कहा है कि CAS लागू होने के शुरुआती दौर के अनुभव और अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स से मिले सुझावों को देखते हुए डेरिवेटिव्स के सेटलमेंट प्राइस तय करने की पद्धति में कुछ बदलाव प्रस्तावित किए जा सकते हैं. इसके लिए SEBI करीब एक हफ्ते में कंसल्टेशन पेपर जारी कर सकता है. इस पेपर में यह साफ हो सकता है कि रेगुलेटर सेटलमेंट प्राइस की मौजूदा व्यवस्था में क्या बदलाव करना चाहता है. हालांकि, अभी किसी बदलाव को अंतिम रूप नहीं दिया गया है.
क्या CAS सिस्टम ही बदल जाएगा?
SEBI की मौजूदा समीक्षा का फोकस CAS सिस्टम को हटाना या पूरी तरह बदलना नहीं है. मुख्य मुद्दा ये है कि डेरिवेटिव्स की एक्सपायरी पर सेटलमेंट प्राइस किस तरीके से तय की जाए. यानी CAS के जरिए शेयर की क्लोजिंग प्राइस तय करने की व्यवस्था अपनी जगह रह सकती है, लेकिन उस क्लोजिंग प्राइस को डेरिवेटिव्स के सेटलमेंट में इस्तेमाल करने के तरीके में बदलाव हो सकता है.
BSE, एंजेल वन और ग्रो के लिए क्यों अहम?
SEBI का यह कदम एक्सचेंज और ब्रोकिंग कंपनियों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि डेरिवेटिव्स कारोबार उनके ट्रेडिंग वॉल्यूम और कमाई का अहम हिस्सा है. अगर एक्सपायरी डे पर अनिश्चितता कम होती है और ट्रेडिंग एक्टिविटी बढ़ती है तो इसका फायदा एक्सचेंज और ब्रोकिंग कंपनियों को मिल सकता है. इसी उम्मीद में SEBI के ऐलान के बाद BSE, Angel One, Groww और Motilal Oswal जैसे शेयरों में तेजी देखने को मिली. हालांकि, इन शेयरों में आगे की चाल SEBI के कंसल्टेशन पेपर और उसके बाद आने वाले अंतिम फैसले पर भी निर्भर करेगी.
निवेशकों के लिए सबसे जरूरी बात
SEBI ने अभी कोई नया नियम लागू नहीं किया है. सिर्फ डेरिवेटिव्स की एक्सपायरी पर सेटलमेंट प्राइस तय करने की प्रक्रिया की समीक्षा की जा रही है. अगर नई व्यवस्था में CAS की छोटी अवधि की कीमतों के असर को कम किया जाता है, तो एक्सपायरी के आखिरी मिनटों में ऑप्शंस की कीमतों में अचानक आने वाले बड़े उतार-चढ़ाव का जोखिम कम हो सकता है.
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