SEBI Action : JPMorgan से जुड़ी फर्म पर SEBI की कार्रवाई, Closing Auction में कथित गड़बड़ी का आरोप

तनीषा त्यागी

• 09:54 AM • 20 Aug 2026

सेबी ने क्लोजिंग ऑक्शन में कथित गड़बड़ी पर दो फर्मों पर रोक लगाई और 3.68 करोड़ रुपये जब्त किए. पढ़ें 13 अगस्त के सौदों और जेपीमॉर्गन लिंक पर क्या सामने आया.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

सेबी ने दो फर्मों पर रोक लगाकर 3.68 करोड़ रुपये जब्त किए

जांच में सेंसक्स शेयरों के क्लोजिंग भाव प्रभावित होने की बात

13 अगस्त को डेरिवेटिव्स एक्सपायरी दिन खरीद और बिक्री ऑर्डर दिखे

SEBI Action : भारतीय शेयर बाजार में दिन के अंतिम भाव तय करने वाली नई Closing Auction Session यानी CAS व्यवस्था को लेकर SEBI ने बड़ी कार्रवाई की है. बाजार नियामक ने कथित तौर पर Closing Auction में कीमतों को प्रभावित करने के मामले में दो संस्थाओं को बाजार से प्रतिबंधित कर दिया है. इनमें Copthall Mauritius Investment और Mansi Share and Stock Broking शामिल हैं.

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SEBI ने एक अंतरिम आदेश में दोनों संस्थाओं से कुल करीब 3.68 करोड़ रुपये की रकम जब्त करने का निर्देश दिया है. नियामक की शुरुआती जांच के मुताबिक, दोनों फर्मों की ट्रेडिंग गतिविधियों ने Sensex के कुछ प्रमुख शेयरों के Closing Prices को प्रभावित किया, जिससे नई व्यवस्था के तहत Price Discovery की प्रक्रिया पर असर पड़ा.

13 अगस्त को क्या हुआ था?

SEBI के मुताबिक कथित गड़बड़ी 13 अगस्त को हुई थी. यह वही दिन था जब BSE Sensex से जुड़े Weekly Derivatives Contracts की Expiry थी. नियामक के अनुसार, Closing Auction Session के दौरान Copthall Mauritius Investment की तरफ से Sensex में शामिल कुछ शेयरों में आक्रामक तरीके से खरीदारी के ऑर्डर लगाए गए. दूसरी तरफ Mansi Share and Stock Broking ने बड़ी मात्रा में Sell Orders लगाए. SEBI का कहना है कि इस तरह के बड़े Buy और Sell Orders ने Closing Price को प्रभावित किया. खास बात यह रही कि Mansi Share ने बाद में अपने Sell-side Activity का एक बड़ा हिस्सा Cancel कर दिया. नियामक की शुरुआती गणना के मुताबिक, इस गतिविधि से Copthall को करीब 2.96 करोड़ रुपये और Mansi Share को करीब 72 लाख रुपये का कथित गलत फायदा हुआ.

JPMorgan से क्या कनेक्शन है?

इस मामले में Copthall Mauritius Investment का नाम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सार्वजनिक रिकॉर्ड के मुताबिक यह Mauritius में स्थित इकाई JPMorgan Chase के स्वामित्व में है. JPMorgan के प्रवक्ता ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया है. वहीं Mansi Share and Stock Broking की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी. SEBI के अंतरिम आदेश में फिलहाल दोनों संस्थाओं के बीच किसी तरह की मिलीभगत का सबूत नहीं मिलने की बात कही गई है. यानी नियामक की मौजूदा जांच में यह सामने नहीं आया है कि दोनों कंपनियों ने आपस में मिलकर कथित तौर पर यह गतिविधि की थी.

SEBI ने कितनी रकम जब्त की?

SEBI ने दोनों फर्मों से कुल 3.68 करोड़ रुपये की रकम Impound करने का आदेश दिया है. शुरुआती आकलन के अनुसार, Copthall Mauritius Investment से जुड़े कथित गलत लाभ की रकम करीब 2.96 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि Mansi Share and Stock Broking के मामले में यह रकम करीब 72 लाख रुपये है. यह कार्रवाई अभी अंतिम निष्कर्ष नहीं है. SEBI ने इसे Interim Order के तौर पर जारी किया है और मामले में आगे की जांच जारी रहेगी.

नई Closing Auction व्यवस्था क्या है?

भारत में Closing Auction Session को 3 अगस्त से लागू किया गया था. इसका मकसद बाजार बंद होने के समय शेयरों के अंतिम आधिकारिक भाव को ज्यादा बेहतर तरीके से तय करना और Price Discovery को मजबूत बनाना है. CAS की अवधि 20 मिनट की है. यह दोपहर 3:15 बजे शुरू होती है, यानी सामान्य शेयर बाजार में कारोबार खत्म होने के बाद यह Auction Window शुरू होती है. इस प्रक्रिया में Buy और Sell Orders के आधार पर शेयरों के Closing Prices तय किए जाते हैं. इसका उद्देश्य बाजार के अंतिम भाव को अधिक पारदर्शी तरीके से निर्धारित करना है.

नई व्यवस्था के शुरुआती दिनों में क्यों बढ़ी हलचल?

CAS लागू होने के बाद शुरुआती दो हफ्तों में भारतीय बाजार में कुछ तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिले. इसका असर Nifty 50 और BSE Sensex जैसे प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स के साथ-साथ इनसे जुड़े Options Contracts में भी नजर आया. ऐसे में Closing Auction के दौरान बड़े पैमाने पर Orders लगाए जाने की गतिविधियां नियामक की निगरानी में आ गईं. SEBI ने अपने आदेश में इस बात पर जोर दिया है कि CAS का इस्तेमाल Price Discovery को प्रभावित करने या बाजार में अनुचित स्थिति पैदा करने के लिए नहीं किया जा सकता.

SEBI ने क्यों दिखाई सख्ती?

SEBI के मुताबिक Closing Auction Session का मकसद निष्पक्ष तरीके से Securities के Closing Prices की खोज करना है. अगर कोई ट्रेडिंग गतिविधि जानबूझकर इस प्रक्रिया को प्रभावित करती है, तो इससे पूरे बाजार की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है. नियामक ने कहा है कि CAS में Price Discovery को बिगाड़ने वाली किसी भी तरह की Manipulation या Unfair Practice के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है. SEBI का मानना है कि ऐसी गतिविधियां CAS की विश्वसनीयता को कमजोर कर सकती हैं और Securities Market के व्यवस्थित संचालन को प्रभावित कर सकती हैं.

SEBI के लिए CAS की निगरानी क्यों अहम?

Closing Auction एक नई व्यवस्था है और इसे वैश्विक बाजारों में अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं के अनुरूप लाने के उद्देश्य से पेश किया गया है. ऐसे में शुरुआती दौर में इसकी निगरानी और किसी भी संभावित गड़बड़ी पर तुरंत कार्रवाई काफी अहम हो जाती है. SEBI ने यह भी कहा है कि CAS की प्रक्रिया पारदर्शी है, इसलिए इसमें होने वाली असामान्य ट्रेडिंग गतिविधियों की पहचान करना संभव है. इस मामले में भी कथित गतिविधि के कुछ ही दिनों के भीतर नियामक ने अंतरिम आदेश जारी कर दिया.

आगे क्या होगा?

फिलहाल SEBI की कार्रवाई अंतरिम स्तर पर है और मामले की विस्तृत जांच आगे जारी रहेगी. नियामक को यह तय करना होगा कि संबंधित ट्रेडिंग गतिविधियों के पीछे वास्तविक मंशा क्या थी और क्या इससे बाजार के Closing Prices को जानबूझकर प्रभावित किया गया. साथ ही, यह मामला नई Closing Auction व्यवस्था के लिए भी एक महत्वपूर्ण टेस्ट माना जा सकता है. CAS का उद्देश्य बाजार में बेहतर Price Discovery और पारदर्शिता लाना है. ऐसे में नियामक के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि इस व्यवस्था का इस्तेमाल किसी भी तरह से कीमतों को प्रभावित करने के लिए न किया जाए. फिलहाल इस मामले में सबसे अहम बात यह है कि SEBI ने कथित Closing Auction Manipulation को गंभीरता से लिया है और आगे की जांच पूरी होने तक दोनों फर्मों के खिलाफ कार्रवाई की है.