Expiry Day पर बड़ा बदलाव संभव! SEBI करेगा डेरिवेटिव सेटलमेंट प्राइस का रिव्यू

संदीप शर्मा

• 11:36 AM • 04 Sep 2026

सेबी ने क्लोजिंग ऑक्शन के बाद मिले फीडबैक पर डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट के सेटलमेंट प्राइस तय करने के तरीके की समीक्षा का संकेत दिया है. चर्चा पत्र जल्द आ सकता है.

NewsTak
Google CTA

न्यूज़ हाइलाइट्स

SEBI डेरिवेटिव्स की एक्सपायरी सेटलमेंट व्यवस्था की समीक्षा करेगा

CAS लागू होने के बाद सेटलमेंट प्राइस को लेकर बाजार से फीडबैक मिला

3 अगस्त 2026 से इक्विटी कैश मार्केट में लागू हुआ CAS

SEBI CAS सिस्टम का रिव्यू नहीं करेगा

सिर्फ सेटलमेंट प्राइस तय करने के तरीके का रिव्यू होगा

SEBI Settlement Price: मार्केट रेगुलेटर डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी पर सेटलमेंट प्राइस तय करने के तरीके की समीक्षा करने जा रहा है. क्लोजिंग ऑक्शन सेशन यानी CAS लागू होने के बाद मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने सेटलमेंट प्राइस को लेकर चिंता जताई है. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी SEBI डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी के दिन सेटलमेंट प्राइस तय करने की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करने जा रहा है. ये कदम इक्विटी कैश मार्केट में क्लोज़िंग ऑक्शन सेशन यानी CAS लागू होने के बाद मिले फीडबैक के आधार पर उठाया जा रहा है. SEBI ने कहा है कि CAS लागू होने के शुरुआती एक महीने के अनुभव और अलग-अलग मार्केट पार्टिसिपेंट्स से मिले सुझावों के बाद डेरिवेटिव्स के एक्सपायरी सेटलमेंट की पद्धति में कुछ बदलाव प्रस्तावित किए जा सकते हैं.

Read more!

क्या है पूरा मामला?

SEBI ने 3 अगस्त 2026 से इक्विटी कैश मार्केट में क्लोज़िंग ऑक्शन सेशन यानी CAS लागू किया था. इसका मकसद शेयरों की क्लोजिंग कीमत तय करने की प्रक्रिया को एक ऑक्शन सिस्टम के जरिए निर्धारित करना है. CAS के तहत तय होने वाली क्लोजिंग प्राइस को ही डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी पर सेटलमेंट प्राइस तय करने के आधार के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है. यहीं से बाजार के कुछ हिस्सों में चिंता सामने आई है. मार्केट पार्टिसिपेंट्स का फीडबैक मिलने के बाद SEBI अब यह देख रहा है कि क्या CAS से तय क्लोजिंग प्राइस को डेरिवेटिव्स की एक्सपायरी सेटलमेंट प्राइस के तौर पर इस्तेमाल करने का मौजूदा तरीका सही है या इसमें बदलाव की जरूरत है.

SEBI क्या बदल सकता है?

SEBI ने संकेत दिया है कि वह CAS सिस्टम को बदलने के बजाय सिर्फ डेरिवेटिव्स के सेटलमेंट प्राइस तय करने की पद्धति की समीक्षा करेगा.यानी फिलहाल CAS को खत्म करने या उसके पूरे सिस्टम में बदलाव की बात नहीं है. समीक्षा का मुख्य फोकस यह है कि एक्सपायरी के दिन डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की अंतिम कीमत किस तरीके से तय की जाए. SEBI इस संबंध में एक कंसल्टेशन पेपर करीब एक हफ्ते में जारी कर सकता है. इसमें प्रस्तावित बदलावों और नई व्यवस्था का पूरा विवरण दिया जाएगा.

CAS को लेकर SEBI ने क्या कहा?

SEBI के मुताबिक CAS को लागू करने से पहले बाजार से बड़े स्तर पर चर्चा की गई थी. इसके लिए दो बार पब्लिक कंसल्टेशन पेपर जारी किए गए थे. इसके अलावा SEBI ने अपने एडवाइजरी कमेटी, स्टॉक एक्सचेंज, ब्रोकर एसोसिएशन, संस्थागत निवेशकों, ट्रेडर्स और दूसरे बाजार से जुड़े लोगों के साथ भी चर्चा की थी. CAS लागू होने के बाद भी SEBI ने स्टॉक एक्सचेंज, ब्रोकर, प्रोपराइटरी ट्रेडर्स, सॉफ्टवेयर कंपनियों, म्यूचुअल फंड, इंडस्ट्री एसोसिएशन और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों से फीडबैक लिया. रेगुलेटर ने कहा कि उसने CAS लागू होने के पहले महीने में इसके कामकाज और बाजार पर इसके असर की लगातार निगरानी की है.

निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब?

इस समीक्षा का सीधा असर डेरिवेटिव्स में ट्रेड करने वाले निवेशकों और ट्रेडर्स पर पड़ सकता है. खास तौर पर एक्सपायरी के दिन इंडेक्स और स्टॉक डेरिवेटिव्स के सेटलमेंट प्राइस का महत्व काफी ज्यादा होता है. अगर सेटलमेंट प्राइस तय करने का तरीका बदलता है तो एक्सपायरी के दिन ट्रेडिंग और पोजीशन के अंतिम नतीजे पर इसका असर पड़ सकता है. हालांकि, अभी SEBI ने किसी बदलाव को अंतिम रूप नहीं दिया है. पहले कंसल्टेशन पेपर जारी होगा और उस पर बाजार के लोगों से सुझाव लिए जाएंगे. इसके बाद ही अंतिम फैसला होगा.