SEBI वापस ले सकता है क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम, जान लीजिए क्या है पूरा मामला

सौरभ दीक्षित

• 01:24 PM • 06 Oct 2026

सेबी डेरिवेटिव्स के निपटान मूल्य को तय करने के लिए अगस्त में लागू किए गए क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम को वापस लेने पर विचार कर रहा है. एक्सपायरी के दिनों में तेज उतार-चढ़ाव के बाद इस व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है. सेबी को इस बदलाव को लेकर करीब 20 हजार सुझाव मिले हैं. माना जा रहा है कि क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम की जगह कारोबार की मात्रा के आधार पर औसत कीमत तय करने वाली पुरानी व्यवस्था वापस आ सकती है. खबर के बाद बीएसई, एनएसई, नुवामा वेल्थ और मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज समेत कई शेयरों में तेजी देखने को मिली.

NewsTak
Google CTA
▌

न्यूज़ हाइलाइट्स

नए क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम पर बड़ी खबर आई है

सेबी इस व्यवस्था को वापस लेने पर विचार कर रहा है

सेबी ने अगस्त की शुरुआत में क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम लागू किया था

शेयर बाजार में डेरिवेटिव्स के निपटान मूल्य को तय करने के लिए अगस्त में लागू किए गए नए क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी इस व्यवस्था को वापस लेने पर विचार कर रहा है. खबर सामने आने के बाद पूंजी बाजार से जुड़ी कई कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिली. इनमें बीएसई, एनएसई, नुवामा वेल्थ और मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज जैसे शेयर शामिल हैं.

Read more!

अगस्त में लागू हुआ था नया सिस्टम

शेयर बाजार में किसी शेयर की दिन के अंत की कीमत काफी महत्वपूर्ण होती है. खासकर तब, जब उसी शेयर से जुड़े वायदा और विकल्प सौदों का निपटान होना हो. इसी निपटान मूल्य को तय करने के लिए सेबी ने अगस्त की शुरुआत में क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम लागू किया था. इस व्यवस्था में सामान्य कारोबार खत्म होने के बाद थोड़े समय के लिए अलग से नीलामी सत्र होता है. इस दौरान खरीद और बिक्री के आदेशों के आधार पर शेयर की अंतिम कीमत तय की जाती है.

ऐसी व्यवस्था दुनिया के कई बड़े शेयर बाजारों में पहले से इस्तेमाल की जाती है. अमेरिका और हांगकांग जैसे बाजारों में भी कारोबार खत्म होने के समय नीलामी के जरिए अंतिम कीमत तय करने की व्यवस्था मौजूद है.

क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम लागू होने के बाद कुछ एक्सपायरी वाले दिनों में डेरिवेटिव्स की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला. यही वजह है कि अब सेबी इस व्यवस्था पर दोबारा विचार कर रहा है.

डेरिवेटिव्स बाजार में कीमतों में छोटा बदलाव भी काफी बड़ा असर डाल सकता है. इसकी वजह यह है कि वायदा और विकल्प कारोबार में निवेशक कम पूंजी के साथ बड़ी रकम के सौदों में शामिल होते हैं. ऐसे में कीमतों में तेजी या गिरावट का असर मुनाफे और नुकसान पर तेजी से पड़ सकता है.

इसलिए निपटान मूल्य तय करने की व्यवस्था में किसी भी तरह की परेशानी सीधे कारोबारियों पर असर डाल सकती है.

सेबी को मिले करीब 20 हजार सुझाव

क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम को लेकर सेबी ने पिछले महीने एक परामर्श पत्र जारी किया था. इसके जरिए बाजार से जुड़े लोगों और अन्य पक्षों से इस व्यवस्था को लेकर सुझाव मांगे गए थे. सेबी को इस मामले में करीब 20 हजार सुझाव मिले हैं. इतनी बड़ी संख्या में सुझाव मिलने के बाद अब माना जा रहा है कि सेबी मौजूदा व्यवस्था में बदलाव कर सकता है या इसे कुछ समय के लिए वापस ले सकता है.

अगर क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम को वापस लिया जाता है, तो इसकी जगह पुराने तरीके को फिर से लागू किया जा सकता है. इस व्यवस्था को कारोबार की मात्रा के आधार पर औसत कीमत तय करने की पद्धति कहा जाता है. इसमें किसी शेयर की कीमत तय करते समय सिर्फ आखिरी सौदे को नहीं देखा जाता, बल्कि उस कीमत पर कितने शेयरों में कारोबार हुआ, इसका भी ध्यान रखा जाता है.

क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम लागू होने से पहले डेरिवेटिव्स के निपटान मूल्य को तय करने के लिए इसी पद्धति का इस्तेमाल किया जाता था. इसके तहत कारोबार के आखिरी 30 मिनट की खरीद-बिक्री को आधार बनाया जाता था. सूत्रों के मुताबिक, सेबी अब क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम की जगह इसी पुरानी व्यवस्था को वापस लाने पर विचार कर सकता है.

माना जा रहा है कि अगर सेबी क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम को हटाने का फैसला करता है, तो इसकी जगह पुरानी व्यवस्था कम से कम एक साल के लिए लागू की जा सकती है. सेबी इस मामले में इसी महीने के आखिर तक फैसला ले सकता है. हालांकि, अभी तक अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है. इसलिए इसे फिलहाल संभावित बदलाव के तौर पर ही देखा जाना चाहिए.

बीएसई और एनएसई समेत इन शेयरों में तेजी

क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम को वापस लेने की खबर सामने आने के बाद 6 अक्टूबर को पूंजी बाजार से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिली. कारोबार के दौरान बीएसई के शेयर में दो प्रतिशत से ज्यादा की तेजी देखी गई. वहीं एनएसई के शेयर में करीब डेढ़ प्रतिशत की बढ़त रही. नुवामा वेल्थ के शेयर में भी तेजी देखने को मिली. हालांकि, सबसे ज्यादा बढ़त मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के शेयर में रही. इसके शेयर में करीब साढ़े तीन प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई. बाजार में इस खबर को फिलहाल सकारात्मक माना जा रहा है. यही वजह है कि पूंजी बाजार से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली.

हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि सेबी ने अभी क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम को वापस लेने का अंतिम फैसला नहीं किया है. फिलहाल इस व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है और बाजार से मिले सुझावों को ध्यान में रखते हुए आगे का फैसला लिया जाएगा. अगर सेबी इस व्यवस्था को वापस लेकर पुरानी पद्धति को लागू करता है, तो इसका असर एक्सपायरी वाले दिनों में कारोबार के तरीके और डेरिवेटिव्स के निपटान मूल्य पर पड़ सकता है.

साथ ही बीएसई, एनएसई, नुवामा वेल्थ और मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज जैसी पूंजी बाजार से जुड़ी कंपनियों के कारोबार पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है. अब बाजार की नजर इस बात पर है कि सेबी इस पूरे मामले में क्या फैसला करता है. क्योंकि यह फैसला सिर्फ एक तकनीकी व्यवस्था में बदलाव तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर डेरिवेटिव्स कारोबार, एक्सपायरी के दिन होने वाले उतार-चढ़ाव और पूंजी बाजार से जुड़ी कंपनियों पर भी पड़ सकता है.