SEBI New Rules : शेयर बाजार के आखिरी 10 मिनट में होगा बड़ा बदलाव, F&O ट्रेडर्स जान लें नई टाइमिंग

सौरभ दीक्षित

• 12:23 PM • 16 Oct 2026

SEBI ने शेयर बाजार के Closing Auction Session, ऑर्डर एंट्री और F&O एक्सपायरी पर सेटलमेंट प्राइस निकालने के नियमों में बदलाव किया है. जानिए नई टाइमिंग, ऑर्डर ट्रांसफर के नियम और ये बदलाव कब से लागू होंगे.

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शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने वालों के लिए अहम खबर है. SEBI ने Closing Auction Session (CAS) के समय, ऑर्डर के नियमों और F&O एक्सपायरी पर सेटलमेंट प्राइस निकालने के तरीके में बदलाव किया है. नए नियम 7 दिसंबर 2026 से लागू होंगे, जबकि कुछ ऑर्डर ट्रांसफर से जुड़े बदलाव 8 फरवरी 2027 से लागू होंगे.

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अगर आप शेयर बाजार में इंट्राडे ट्रेडिंग करते हैं या फ्यूचर और ऑप्शन (F&O) में पैसा लगाते हैं, तो बाजार बंद होने से पहले के आखिरी मिनट आपके लिए अहम होने वाले हैं. मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने Closing Auction Session यानी CAS के नियमों में बदलाव किया है. इसका असर शेयरों की क्लोजिंग प्राइस तय करने, ऑर्डर डालने और डेरिवेटिव्स की एक्सपायरी पर सेटलमेंट प्राइस निकालने की प्रक्रिया पर पड़ेगा.

Closing Auction Session क्या है?

Closing Auction Session शेयर बाजार के आखिरी चरण की वह प्रक्रिया है, जिसके जरिए शेयरों की क्लोजिंग प्राइस तय करने में मदद मिलती है. इसका मकसद कीमतों का पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से पता लगाना है. SEBI के नए नियमों के मुताबिक, यह सेशन हर कारोबारी दिन दोपहर 3:30 बजे से 3:40 बजे तक चलेगा. यानी इसके लिए कुल 10 मिनट निर्धारित किए गए हैं. इस दौरान अलग-अलग समय पर अलग-अलग तरह के ऑर्डर डालने की अनुमति होगी.

10 मिनट में कैसे होगी ऑर्डर एंट्री?

नए नियमों के तहत Closing Auction Session को अलग-अलग चरणों में बांटा गया है.

- 3:30 से 3:31 बजे तक: रेफरेंस प्राइस की गणना होगी और पहले से मौजूद ऑर्डर को नए सेशन में ट्रांसफर किया जाएगा.
- 3:31 से 3:36 बजे तक: ट्रेडर्स लिमिट ऑर्डर और मार्केट ऑर्डर, दोनों डाल सकेंगे.
- 3:36 बजे के बाद: आखिरी चरण में सिर्फ लिमिट ऑर्डर डालने की अनुमति होगी. इस दौरान मार्केट ऑर्डर को बदला या कैंसल नहीं किया जा सकेगा.
- 3:38 से 3:40 बजे के बीच: ऑर्डर एंट्री विंडो किसी भी समय बंद हो सकती है.

मार्केट ऑर्डर में ट्रेडर उपलब्ध बाजार भाव पर शेयर खरीदने या बेचने का निर्देश देता है. वहीं लिमिट ऑर्डर में वह अपनी खरीद या बिक्री की कीमत तय करता है.

F&O ट्रेडिंग की टाइमिंग में क्या बदलाव होगा?

SEBI ने इंडेक्स डेरिवेटिव्स और स्टॉक डेरिवेटिव्स की ट्रेडिंग टाइमिंग को लेकर भी स्पष्ट नियम तय किए हैं. सामान्य कारोबारी दिनों में इंडेक्स डेरिवेटिव्स की ट्रेडिंग दोपहर 3:45 बजे तक जारी रहेगी. हालांकि, जिस दिन किसी इंडेक्स डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट की एक्सपायरी होगी, उस कॉन्ट्रैक्ट में ट्रेडिंग 3:30 बजे बंद हो जाएगी. वहीं स्टॉक डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग एक्सपायरी वाले दिन भी 3:45 बजे तक जारी रहेगी.

कैश मार्केट में पोस्ट-क्लोज सेशन दोपहर 3:50 बजे से शाम 4 बजे तक चलेगा. इस दौरान होने वाले सौदे संबंधित शेयर की क्लोजिंग प्राइस पर होंगे. इसलिए F&O ट्रेडर्स के लिए अपने कॉन्ट्रैक्ट की कैटेगरी और एक्सपायरी के दिन लागू टाइमिंग को समझना जरूरी होगा.

एक्सपायरी पर सेटलमेंट प्राइस कैसे निकलेगी?

SEBI ने डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट की एक्सपायरी पर सेटलमेंट प्राइस निकालने का तरीका भी बदला है. इंडेक्स डेरिवेटिव्स के मामले में एक्सपायरी वाले दिन संबंधित इंडेक्स की वैल्यू निकालने के लिए कैश मार्केट में शामिल शेयरों की आखिरी 30 मिनट की Volume Weighted Average Price (VWAP) का इस्तेमाल किया जाएगा. VWAP ऐसी औसत कीमत है, जिसकी गणना में शेयर के भाव के साथ कारोबार की मात्रा को भी ध्यान में रखा जाता है.

स्टॉक डेरिवेटिव्स की एक्सपायरी पर संबंधित शेयर की कैश मार्केट में आखिरी 30 मिनट की VWAP के आधार पर सेटलमेंट प्राइस तय की जाएगी. इसमें सभी स्टॉक एक्सचेंजों के आंकड़ों का इस्तेमाल होगा. एक्सचेंज संबंधित VWAP और कारोबार की मात्रा के आंकड़े क्लियरिंग कॉरपोरेशनों को उपलब्ध कराएंगे. इस अवधि में बाजार के प्रतिभागियों को अनुमानित सेटलमेंट वैल्यू की जानकारी भी लगातार दी जाएगी.

पुराने ऑर्डर के ट्रांसफर के नियम भी बदले

SEBI ने यह भी तय किया है कि सामान्य ट्रेडिंग सेशन में लगाए गए कौन-से ऑर्डर Closing Auction Session में आगे ले जाए जा सकेंगे. आम तौर पर लंबित लिमिट ऑर्डर नए सेशन में ट्रांसफर होंगे. हालांकि, स्टॉप-लॉस ऑर्डर और तय ऑक्शन प्राइस बैंड से बाहर की कीमत वाले ऑर्डर इसके दायरे में नहीं आएंगे. आइसबर्ग ऑर्डर के लिए अलग व्यवस्था होगी. ऐसे ऑर्डर में बड़े ऑर्डर का केवल एक हिस्सा बाजार में दिखाई देता है. तय कीमत की सीमा के भीतर मौजूद बिना निष्पादित आइसबर्ग ऑर्डर को पूरी तरह दिखाई देने वाले लिमिट ऑर्डर में बदला जा सकता है. इसके लिए तय शर्तें लागू होंगी और ट्रेडर ऑर्डर डालते समय इस ट्रांसफर से बाहर रहने का विकल्प भी चुन सकता है.

Time Priority और मार्जिन के नियम

ऑर्डर की प्राथमिकता यानी Time Priority भी नए नियमों का अहम हिस्सा है. सामान्य तौर पर, लगातार ट्रेडिंग सेशन से ट्रांसफर हुए लिमिट ऑर्डर को ऑक्शन के दौरान नए लगाए गए लिमिट ऑर्डर पर समय की प्राथमिकता मिलेगी.

हालांकि, ट्रांसफर हुए आइसबर्ग ऑर्डर की प्राथमिकता दूसरे ट्रांसफर हुए लिमिट ऑर्डर से कम होगी. अगर ऑक्शन के दौरान किसी ऑर्डर में बदलाव किया जाता है, तो उसकी समय प्राथमिकता भी बदल सकती है.

Closing Auction Session में लगाए गए ऑर्डर पर संबंधित मार्जिन नियम लागू होंगे. लगातार ट्रेडिंग सेशन से ट्रांसफर हुए कुछ लिमिट और आइसबर्ग ऑर्डर को छूट दी गई है. लेकिन अगर इन ऑर्डर में ऑक्शन के दौरान बदलाव किया जाता है, तो उन पर भी ऑर्डर के स्तर पर लागू मार्जिन की शर्तें लागू होंगी.

SEBI ने स्टॉक एक्सचेंजों और क्लियरिंग कॉरपोरेशनों को अपने सिस्टम और मानक संचालन प्रक्रियाओं में जरूरी बदलाव करने के निर्देश दिए हैं.

कब से लागू होंगे SEBI के नए नियम?

SEBI के नए Closing Auction Session और सेटलमेंट प्राइस से जुड़े बदलाव 7 दिसंबर 2026 से लागू होंगे. हालांकि, सामान्य ट्रेडिंग सेशन से बिना निष्पादित लिमिट और आइसबर्ग ऑर्डर को ट्रांसफर करने से जुड़े बदलाव 8 फरवरी 2027 से लागू होंगे. शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने वालों के लिए इन तारीखों, ऑर्डर के नियमों और एक्सपायरी की टाइमिंग पर ध्यान देना जरूरी है. खासकर F&O ट्रेडर्स को यह समझना होगा कि उनके कॉन्ट्रैक्ट पर कौन-से नियम लागू होंगे.