SME IPO Rules: SEBI बदलने जा रहा SME IPO के नियम, अब ₹1 लाख से हो सकेगी एंट्री, लेकिन क्या निवेशकों का पैसा फंस सकता है?

चिराग ठाकुर

• 01:12 PM • 15 Oct 2026

सेबी ने एसएमई आईपीओ में न्यूनतम आवेदन रकम घटाने और कई नियम बदलने का प्रस्ताव दिया है. जानें नए बदलावों से निवेशकों को क्या फायदा होगा और कहां जोखिम बढ़ेगा.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

न्यूनतम आवंटित निवेशकों की संख्या 200 से बढ़ाकर 500 करने का प्रस्ताव

तीन साल में औसत सालाना तीन करोड़ रुपये मुनाफा जरूरी होगा

मुनाफा शर्त चूकने पर 75 फीसदी हिस्सा बड़े संस्थानों को मिलेगा

छोटी और मझोली कंपनियों के IPO में निवेश करने वालों के लिए बाजार नियामक SEBI कई बड़े बदलाव करने की तैयारी में है. इन प्रस्तावों के लागू होने पर SME IPO में आवेदन की न्यूनतम रकम घट सकती है, ज्यादा निवेशकों को शेयर आवंटित करने का रास्ता खुल सकता है और कंपनियों के लिए लिस्टिंग से जुड़े कुछ नियम बदल सकते हैं. लेकिन इन बदलावों के बीच एक अहम सवाल भी है. अगर शेयर खरीदने के बाद उसे बेचने की जरूरत पड़े, तो क्या निवेशकों को आसानी से खरीदार मिल पाएंगे?

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SEBI ने SME IPO के नियमों में बदलाव के लिए परामर्श पत्र जारी किया है. फिलहाल ये प्रस्ताव हैं, अंतिम नियम नहीं. आइए समझते हैं कि इनमें क्या-क्या बदल सकता है और निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है.

1. SME IPO में ₹1 लाख से आवेदन का प्रस्ताव

SEBI SME IPO में आवेदन की न्यूनतम रकम घटाकर ₹1 लाख करने का प्रस्ताव दे रहा है. इसके तहत कम से कम चार लॉट में आवेदन करना होगा और प्रत्येक लॉट की कीमत कम से कम ₹25,000 रखने की बात है. इसके अलावा, न्यूनतम शेयर आवंटियों की संख्या 200 से बढ़ाकर 500 करने का प्रस्ताव है.

इस बदलाव का मकसद ज्यादा निवेशकों को SME IPO में भाग लेने का अवसर देना है. हालांकि, आवेदन की रकम कम होने का मतलब यह नहीं है कि निवेश का जोखिम भी कम हो जाएगा.

2. कंपनियों के लिए मुनाफे की शर्त में बदलाव

SEBI का दूसरा बड़ा प्रस्ताव SME IPO लाने वाली कंपनियों की वित्तीय स्थिति से जुड़ा है. मौजूदा नियमों के तहत कंपनी को पिछले तीन वित्तीय वर्षों में से कम से कम दो वर्षों में ₹1 करोड़ का ऑपरेटिंग प्रॉफिट दिखाना होता है.

अब SEBI तीन साल के दौरान औसतन सालाना ₹3 करोड़ का ऑपरेटिंग प्रॉफिट होने की शर्त रखने पर विचार कर रहा है.

जो कंपनियां इस शर्त को पूरा नहीं कर पाएंगी, उनके लिए भी IPO लाने का विकल्प रह सकता है. हालांकि, ऐसी कंपनियों को इश्यू का कम से कम 75 फीसदी हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) को आवंटित करना होगा. यह शर्त पूरी नहीं होने पर निवेशकों को रकम लौटानी होगी.

3. मार्केट मेकिंग खत्म करने की तैयारी, निवेशकों के लिए क्यों अहम?

SME IPO से जुड़ा सबसे अहम प्रस्ताव मार्केट मेकिंग की अनिवार्यता खत्म करने का है. फिलहाल मार्केट मेकर शेयरों की खरीद-बिक्री में मदद करते हैं, जिससे बाजार में लेन-देन बनाए रखने में सहायता मिलती है.

SEBI इसके साथ IPO की 100 फीसदी अंडरराइटिंग की अनिवार्यता भी हटाना चाहता है. इसकी जगह मेन बोर्ड वाला अंडरराइटिंग ढांचा और कम से कम 90 फीसदी सब्सक्रिप्शन की शर्त लागू करने का प्रस्ताव है.

इससे कंपनियों का खर्च कम हो सकता है, लेकिन जिन शेयरों में खरीदार कम होंगे, उन्हें बेचने में निवेशकों को परेशानी हो सकती है. इसी बीच, ट्रेडिंग लॉट को घटाकर एक शेयर करने का भी प्रस्ताव है. इससे एक शेयर खरीदना या बेचना संभव होगा, लेकिन खरीदार मिलने की गारंटी नहीं होगी.

प्रमोटरों के लॉक-इन और लिस्टिंग नियम भी बदल सकते हैं

SEBI प्रमोटरों और पुराने निवेशकों के शेयर बेचने से जुड़े नियमों में भी बदलाव चाहता है. प्रस्ताव के मुताबिक, प्रमोटरों की न्यूनतम हिस्सेदारी तीन साल तक लॉक रह सकती है. उनकी अतिरिक्त हिस्सेदारी पर एक साल और दूसरे प्री-IPO निवेशकों के शेयरों पर छह महीने का लॉक-इन प्रस्तावित है. ऑफर फॉर सेल (OFS) के लिए अलग ढांचा बनाने की भी योजना है.

इसके अलावा, IPO से जुटाई गई रकम के इस्तेमाल से जुड़ी ₹10 करोड़ की सीमा हटाने का प्रस्ताव है. हालांकि, सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए कुल इश्यू की रकम का अधिकतम 15 फीसदी ही इस्तेमाल किया जा सकेगा.

लिस्टिंग के लिए SEBI कंपनी की IPO के बाद की मार्केट कैप को आधार बनाना चाहता है.

  • ₹1,000 करोड़ तक: SME प्लेटफॉर्म पर लिस्टिंग.

  • ₹1,000 करोड़ से ₹4,000 करोड़ तक: पात्र कंपनियों को SME या मेन बोर्ड चुनने का विकल्प.

  • ₹4,000 करोड़ से ज्यादा: पात्र कंपनियों के लिए मेन बोर्ड पर जाना अनिवार्य करने का प्रस्ताव.

मेन बोर्ड से वापस SME प्लेटफॉर्म पर आने का विकल्प भी खत्म करने की तैयारी है.

निवेशकों को क्या ध्यान रखना चाहिए?

SEBI के इन प्रस्तावों का उद्देश्य SME IPO के नियमों में बदलाव करना और निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना है. लेकिन निवेशकों के लिए केवल कम रकम में आवेदन करने का मौका देखना पर्याप्त नहीं होगा. कंपनी की वित्तीय स्थिति, शेयरों में खरीद-बिक्री और जरूरत पड़ने पर निवेश से बाहर निकलने की संभावना को भी समझना जरूरी है.

फिलहाल SEBI ने इन प्रस्तावों पर 4 नवंबर 2026 तक सुझाव मांगे हैं. नियमों में अंतिम बदलाव सुझावों पर विचार करने के बाद ही स्पष्ट होंगे.