शुक्रवार को फिर बाजार में भूचाल, Sensex 700 अंक टूटा; Crude Oil बढ़ा रहा टेंशन !

चिराग ठाकुर

• 11:01 AM • 11 Sep 2026

सेंसेक्स और निफ्टी पर महंगे तेल, मिडिल ईस्ट तनाव, ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और एफआईआई बिकवाली का दबाव है. आगे 23,300 पर निफ्टी की चाल निवेशकों के लिए अहम रहेगी.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

NSE पर 2,269 शेयर गिरे, जबकि सिर्फ 749 शेयर चढ़े

मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक भी करीब 1.1 फीसदी नीचे कारोबार करते दिखे

16 में 15 सेक्टर लाल रहे, रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव

भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार की शुरुआत एक बार फिर जोरदार बिकवाली के साथ हुई. Sensex खुलते ही करीब 700 अंक तक टूट गया, जबकि Nifty 23,250 के नीचे फिसल गया. यानी बाजार में लगातार तीसरे दिन की कमजोरी के बाद अब दबाव और बढ़ता दिख रहा है.

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बाजार में गिरावट के पीछे इस बार कई वजहें एक साथ काम कर रही हैं. Middle East में बढ़ता तनाव, 100 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है.

खबर लिखे जाने तक Sensex 550 अंक से ज्यादा की गिरावट के साथ 74,339 के आसपास कारोबार कर रहा था. वहीं Nifty भी 23,300 के नीचे बना हुआ था.

बाजार में बिकवाली कितनी तेज रही?

शुक्रवार के कारोबार में सिर्फ बड़े शेयर ही नहीं टूटे, बल्कि पूरे बाजार में बिकवाली का दबाव नजर आया.

  • NSE पर करीब 2,269 शेयर गिरावट में कारोबार कर रहे थे.
  • इसके मुकाबले सिर्फ 749 शेयरों में तेजी थी.
  • करीब 137 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ.
  • Midcap और Smallcap इंडेक्स भी करीब 1.1 फीसदी नीचे थे.
  • 16 में से 15 बड़े सेक्टर लाल निशान में कारोबार कर रहे थे.

सेक्टरों में देखें तो रियल्टी शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव रहा और इस सेक्टर में करीब पौने 4 फीसदी की गिरावट दिखी. इसके अलावा मेटल, सीमेंट और PSU बैंक शेयर भी करीब 1 से 2 फीसदी तक टूटे.

महंगा Crude बना बाजार का सबसे बड़ा सिरदर्द

बाजार की सबसे बड़ी चिंता फिलहाल कच्चे तेल की कीमत है. Brent crude करीब 108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है. पिछले एक हफ्ते में ही इसमें करीब 12 फीसदी की तेजी आ चुकी है.

Middle East में संघर्ष बढ़ने के साथ तेल की सप्लाई को लेकर आशंकाएं बढ़ गई हैं. Yemen और Red Sea के आसपास बढ़ता तनाव और Strait of Hormuz में tanker attacks की खबरों ने चिंता और बढ़ा दी है.

भारत के लिए महंगा तेल इसलिए बड़ी समस्या है क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है.

महंगा तेल यानी.

  • भारत का import bill बढ़ सकता है.
  • महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है.
  • रुपये पर असर पड़ सकता है.
  • कंपनियों की लागत और मुनाफे पर दबाव आ सकता है.

यही वजह है कि कच्चे तेल की तेजी को लेकर बाजार में चिंता बढ़ी हुई है.

US Bond Yield भी बढ़ा रही टेंशन

बाजार पर दूसरा दबाव अमेरिकी बॉन्ड यील्ड से आया है. अमेरिका की 10-year Treasury yield करीब 4.94 फीसदी तक पहुंच गई है और अब 5 फीसदी के बेहद करीब है.

जब अमेरिकी बॉन्ड पर रिटर्न बढ़ता है, तो विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी बाजार ज्यादा आकर्षक हो सकता है. इसका असर भारत जैसे उभरते बाजारों पर भी पड़ सकता है.

FII की बिकवाली ने भी बढ़ाई चिंता

विदेशी निवेशकों की चाल भी बाजार के लिए राहत देने वाली नहीं है. 10 सितंबर को FIIs ने भारतीय शेयरों में करीब 438 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की.

हालांकि Domestic Institutional Investors यानी DIIs ने करीब 1,026 करोड़ रुपये की खरीदारी की, लेकिन लगातार विदेशी बिकवाली से बाजार का सेंटीमेंट कमजोर बना हुआ है.

Nifty के लिए 23,300 का स्तर अहम

अब नजर बाजार के अगले कदम पर है. Nifty के लिए 23,300 का स्तर काफी अहम माना जा रहा है.

अगर इंडेक्स इस स्तर के नीचे टिकता है, तो कमजोरी आगे भी बढ़ सकती है. वहीं तेजी की वापसी के लिए पहले 23,450 से 23,500 का स्तर पार करना जरूरी होगा.

इस बीच India VIX भी करीब 5.5 फीसदी बढ़कर 12.45 पर पहुंच गया है. VIX में तेजी बताती है कि बाजार में आने वाले दिनों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है.

यानी फिलहाल बाजार के सामने चुनौती सिर्फ एक नहीं है. महंगा crude, Middle East का तनाव, बढ़ती US bond yield और FII selling, चारों मोर्चों से दबाव बना हुआ है.

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कच्चा तेल 100 डॉलर के ऊपर कितने समय तक टिकता है. अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं, तो असर सिर्फ शेयर बाजार तक सीमित नहीं रहेगा. इसका दबाव रुपये, महंगाई और भारत की आर्थिक growth पर भी देखने को मिल सकता है.