तेल की कीमतों की आग में झुलसा शेयर बाजार, Sensex 600 अंक टूटा; IT Stocks भी धड़ाम

चिराग ठाकुर

• 10:41 AM • 09 Sep 2026

पश्चिम एशिया तनाव, कच्चे तेल की तेजी, रुपये की कमजोरी और आईटी बिकवाली से बाजार दबाव में है. जानिए सेंसेक्स, निफ्टी और आगे के अहम स्तर क्या हैं.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

पश्चिम एशिया तनाव से तेल महंगा हुआ और बाजार डर में दिखा

रुपया 21 पैसे टूटा तो विदेशी निवेशकों की चिंता और बढ़ी

विदेशी फंड ने 123 करोड़ रुपये निकाले, धारणा पर असर पड़ा

भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को कारोबार की शुरुआत ही भारी गिरावट के साथ हुई. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी. इसके साथ ही IT शेयरों में बिकवाली, विदेशी निवेशकों की निकासी और रुपये में कमजोरी ने बाजार पर दबाव और बढ़ा दिया.

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सुबह करीब 10 बजे Sensex 598 अंक टूटकर 74,979 के आसपास पहुंच गया. वहीं Nifty करीब 160 अंक फिसलकर 23,475 के स्तर पर आ गया. मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली.

सबसे बड़ा डर: कच्चा तेल $100 के करीब

बाजार की इस गिरावट की सबसे बड़ी वजहों में से एक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है. Brent crude करीब 1.5 फीसदी चढ़कर 99.5 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया.

पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण बाजार में यह आशंका बढ़ रही है कि तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. यही वजह है कि कच्चे तेल में तेजी से भारत जैसे बड़े आयातक देश की चिंता बढ़ जाती है.

इसका असर कई मोर्चों पर पड़ सकता है.

महंगा कच्चा तेल भारत का आयात बिल बढ़ा सकता है. इससे व्यापार घाटे पर दबाव बढ़ सकता है. महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा होगा. रुपये पर भी दबाव बढ़ सकता है. कंपनियों की लागत बढ़ने से मुनाफे पर असर पड़ सकता है.

यानी अगर crude लंबे समय तक 100 डॉलर के आसपास बना रहता है, तो बाजार के लिए यह बड़ा जोखिम बन सकता है.

रुपये की कमजोरी ने बढ़ाई चिंता

कच्चे तेल की तेजी का असर रुपये पर भी दिखाई दिया. बुधवार को रुपया 21 पैसे कमजोर होकर 94.95 प्रति डॉलर के आसपास पहुंच गया.

तेल की कीमत बढ़ने पर भारत को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं. इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव आता है. कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों के लिए भी भारतीय बाजार को कुछ हद तक कम आकर्षक बना सकता है.

विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी जारी

बाजार में विदेशी फंड की चाल भी निवेशकों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है. 8 सितंबर को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से करीब 123 करोड़ रुपये की निकासी की.

रकम भले ही बहुत बड़ी नहीं हो, लेकिन लगातार बिकवाली का माहौल बाजार की धारणा को कमजोर कर सकता है. खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर भी निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं.

IT शेयरों में जोरदार गिरावट

बुधवार की गिरावट में IT सेक्टर ने भी बाजार का मूड बिगाड़ा. Nifty IT इंडेक्स करीब 3 फीसदी तक फिसल गया.

सबसे ज्यादा चर्चा Coforge की रही, जिसके शेयर में करीब 6 फीसदी की गिरावट आई. कंपनी के चेयरमैन ओम प्रकाश भट्ट के इस्तीफे की खबर के बाद शेयर पर दबाव बढ़ा.

हालांकि हर शेयर लाल निशान में नहीं था. Graphite India के शेयर में 13 फीसदी से ज्यादा की तेजी देखने को मिली. कंपनी के अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में सक्रिय एक प्रमुख खिलाड़ी द्वारा कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा के बाद शेयर में खरीदारी बढ़ी.

India VIX में उछाल, बाजार में बढ़ी बेचैनी

बाजार में डर का संकेत देने वाला India VIX 5 फीसदी से ज्यादा बढ़कर 11.72 के करीब पहुंच गया. VIX में तेजी का मतलब है कि निवेशक आने वाले दिनों में बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव की आशंका देख रहे हैं.

तकनीकी स्तर पर भी Nifty के लिए 23,500 का स्तर अहम माना जा रहा है. इसके नीचे कमजोरी बनी रही तो 23,260 और फिर 23,000 के स्तर पर नजर रहेगी. वहीं तेजी लौटने पर 23,650 के ऊपर टिकना बाजार में शॉर्ट कवरिंग का रास्ता खोल सकता है.

कुल मिलाकर, फिलहाल बाजार के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि पश्चिम एशिया का तनाव और crude की तेजी कितने समय तक जारी रहती है. अगर तेल 100 डॉलर के आसपास टिकता है, तो भारतीय शेयर बाजार पर दबाव आने वाले सत्रों में भी बना रह सकता है.