भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में तेज बिकवाली देखने को मिली. Sensex 450 अंक से ज्यादा फिसलकर 78,511 के आसपास आ गया, जबकि Nifty भी 24,600 के नीचे कारोबार करता नजर आया. बाजार में कमजोरी की वजह सिर्फ मुनाफावसूली नहीं है. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, बैंकिंग और NBFC शेयरों में दबाव, कमजोर ग्लोबल संकेत और बढ़ती अनिश्चितता ने निवेशकों के सेंटीमेंट पर असर डाला है.
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हालांकि, इस गिरावट के बावजूद पूरे हफ्ते की बात करें तो बाजार अभी बढ़त में है. इस सप्ताह Nifty करीब 1 फीसदी और Sensex लगभग 0.8 फीसदी चढ़ा है. ऐसे में शुक्रवार की गिरावट को फिलहाल बड़ी trend reversal की बजाय मुनाफावसूली और कुछ नए जोखिमों के असर के तौर पर देखा जा रहा है.
बाजार में गिरावट की 5 बड़ी वजहें
1. कच्चे तेल की बढ़ती कीमत
शुक्रवार को बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है. Brent crude करीब 1.2 फीसदी बढ़कर 83.45 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है. यह लगातार तीसरा कारोबारी सत्र है जब कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है.
भारत के लिए महंगा crude चिंता का विषय है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है. तेल महंगा होने से:
- भारत का import bill बढ़ सकता है.
- डॉलर की मांग बढ़ सकती है.
- रुपये पर दबाव आ सकता है.
- महंगाई बढ़ने की चिंता बढ़ सकती है.
- कंपनियों की लागत पर भी असर पड़ सकता है.
इस बार चिंता सिर्फ crude की कीमत बढ़ने की नहीं है. Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों को लेकर ईरान और ओमान से जुड़ी खबरों ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है. अगर इस अहम oil route पर किसी तरह की बाधा आती है, तो crude की कीमतों में और तेजी का खतरा पैदा हो सकता है.
2. RBI के NBFC प्रस्ताव से Financial Stocks दबाव में
बाजार में दूसरी बड़ी चिंता RBI के NBFCs से जुड़े draft proposal को लेकर है. इसका सीधा असर financial stocks में दिखाई दे रहा है.
Bajaj Finance और Bajaj Finserv जैसे शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली. Bajaj Finance करीब 4 फीसदी तक टूटा, जबकि Bajaj Finserv भी 3 फीसदी से ज्यादा नीचे आया.
RBI के प्रस्ताव के मुताबिक NBFCs को term loan जैसे credit products तक सीमित करने और revolving credit products पर रोक लगाने की बात कही गई है.
आसान भाषा में समझें तो अभी flexi loan जैसे products में ग्राहक लोन की कुछ रकम वापस चुकाने के बाद उपलब्ध credit limit का दोबारा इस्तेमाल कर सकता है. लेकिन प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने पर repayment के बाद चुकाई गई रकम को उसी sanctioned limit के तहत दोबारा इस्तेमाल करने की सुविधा नहीं होगी.
बाजार को चिंता है कि इससे कुछ NBFCs की:
- Loan growth प्रभावित हो सकती है.
- Fee income पर दबाव आ सकता है.
- Product strategy बदलनी पड़ सकती है.
इसी वजह से RBI के प्रस्ताव के बाद financial stocks में selling pressure बढ़ा है.
3. Financial sector में चौतरफा दबाव
NBFCs से जुड़ी चिंता का असर पूरे financial sector पर दिखाई दिया.
- Nifty Financial Services Index करीब 0.6 फीसदी नीचे.
- Nifty Bank भी लाल निशान में.
- Bajaj Finance में करीब 4 फीसदी तक गिरावट.
- Bajaj Finserv 3 फीसदी से ज्यादा नीचे.
हालांकि बाजार में सभी सेक्टरों में गिरावट नहीं है. IT और auto stocks में खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार की गिरावट कुछ हद तक सीमित रही.
4. कमजोर Global Cues
भारतीय बाजार को ग्लोबल मार्केट से भी शुक्रवार को खास सपोर्ट नहीं मिला. एशियाई बाजारों में कमजोरी देखने को मिली. Japan का Nikkei और South Korea का KOSPI दबाव में रहे.
इससे पहले अमेरिकी बाजार भी गुरुवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे.
यानी घरेलू बाजार में पहले से मौजूद crude और financial stocks से जुड़ी चिंताओं के बीच कमजोर global cues ने निवेशकों के sentiment को और प्रभावित किया.
5. India VIX में तेजी
India VIX करीब 3 फीसदी बढ़कर 12.46 के आसपास पहुंच गया.
VIX को बाजार का volatility gauge माना जाता है. इसमें तेजी का मतलब है कि निवेशकों के बीच uncertainty बढ़ रही है और बाजार में आगे ज्यादा उतार-चढ़ाव की आशंका बन रही है.
गुरुवार को FIIs ने भारतीय equities में करीब 18 करोड़ रुपये की बिकवाली भी की. हालांकि इतनी छोटी बिकवाली को शुक्रवार की गिरावट की बड़ी वजह नहीं माना जा सकता.
पूरे हफ्ते की तस्वीर अभी भी पॉजिटिव
शुक्रवार की गिरावट के बावजूद पूरे सप्ताह बाजार अभी बढ़त में है.
- Nifty करीब 1 फीसदी ऊपर.
- Sensex करीब 0.8 फीसदी ऊपर.
इसलिए मौजूदा गिरावट को फिलहाल बड़ी trend reversal मानना जल्दबाजी होगी. हाल की तेजी के बाद निवेशकों की profit booking और नए risk factors के चलते बाजार में दबाव बना है.
Closing Auction Session भी चर्चा में
बाजार में पिछले कुछ दिनों से Closing Auction Session यानी CAS भी चर्चा में है. सोमवार से equity cash segment में यह नया auction mechanism लागू हुआ है.
इसका मकसद eligible stocks की closing price discovery को ज्यादा transparent और मजबूत बनाना है. हालांकि इसके शुरू होने के बाद market close के आसपास कुछ शेयरों में अचानक movement देखने को मिल रही है.
ऐसे में बाजार में volatility को लेकर भी निवेशकों की नजर इस नई व्यवस्था पर बनी हुई है.
Nifty के लिए 24,775 अहम स्तर
अब सबसे बड़ा सवाल है कि Nifty आगे किस दिशा में जाता है. Technical experts की नजर 24,775 के स्तर पर बनी हुई है.
तेजी की स्थिति में:
- 24,775 के ऊपर मजबूती तेजी का संकेत दे सकती है.
- 24,650-24,730 का जोन अहम resistance है.
कमजोरी की स्थिति में:
- 24,570 के नीचे टिकने पर दबाव बढ़ सकता है.
- 24,400 अगला अहम स्तर बन सकता है.
आगे बाजार के लिए क्या अहम रहेगा?
फिलहाल बाजार की चाल मुख्य तौर पर तीन चीजों पर निर्भर करती दिख रही है:
- Crude oil की कीमतें आगे किस दिशा में जाती हैं.
- RBI का NBFC draft proposal final रूप में कैसा आता है.
- Global markets में कमजोरी कितनी देर बनी रहती है.
इन मोर्चों पर चिंता बढ़ती है तो बाजार में volatility और बढ़ सकती है. हालांकि पूरे सप्ताह की बढ़त को देखते हुए शुक्रवार की गिरावट को फिलहाल profit booking और बढ़ी हुई uncertainty के तौर पर देखना ज्यादा उचित होगा.
निवेशकों की नजर अब खास तौर पर Nifty के 24,570 के स्तर पर रहेगी. इसके ऊपर बाजार संभला रहता है तो कमजोरी सीमित रह सकती है, लेकिन यह स्तर टूटने पर दबाव और बढ़ सकता है.
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