Stock Market Crash: 900 अंक टूटा सेंसेक्स, 100 डॉलर के पार तेल, आखिर क्यों मची बाजार में भगदड़?

चिराग ठाकुर

• 11:34 AM • 24 Jul 2026

शेयर बाजार में लगातार पांचवें दिन बड़ी गिरावट रही. सेंसेक्स 800 अंक से ज्यादा टूटा और निफ्टी 23,650 के नीचे आया. जानिए तेल, तनाव और बिकवाली की बड़ी वजहें.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

मध्य पूर्व तनाव से सुरक्षित निवेश की तरफ पैसा तेजी से गया

कच्चा तेल 100 डॉलर पार जाने से महंगाई का डर बढ़ा

कमजोर रुपया भारत के आयात बिल और लागत दोनों बढ़ाता

भारतीय शेयर बाजार के लिए शुक्रवार का कारोबारी सत्र बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा. जिस खतरे की आशंका पिछले कई दिनों से जताई जा रही थी, उसका असर अब बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है. कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, विदेशी निवेशकों ने बिकवाली तेज कर दी है और बाजार में डर का माहौल बन गया है. नतीजा यह रहा कि सेंसेक्स करीब 900 अंक तक टूट गया, जबकि निफ्टी भी 23,600 के करीब फिसल गया. सवाल यह है कि आखिर बाजार में अचानक इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई और क्या यह सिर्फ एक दिन की कमजोरी है या आने वाले दिनों में दबाव और बढ़ सकता है.

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बाजार खुलते ही हर तरफ दिखी बिकवाली

शुक्रवार सुबह बाजार खुलते ही लगभग हर सेक्टर में बिकवाली देखने को मिली. खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स करीब 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट के साथ 75,569 के आसपास कारोबार कर रहा था. वहीं निफ्टी भी करीब 1 फीसदी टूटकर 23,636 के स्तर पर पहुंच गया.अगर सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो FMCG को छोड़कर लगभग सभी सेक्टर दबाव में रहे. सबसे ज्यादा गिरावट ऑटो, मेटल और रियल्टी सेक्टर में देखने को मिली, जहां इंडेक्स 1 फीसदी से ज्यादा टूट गए. इसके अलावा स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में भी एक फीसदी से ज्यादा की कमजोरी दर्ज की गई. इससे साफ है कि बिकवाली सिर्फ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे बाजार में निवेशकों ने जोखिम कम करना शुरू कर दिया.

ऑयल कंपनियों के शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव

इस गिरावट का सबसे ज्यादा असर उन कंपनियों पर दिखाई दिया, जिनका सीधा संबंध कच्चे तेल की कीमतों से है. HPCL और Indian Oil जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयर करीब 2 फीसदी तक टूट गए. महंगे कच्चे तेल का सीधा असर इन कंपनियों के कारोबार और मार्जिन पर पड़ने की आशंका रहती है. यही वजह रही कि निवेशकों ने सबसे पहले इन शेयरों में बिकवाली की.

भारत नहीं, मिडिल ईस्ट से शुरू हुई बाजार की घबराहट

इस बार बाजार में आई गिरावट की शुरुआत भारत से नहीं हुई. इसकी जड़ें हजारों किलोमीटर दूर मिडिल ईस्ट में हैं.अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है. इसी बीच ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने रेड सी में सऊदी अरब के दो ऑयल टैंकरों पर हमला करने का दावा किया. इस घटना के बाद दुनिया भर में यह चिंता बढ़ गई कि अगर तेल की सप्लाई प्रभावित होती है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा संकट खड़ा हो सकता है.

इसी डर का असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई दिया और ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया. इतना ही नहीं, Goldman Sachs ने यह भी कहा है कि अगर हॉर्मुज और रेड सी के रास्ते तेल की सप्लाई बाधित रहती है, तो कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है.

महंगा तेल शेयर बाजार के लिए क्यों खतरा है?

कई निवेशकों के मन में यह सवाल जरूर आता है कि कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से शेयर बाजार क्यों गिरता है.दरअसल, पिछले कुछ महीनों में यह साफ देखने को मिला है कि महंगे कच्चे तेल का असर सिर्फ पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहता. इससे कंपनियों की लागत बढ़ती है, महंगाई पर दबाव आता है और बाजार का निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ने लगता है. यही वजह है कि जैसे ही तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं, शेयर बाजार में बिकवाली भी तेज हो गई.

कंपनियों के कमजोर नतीजों ने बढ़ाया दबाव

बाजार पर सिर्फ तेल का असर नहीं पड़ा. कई बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजों ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी.IndiGo की पैरेंट कंपनी InterGlobe Aviation को जून तिमाही में 238 करोड़ रुपये का घाटा हुआ. कंपनी ने इसकी वजह बढ़ती ईंधन लागत और मिडिल ईस्ट संकट को बताया.वहीं आईटी सेक्टर की बड़ी कंपनी Infosys ने भी पूरे साल के Revenue Growth Guidance का ऊपरी अनुमान घटा दिया. इससे यह संकेत मिला कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता का असर अब भारतीय कंपनियों के कारोबार पर भी दिखाई देने लगा है.

विदेशी निवेशकों ने भी बढ़ाई बिकवाली

बाजार पर दबाव बढ़ाने वाली एक और बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की बिकवाली रही. गुरुवार को Foreign Institutional Investors यानी FII ने करीब 2,999 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए. जब विदेशी निवेशक लगातार बाजार से पैसा निकालते हैं, तो इसका सीधा असर निवेशकों के भरोसे पर पड़ता है. यही वजह है कि बाजार में घबराहट और बढ़ गई.

दुनिया के बाजारों में भी दिखा डर

भारतीय बाजार की कमजोरी अकेली नहीं थी. एशिया के कई बड़े शेयर बाजार भी दबाव में दिखाई दिए.दक्षिण कोरिया का KOSPI पांच फीसदी से ज्यादा टूट गया. जापान का Nikkei, चीन का Shanghai Composite और हांगकांग का Hang Seng भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे. इससे साफ है कि मौजूदा दबाव सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक निवेशकों का रुख भी फिलहाल सतर्क बना हुआ है.

India VIX ने भी दिया बड़ा संकेत

बाजार में बढ़ते डर का सबसे बड़ा संकेत India VIX से मिला, जिसे बाजार का Fear Index भी कहा जाता है. India VIX करीब 9 फीसदी उछल गया. इसका मतलब है कि निवेशकों को आने वाले दिनों में बाजार में और ज्यादा उतार-चढ़ाव की आशंका दिखाई दे रही है. आम तौर पर VIX में तेजी तब आती है, जब निवेशक बाजार को लेकर ज्यादा सतर्क हो जाते हैं.

आगे किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर?

फिलहाल शेयर बाजार के सामने तीन बड़ी चुनौतियां हैं. पहली, मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव. दूसरी, 100 डॉलर के ऊपर पहुंचा कच्चा तेल. और तीसरी, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली.

अगर आने वाले दिनों में जंग और बढ़ती है या कच्चा तेल लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बना रहता है, तो बाजार पर दबाव और बढ़ सकता है. वहीं अगर मिडिल ईस्ट से तनाव कम होने के संकेत मिलते हैं और तेल की कीमतों में नरमी आती है, तो बाजार को राहत मिल सकती है.

फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि शेयर बाजार का रुख अब सिर्फ कंपनियों के प्रदर्शन से तय नहीं होगा. निवेशकों की नजर मिडिल ईस्ट से आने वाली हर खबर, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की चाल पर बनी रहेगी. यही तीन फैक्टर आने वाले दिनों में तय करेंगे कि बाजार संभलता है या गिरावट का दौर अभी और लंबा चलता है.