सप्ताह की एक्सपायरी से ठीक पहले घरेलू शेयर बाजार में निवेशकों का मूड पूरी तरह बदला हुआ नजर आया. कारोबार की शुरुआत लाल निशान में हुई और शुरुआती मिनटों में ही सेंसेक्स 600 अंकों से ज्यादा टूट गया. वहीं निफ्टी 50 भी तेजी से फिसलकर 24,000 के करीब पहुंच गया. बड़ी कंपनियों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव देखने को मिला. इससे साफ संकेत मिला कि बिकवाली केवल कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे बाजार में कमजोरी का माहौल बना. एक कारोबारी दिन पहले भी बाजार कमजोरी के साथ बंद हुआ था. सेंसेक्स 238.41 अंकों की गिरावट के साथ 77,470.11 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 50 भी 50.80 अंक टूटकर 24,187.70 के स्तर पर पहुंच गया था. अगले कारोबारी दिन इसी कमजोर रुख ने और तेज गिरावट का रूप ले लिया.
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शुरुआती कारोबार में बढ़ा दबाव
सुबह करीब 9:34 बजे सेंसेक्स 564.77 अंक यानी 0.73 फीसदी टूटकर 76,905.34 पर कारोबार करता दिखा. वहीं निफ्टी 158 अंक यानी 0.65 फीसदी की गिरावट के साथ 24,029.70 के स्तर पर पहुंच गया. कारोबार के दौरान सेंसेक्स 76,888.50 तक फिसल गया, जबकि निफ्टी 24,019.40 के इंट्राडे लो तक पहुंचा. इन स्तरों ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी.
पहली वजह - अमेरिका-ईरान तनाव ने बिगाड़ा माहौल
बाजार की कमजोरी के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ता तनाव माना जा रहा है. लगातार 11वीं रात अमेरिकी हवाई हमलों की खबरों ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी. इन हमलों में सैन्य ठिकानों, एयरक्राफ्ट हैंगर और ड्रोन स्टोरेज साइट्स को निशाना बनाया गया. दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के फिलहाल कोई संकेत नहीं मिलने से निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनानी शुरू कर दी. इसका असर भारतीय शेयर बाजार के सेंटीमेंट पर भी साफ दिखाई दिया.
दूसरी वजह - IT और Pharma सेक्टर में तेज बिकवाली
आज बाजार की सबसे बड़ी कमजोरी आईटी और फार्मा सेक्टर से आई. फार्मा कंपनियों पर दबाव इसलिए बढ़ा क्योंकि अमेरिकी नीति में जेनेरिक दवाइयों को भी शामिल किए जाने की खबर से इस सेक्टर की कंपनियों को लेकर चिंता बढ़ गई. इसका असर निफ्टी फार्मा इंडेक्स पर दिखाई दिया, जिसमें 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज हुई. दूसरी ओर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े शेयरों में वैश्विक स्तर पर तेजी के चलते भारतीय आईटी कंपनियों पर दबाव बना. निवेशकों ने आईटी शेयरों में मुनाफावसूली की, जिससे निफ्टी आईटी इंडेक्स भी 1 फीसदी से ज्यादा टूट गया. इसके अलावा बैंकिंग सेक्टर भी बिकवाली से अछूता नहीं रहा. सरकारी और निजी दोनों बैंकिंग शेयरों में कमजोरी देखने को मिली और संबंधित बैंकिंग इंडेक्स आधे फीसदी से ज्यादा फिसल गए.
तीसरी वजह - व्यापक स्तर पर बनी बिकवाली
बाजार में केवल बड़ी कंपनियों के शेयर ही नहीं गिरे, बल्कि व्यापक स्तर पर भी कमजोरी देखने को मिली. निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में भी करीब आधा फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई. इसका मतलब यह रहा कि निवेशकों ने अलग-अलग सेक्टर और मार्केट कैप वाली कंपनियों में भी खरीदारी से दूरी बनाई.
India VIX पर भी रही नजर
बाजार की चाल को समझने में इंडिया VIX अहम संकेतक माना जाता है. कारोबार के दौरान इंडिया VIX में 3.25 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई और यह 13.01 के स्तर पर रहा. यह इंडेक्स बाजार में संभावित उतार-चढ़ाव का संकेत देता है. VIX के स्तर पर निवेशकों की नजर इसलिए रहती है क्योंकि इससे आने वाले दिनों में बाजार की अस्थिरता का अनुमान लगाया जाता है.
निवेशकों के लिए क्या संकेत
बाजार में आई यह गिरावट कई घरेलू और वैश्विक कारणों के संयुक्त असर का परिणाम दिखाई दी. अमेरिका-ईरान तनाव, आईटी और फार्मा सेक्टर में तेज बिकवाली और व्यापक स्तर पर बने दबाव ने निवेशकों की धारणा कमजोर की. ऐसे माहौल में बाजार की दिशा पर वैश्विक घटनाक्रम और सेक्टोरल मूवमेंट की भूमिका आगे भी महत्वपूर्ण रहने वाली है.
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