भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को कारोबार की शुरुआत ही भारी दबाव के साथ हुई. सेंसेक्स और निफ्टी करीब 1.4% तक फिसल गए. सेंसेक्स 1,000 अंकों से ज्यादा टूटकर 72,900 के नीचे चला गया, जबकि निफ्टी भी 22,850 के स्तर से नीचे आ गया. इस गिरावट का असर सिर्फ बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली.
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बाजार की इस कमजोरी के पीछे घरेलू कारणों से ज्यादा वैश्विक घटनाक्रम जिम्मेदार नजर आ रहे हैं. खासकर कच्चे तेल की बढ़ती कीमत, अमेरिका की बॉन्ड यील्ड में उछाल और ईरान-अमेरिका तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है.
ईरान-अमेरिका तनाव ने बढ़ाई बाजार की चिंता
मध्य पूर्व में तनाव कम होने की उम्मीदों को उस वक्त झटका लगा जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ओर से रखे गए सात दिन के युद्धविराम प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया.
ईरान की तरफ से भी पीछे हटने के संकेत नहीं मिले हैं. ऐसे में निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि आगे तनाव किस दिशा में जाता है और इसका असर तेल की सप्लाई पर कितना पड़ता है.
खासकर हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंता बढ़ी है. दुनिया के तेल कारोबार के लिए यह बेहद अहम समुद्री रास्ता है. यहां किसी भी तरह का व्यवधान वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों दोनों को प्रभावित कर सकता है.
कच्चा तेल 107 डॉलर के करीब पहुंचा
मध्य पूर्व के तनाव का सबसे सीधा असर कच्चे तेल पर दिखाई दिया.
- ब्रेंट क्रूड करीब 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया.
- WTI क्रूड भी करीब 94 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता नजर आया.
- तेल महंगा होने से भारत जैसे बड़े आयातक देश की चिंता बढ़ती है.
महंगा कच्चा तेल भारत के लिए आयात बिल बढ़ा सकता है. इससे रुपये पर दबाव और महंगाई की चिंता भी बढ़ सकती है. यही वजह है कि तेल की कीमतों में तेजी को शेयर बाजार के लिए बड़ा जोखिम माना जा रहा है.
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ने भी बढ़ाया दबाव
अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल ने भी इक्विटी बाजार की मुश्किल बढ़ा दी है.
अमेरिका की 10 साल की बॉन्ड यील्ड 5.2% के ऊपर चली गई, जबकि 30 साल की यील्ड 5.5% के पार पहुंची. जब बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न बढ़ता है, तो निवेशकों के लिए शेयर बाजार जैसे जोखिम वाले एसेट्स की तुलना में बॉन्ड ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं.
यानी एक तरफ महंगा तेल और दूसरी तरफ ऊंची बॉन्ड यील्ड. दोनों मिलकर भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बना रहे हैं.
रुपये की कमजोरी भी बनी चिंता
सोमवार को शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले 95.89 के आसपास पहुंच गया. ऊंचे तेल दाम, मजबूत डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी रुपये के लिए चुनौती बन रहे हैं.
रुपये में कमजोरी का असर कंपनियों और अर्थव्यवस्था के अलग-अलग हिस्सों पर पड़ सकता है, खासकर उन कारोबारों पर जो बड़ी मात्रा में आयात करते हैं.
विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी
विदेशी निवेशकों का रुख भी बाजार के लिए राहत देने वाला नहीं रहा. शुक्रवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में करीब ₹3,694 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की.
सितंबर में अब तक एक्सचेंज के जरिए विदेशी निवेशकों की इक्विटी बिकवाली करीब ₹25,682 करोड़ तक पहुंच गई है.
इससे बाजार में यह चिंता बढ़ी है कि जुलाई और अगस्त में खरीदारी करने के बाद विदेशी निवेशक एक बार फिर भारतीय शेयरों से पैसा निकाल रहे हैं.
अब बाजार की नजर किन चीजों पर?
आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर मुख्य रूप से तीन बड़े संकेतों पर रहेगी.
- ईरान-अमेरिका तनाव: क्या तनाव कम होता है या हॉर्मुज को लेकर स्थिति और बिगड़ती है.
- कच्चे तेल की कीमत: तेल 100 डॉलर के ऊपर कितने समय तक रहता है.
- अमेरिकी बॉन्ड यील्ड: यील्ड में तेजी जारी रहती है या इसमें नरमी आती है.
तकनीकी स्तर पर भी निफ्टी के लिए 23,000 का स्तर अहम माना जा रहा है. इसके नीचे कमजोरी बढ़ने पर 22,800 का स्तर देखा जा सकता है. वहीं बाजार में किसी सकारात्मक खबर, खासकर हॉर्मुज को लेकर तनाव कम होने पर निफ्टी में 23,300 से 23,450 की तरफ रिकवरी की गुंजाइश बन सकती है.
फिलहाल बाजार के सामने तस्वीर यही है कि घरेलू अर्थव्यवस्था और कंपनियों की कमाई से जुड़े कुछ सकारात्मक संकेत मौजूद हैं, लेकिन महंगा तेल, ऊंची अमेरिकी यील्ड और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जैसे बाहरी दबाव बाजार की चाल पर भारी पड़ रहे हैं.
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