बाजार की तेजी पर फिर लगा ब्रेक, Sensex और Nifty फिसले नीचे, क्यों लौटी बिकवाली ?

चिराग ठाकुर

• 10:44 AM • 14 Aug 2026

मिडिल ईस्ट तनाव, कच्चे तेल की बढ़त और एफआईआई बिकवाली से शेयर बाजार दबाव में है. जानिए सेंसेक्स-निफ्टी के अहम स्तर, निवेशकों के लिए जोखिम और आगे की संभावित चाल.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

हफ्ते में अब तक बाजार करीब 0.8 फीसदी नीचे आ चुका है

सीजफायर पर ठोस प्रगति न होने से अनिश्चितता और बढ़ी

ऊंचे तेल से आयात बिल और कंपनियों की लागत बढ़ सकती है

भारतीय शेयर बाजार में हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन भी कमजोरी देखने को मिली. शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty दोनों दबाव में रहे. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार के सेंटीमेंट पर असर डाला.

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सुबह करीब 10:30 बजे Sensex 341 अंक यानी 0.41 फीसदी गिरकर 77,760 के आसपास कारोबार कर रहा था. वहीं Nifty 73 अंक यानी 0.30 फीसदी की कमजोरी के साथ 24,321 के करीब पहुंच गया.

बाजार में गिरावट की बड़ी वजह क्या है?

इस हफ्ते शेयर बाजार पहले ही करीब 0.8 फीसदी नीचे आ चुका है. अब शुक्रवार की कमजोरी ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी. बाजार में सबसे बड़ा दबाव मिडिल ईस्ट में जारी तनाव से आया है.

अमेरिका की ओर से ईरान पर नौसैनिक नाकाबंदी लंबे समय तक जारी रखने की संभावना जताए जाने के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका है. सीजफायर को लेकर बातचीत में कोई ठोस प्रगति नहीं होने से निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ी है.

यानी बाजार के लिए फिलहाल सबसे बड़ा रिस्क जियोपॉलिटिकल टेंशन बना हुआ है.

कच्चा तेल फिर बढ़ा, भारत के लिए चिंता क्यों?

ईरान को लेकर तनाव बढ़ने का सीधा असर ग्लोबल क्रूड मार्केट पर भी दिखा. शुक्रवार को Brent crude करीब 0.1 फीसदी बढ़कर 87.16 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया. वहीं WTI crude करीब 81.29 डॉलर प्रति बैरल पर रहा.

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है. ऐसे में अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबा खिंचता है और तेल की कीमतें लगातार ऊंची रहती हैं, तो इससे भारत के इंपोर्ट बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है.

यही वजह है कि क्रूड में तेजी भारतीय शेयर बाजार के लिए निगेटिव संकेत मानी जा रही है.

FII की बिकवाली ने भी बढ़ाया दबाव

विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs का रुख भी बाजार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है. गुरुवार को FIIs ने भारतीय शेयर बाजार में करीब 510 करोड़ रुपये की बिकवाली की. यह लगातार दूसरा कारोबारी सत्र रहा जब विदेशी निवेशक नेट सेलर रहे.

जब ग्लोबल मार्केट में जोखिम बढ़ता है, तो विदेशी निवेशक अक्सर उभरते बाजारों में अपनी पोजिशन कम करते हैं. इसका असर भारतीय इक्विटी पर भी देखने को मिल सकता है.

क्या Nifty में फिर तेजी की गुंजाइश है?

बाजार में कमजोरी के बावजूद टेक्निकल चार्ट पूरी तरह निराशाजनक तस्वीर नहीं दिखा रहे हैं. बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक पिछले दो कारोबारी सत्रों में निचले स्तर से खरीदारी देखने को मिली है. इससे संकेत मिलता है कि कुछ निवेशक गिरावट को खरीदारी के मौके के तौर पर देख रहे हैं.

Nifty के लिए 24,329 के आसपास का स्तर अहम माना जा रहा है.

अगर यह स्तर टिकता है तो इंडेक्स में दोबारा ऊपर की तरफ 24,540 से 24,666 और उसके बाद 24,850-25,100 के जोन की ओर बढ़ने की कोशिश हो सकती है.

वहीं दूसरी तरफ, अगर Nifty 24,329 के नीचे टिकता है, तो 24,000 के आसपास का स्तर बाजार के लिए अगला महत्वपूर्ण सपोर्ट बन सकता है.

निवेशकों के लिए क्या संकेत?

फिलहाल बाजार के सामने कई बड़े ट्रिगर हैं. एक तरफ अमेरिका की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें हैं, तो दूसरी तरफ मिडिल ईस्ट का तनाव और क्रूड की चाल सेंटीमेंट को प्रभावित कर रही है.

 इसलिए आने वाले दिनों में सिर्फ घरेलू संकेत नहीं, बल्कि तेल की कीमत, FII फ्लो और जियोपॉलिटिकल घटनाक्रम भी बाजार की दिशा तय करेंगे.

जब तक मिडिल ईस्ट तनाव को लेकर स्पष्टता नहीं आती, बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है. ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए जल्दबाजी के बजाय मजबूत कंपनियों और अहम सपोर्ट लेवल पर नजर रखना ज्यादा जरूरी होगा.