भारतीय शेयर बाजार ने कारोबारी हफ्ते की शुरुआत जोरदार तेजी के साथ की. सोमवार को बाजार खुलते ही निवेशकों ने जमकर खरीदारी की, जिसका असर प्रमुख इंडेक्स पर साफ दिखाई दिया. सेंसेक्स 600 अंकों से ज्यादा चढ़ गया, जबकि निफ्टी 24,500 के ऊपर निकल गया. बाजार में सिर्फ बड़ी कंपनियों के शेयर ही नहीं, बल्कि कई सेक्टर्स में भी अच्छी तेजी देखने को मिली. इस तेजी के पीछे कोई एक वजह नहीं थी, बल्कि कई ऐसे सकारात्मक संकेत थे जिन्होंने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया और बाजार को ऊपर ले जाने में अहम भूमिका निभाई.
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सेंसेक्स-निफ्टी में दमदार शुरुआत
खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स करीब 0.8 फीसदी की बढ़त के साथ 78,734 के आसपास कारोबार कर रहा था. वहीं, निफ्टी भी करीब 0.87 फीसदी मजबूत होकर 24,590 के स्तर पर पहुंच गया. पूरे बाजार का माहौल सकारात्मक नजर आया और निवेशकों ने कई सेक्टर्स में खरीदारी दिखाई.
अगर सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो PSU बैंक, सीमेंट, आईटी और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली. दूसरी तरफ मीडिया सेक्टर ऐसा रहा, जहां दबाव बना रहा और कारोबार लाल निशान में होता दिखाई दिया.
कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट बनी सबसे बड़ा ट्रिगर
बाजार की तेजी की सबसे अहम वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट रही. ब्रेंट क्रूड करीब 5 फीसदी गिरकर 84 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया.
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है. ऐसे में जब कच्चा तेल सस्ता होता है तो देश का आयात बिल कम होने की संभावना बढ़ती है. इससे महंगाई पर दबाव घट सकता है और कंपनियों की लागत में भी राहत मिल सकती है. यही वजह है कि तेल की कीमतों में गिरावट को भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है.
विदेशी निवेशकों की वापसी से बढ़ा भरोसा
बाजार को मजबूती देने वाला दूसरा बड़ा कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI की खरीदारी रही. जुलाई महीने के दौरान विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 20 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया.
मार्केट एक्सपर्ट वी.के. विजयकुमार के मुताबिक, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में बढ़ती अस्थिरता और जोखिम के कारण विदेशी निवेशक अब भारत जैसे अपेक्षाकृत स्थिर बाजारों की तरफ रुख कर रहे हैं. इसके अलावा भारतीय रुपये की स्थिरता और बड़े भारतीय शेयरों का आकर्षक वैल्यूएशन भी विदेशी निवेशकों को निवेश के लिए आकर्षित कर रहा है.
दिलचस्प बात यह भी है कि विदेशी निवेशक अब केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं हैं. वे मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेश बढ़ा रहे हैं क्योंकि इन कंपनियों में उन्हें बेहतर ग्रोथ की संभावना दिखाई दे रही है.
वैश्विक तनाव कम होने से निवेशकों का बढ़ा भरोसा
बाजार को सपोर्ट देने वाली तीसरी बड़ी वजह दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव का कम होना रहा. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए कि ईरान के साथ बातचीत फिर शुरू हो सकती है.
इससे निवेशकों के बीच यह उम्मीद बनी कि पश्चिम एशिया में तनाव और युद्ध का खतरा फिलहाल कम हो सकता है. जब वैश्विक स्तर पर तनाव घटता है तो निवेशकों का जोखिम उठाने का भरोसा बढ़ता है. यही कारण है कि इसका सकारात्मक असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला.
ग्लोबल मार्केट से मिले मजबूत संकेत
भारतीय बाजार को विदेशी बाजारों से भी अच्छा समर्थन मिला. एशियाई बाजारों में अच्छी तेजी देखने को मिली, जबकि शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाजार मजबूती के साथ बंद हुए थे. इसके अलावा वॉल स्ट्रीट फ्यूचर्स भी हरे निशान में कारोबार कर रहे थे.
दुनिया के बड़े बाजारों में सकारात्मक माहौल बनने पर उसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिलता है और सोमवार को भी यही तस्वीर दिखाई दी.
रुपये की मजबूती भी बनी सहारा
सोमवार को रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 31 पैसे मजबूत होकर 95.12 के स्तर तक पहुंच गया. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, डॉलर की कमजोरी, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और आरबीआई के समर्थन ने रुपये को मजबूती दी.
मजबूत रुपया आमतौर पर विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ाता है. साथ ही आयात पर निर्भर कंपनियों के लिए भी यह राहत का संकेत माना जाता है.
कंपनियों के अच्छे नतीजों ने बढ़ाया उत्साह
जून तिमाही के नतीजों ने भी बाजार की तेजी को मजबूती दी. कई कंपनियों का प्रदर्शन निवेशकों की उम्मीद से बेहतर रहा.
आईटीसी के शेयरों में करीब 4 फीसदी की तेजी देखने को मिली. अर्बन कंपनी के शेयर शानदार तिमाही नतीजों के बाद करीब 16 फीसदी तक उछल गए. Divi's Laboratories के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली. वहीं बजाज फाइनेंस और बजाज फिनसर्व के मजबूत नतीजों ने बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में भी तेजी बनाए रखने में मदद की.
इन सकारात्मक नतीजों ने निवेशकों का भरोसा और मजबूत किया और बाजार को अतिरिक्त सपोर्ट मिला.
अब बाजार के लिए कौन-सा स्तर अहम
आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर निफ्टी के 24,600 के स्तर पर रहेगी. बाजार विशेषज्ञ इसे एक अहम रेजिस्टेंस मान रहे हैं.
अगर निफ्टी इस स्तर को मजबूती से पार करने में सफल रहता है तो इसके बाद 24,800 तक बढ़ने की संभावना बन सकती है. वहीं अगर ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली देखने को मिलती है तो 24,100 के आसपास बाजार को मजबूत सपोर्ट मिल सकता है.
आगे क्या देखना होगा
फिलहाल बाजार के पक्ष में कई सकारात्मक संकेत एक साथ दिखाई दे रहे हैं. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, विदेशी निवेशकों की वापसी, रुपये की मजबूती, वैश्विक तनाव में कमी, अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले मजबूत संकेत और कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों ने मिलकर बाजार का माहौल बेहतर बनाया है.
अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या ये सकारात्मक संकेत बाजार को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सफल होंगे या फिर ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली तेजी की रफ्तार को कुछ समय के लिए धीमा कर देगी. आने वाले कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजार की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.
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