शेयर बाजार में लगातार दो दिन की गिरावट के बाद शुक्रवार को जोरदार खरीदारी देखने को मिली. Sensex करीब 900 अंक तक उछल गया, जबकि Nifty 50 फिर से 22,500 के पार पहुंच गया. इस तेजी में IT शेयरों ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई. TCS, Infosys और HCL Tech जैसे बड़े शेयरों में खरीदारी से बाजार को सहारा मिला. इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, रुपये में मजबूती और अमेरिका-ईरान तनाव कम होने की उम्मीद ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया.
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लेकिन सवाल है कि बाजार में अचानक आई इस तेजी की वजह क्या है और क्या यह तेजी आगे भी जारी रह सकती है?
1. TCS के नतीजों से IT शेयरों को मिला सहारा
शुक्रवार को IT शेयरों में अच्छी खरीदारी हुई. TCS के शेयर करीब 5 से 6 फीसदी तक चढ़े, जबकि Nifty IT इंडेक्स में 3 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई. Mphasis, LTIMindtree, Coforge और Persistent Systems जैसे शेयर भी बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे.
इस तेजी की बड़ी वजह TCS के सितंबर तिमाही के नतीजे रहे. कंपनी ने 13,884 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 15 फीसदी ज्यादा है. कंपनी की कुल कमाई में AI से जुड़े कारोबार का योगदान भी 10 फीसदी से ऊपर पहुंच गया है.
यह ऐसे समय में अहम है, जब निवेशक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पारंपरिक IT कंपनियों के कारोबार को किस तरह प्रभावित करेगा. TCS के नतीजे बताते हैं कि AI कंपनियों के लिए चुनौती होने के साथ-साथ कमाई का नया जरिया भी बन सकता है.
2. अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल में नरमी
बाजार को सहारा देने वाली दूसरी बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीद रही. अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनावों से पहले ईरान पर हमला नहीं करने की बात कही. इससे निवेशकों को फिलहाल सैन्य कार्रवाई टलने की उम्मीद मिली.
इसके साथ ही Brent Crude करीब 1 फीसदी गिरकर 103 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है. ऐसे में कच्चा तेल सस्ता होने से देश के आयात बिल और महंगाई पर दबाव कम हो सकता है. तेल की कीमतों में गिरावट रुपये के लिए भी राहत दे सकती है.
हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. इसलिए तेल की कीमतों में आगे होने वाले बदलाव पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी.
3. रुपये में मजबूती और ग्लोबल संकेतों से राहत
शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले रुपया शुरुआती कारोबार में 23 पैसे मजबूत होकर 96.65 के स्तर पर पहुंच गया. डॉलर में नरमी और भारतीय रिजर्व बैंक के संभावित हस्तक्षेप को इसकी वजह माना गया. रुपये की मजबूती ने भी बाजार के माहौल को बेहतर बनाने में मदद की.
इसके अलावा, एशियाई बाजारों में तेजी और अमेरिकी शेयर बाजार के वायदा कारोबार में बढ़त से भी भारतीय बाजार को सहारा मिला. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में थोड़ी नरमी ने भी निवेशकों को राहत दी.
एक और वजह बड़ी गिरावट के बाद निचले स्तरों पर हुई खरीदारी रही. पिछली बिकवाली के दौरान Sensex करीब 32 महीने और Nifty 18 महीने के निचले स्तर तक पहुंच गए थे. इसके बाद कुछ निवेशकों ने कम कीमत पर शेयर खरीदने का मौका देखा. India VIX में करीब 4 फीसदी की गिरावट भी बाजार में घबराहट कुछ कम होने का संकेत देती है.
क्या बाजार की तेजी आगे भी टिकेगी?
एक दिन की तेजी को गिरावट खत्म होने का संकेत मानना जल्दबाजी होगी. महंगा कच्चा तेल, ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की बिकवाली अब भी बाजार के लिए चुनौती बने हुए हैं.
तकनीकी स्तर पर Nifty के लिए 22,000 से 22,200 का दायरा अहम सहारा माना जा रहा है. वहीं, 22,800 के ऊपर मजबूती से बंद होने पर बाजार की रिकवरी को और बल मिल सकता है. इसके उलट, 22,000 के नीचे फिसलने पर गिरावट बढ़ने का जोखिम रहेगा.
फिलहाल बाजार की आगे की चाल इस बात पर निर्भर करेगी कि IT शेयरों में खरीदारी बनी रहती है या नहीं, कच्चे तेल की कीमतें किस दिशा में जाती हैं और विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कितनी कमी आती है.
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