Share Market: 8 लाख करोड़ की चोट के बाद बाजार की वापसी, निफ्टी फिर 24,000 के पार

चिराग ठाकुर

• 12:26 PM • 09 Jul 2026

भारी गिरावट के अगले ही दिन शेयर बाजार ने दमदार वापसी की. सेंसेक्स 600 अंक से ज्यादा चढ़ा और निफ्टी 24,000 के ऊपर लौटा. जानिए इस राहत वाली तेजी की पांच बड़ी वजहें.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

इंडिया VIX में नौ फीसदी से ज्यादा गिरावट से डर घटा

ट्रंप के नरम बयान से मिडिल ईस्ट तनाव पर चिंता थोड़ी घटी

ब्रेंट करीब 79 डॉलर रहा, इसलिए तेल झटका फिलहाल सीमित दिखा

एक दिन पहले तक शेयर बाजार में घबराहट का माहौल था. निवेशकों की करीब 8 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति बाजार की गिरावट में साफ हो गई थी. लेकिन गुरुवार को तस्वीर पूरी तरह बदल गई. बाजार खुलते ही खरीदारी लौट आई और प्रमुख सूचकांक मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए. सेंसेक्स 600 अंकों से ज्यादा चढ़ गया, जबकि निफ्टी एक बार फिर 24,000 के स्तर के ऊपर पहुंच गया. बाजार में आई इस तेजी ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि आखिर कुछ ही घंटों में ऐसा क्या बदल गया कि निवेशकों का मूड डर से भरोसे की ओर मुड़ गया. आगे समझते हैं कि बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजहें क्या रहीं और आगे निवेशकों को किन संकेतों पर नजर रखनी चाहिए.

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बाजार ने दिखाई मजबूत रिकवरी

गुरुवार को कारोबार शुरू होते ही खरीदारी का माहौल देखने को मिला. सेंसेक्स करीब 635 अंक की बढ़त के साथ 77,100 के ऊपर पहुंच गया, जबकि निफ्टी करीब 195 अंक चढ़कर 24,000 के पार निकल गया. खबर लिखे जाने तक निफ्टी लगभग 0.75 फीसदी की तेजी के साथ 24,060 के आसपास कारोबार कर रहा था. वहीं सेंसेक्स भी करीब इतनी ही बढ़त के साथ 77,096 के स्तर पर पहुंच गया. सिर्फ लार्जकैप शेयरों में ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली. यानी तेजी पूरे बाजार में फैली हुई थी, न कि केवल चुनिंदा शेयरों तक सीमित रही.

निवेशकों का डर हुआ कम

बाजार में घबराहट का स्तर मापने वाला इंडेक्स इंडिया VIX भी गुरुवार को नरम पड़ गया. बुधवार को जहां इसमें करीब 26 फीसदी की तेज छलांग देखने को मिली थी, वहीं अगले ही दिन इसमें 9 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई. इंडिया VIX में गिरावट का मतलब आमतौर पर यह माना जाता है कि निवेशकों के बीच अनिश्चितता और डर पहले की तुलना में कम हुआ है. यही बदलाव बाजार की तेजी में भी दिखाई दिया.

पहली वजह - ट्रंप के बदले बयान से लौटा भरोसा

बुधवार की बड़ी गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान था. उनके बयान से यह आशंका बढ़ गई थी कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर से युद्ध की स्थिति में बदल सकता है. इसी डर ने वैश्विक बाजारों के साथ भारतीय बाजार पर भी दबाव बनाया. हालांकि गुरुवार को ट्रंप का रुख पहले की तुलना में नरम दिखाई दिया. उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि युद्ध दोबारा शुरू होगा. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर ईरान की ओर से हमला होता है तो अमेरिका पहले से कहीं ज्यादा सख्त जवाब देगा. इस बयान से यह संदेश गया कि फिलहाल हालात पूरी तरह नियंत्रण से बाहर नहीं हैं. इसी वजह से निवेशकों का भरोसा कुछ हद तक वापस लौटा और बाजार में खरीदारी देखने को मिली.

दूसरी वजह - कच्चे तेल को लेकर चिंता बनी, लेकिन घबराहट नहीं

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ता है. गुरुवार को भी ब्रेंट क्रूड करीब 79 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहा.हालांकि बाजार की सोच यह रही कि 80 डॉलर के आसपास का तेल फिलहाल भारत के लिए बहुत बड़ी परेशानी नहीं है. निवेशकों की असली चिंता तब होगी, जब तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने लगें. ऐसी स्थिति तभी बन सकती है जब मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़े या फिर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्ग पर फिर से कोई बड़ा व्यवधान पैदा हो. फिलहाल फ्यूचर्स मार्केट ऐसे किसी गंभीर खतरे का संकेत नहीं दे रहा है. यही वजह रही कि बाजार ने राहत की सांस ली.

तीसरी वजह - विदेशी निवेशकों ने नहीं छोड़ा भारतीय बाजार का साथ

गुरुवार की तेजी के पीछे विदेशी निवेशकों की खरीदारी भी एक अहम वजह रही. बुधवार को बाजार में भारी गिरावट के बावजूद विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs ने भारतीय बाजार से पैसा निकालने के बजाय खरीदारी जारी रखी. उन्होंने करीब 1,963 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे. यह लगातार छठा कारोबारी दिन था जब विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार में नेट खरीदार बने रहे. आमतौर पर विदेशी निवेशकों की लगातार खरीदारी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जाती है, क्योंकि इससे यह संदेश जाता है कि बड़े वैश्विक निवेशकों का भरोसा अभी भी भारतीय बाजार पर कायम है.

चौथी वजह - ग्लोबल बाजारों से मिला सहारा

भारतीय बाजार को वैश्विक संकेतों से भी मजबूती मिली. जापान का निक्केई इंडेक्स करीब 2 फीसदी की तेजी के साथ कारोबार करता दिखा. अमेरिका का नैस्डैक भी मजबूती के साथ बंद हुआ, जबकि डाउ फ्यूचर्स हरे निशान में कारोबार कर रहे थे. हालांकि दक्षिण कोरिया का बाजार अभी भी दबाव में रहा, लेकिन बाकी प्रमुख वैश्विक संकेत बुधवार की तुलना में बेहतर रहे. इसका असर भारतीय निवेशकों की धारणा पर भी पड़ा और खरीदारी का माहौल बना.

अब रिजल्ट सीजन पर टिकी बाजार की नजर

अब बाजार का अगला बड़ा ट्रिगर कंपनियों के अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे होंगे. उम्मीद की जा रही है कि इस बार निफ्टी की कंपनियों की आय में करीब 10.6 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. वहीं मुनाफे में करीब 5.8 फीसदी की वृद्धि का अनुमान लगाया जा रहा है. हालांकि बढ़ती लागत और महंगे कच्चे माल का असर कंपनियों के मार्जिन पर अभी भी दिखाई दे सकता है. ऐसे में निवेशकों की नजर सिर्फ आय बढ़ने पर नहीं, बल्कि कंपनियों के मुनाफे और भविष्य के आउटलुक पर भी रहेगी. आईटी सेक्टर में गुरुवार को दबाव देखने को मिला. इसकी बड़ी वजह यह रही कि निवेशक टीसीएस के तिमाही नतीजों का इंतजार कर रहे हैं. अगर आईटी कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर आते हैं तो बाजार को नई मजबूती मिल सकती है.

किन शेयरों ने संभाला बाजार

दिन के कारोबार में भारती एयरटेल, सन फार्मा और इटरनल जैसे शेयरों में करीब 3 फीसदी तक की तेजी देखने को मिली. इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज, आईसीआईसीआई बैंक और एशियन पेंट्स ने भी बाजार को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई. दूसरी तरफ इन्फोसिस, टीसीएस और बजाज फाइनेंस जैसे शेयर दबाव में रहे. यानी बैंकिंग, फार्मा, एफएमसीजी और कंज्यूमर सेक्टर की मजबूती ने आईटी सेक्टर की कमजोरी की भरपाई कर दी.

आगे निवेशकों को किन बातों पर रखनी होगी नजर

गुरुवार की रिकवरी ने बाजार को राहत जरूर दी है, लेकिन यह कहना जल्दबाजी होगी कि अब खतरा पूरी तरह खत्म हो गया है.

आने वाले दिनों में तीन बड़े फैक्टर बाजार की दिशा तय करेंगे.

  • मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव किस दिशा में जाता है.
  • कच्चे तेल की कीमतें किस स्तर पर टिकती हैं.
  • कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार की उम्मीदों पर खरे उतरते हैं या नहीं.

तकनीकी नजरिए से भी 23,800 का स्तर अहम माना जा रहा है. अगर निफ्टी इस स्तर के ऊपर बना रहता है तो रिकवरी आगे बढ़ सकती है. वहीं इसके नीचे फिसलने पर बाजार में फिर से दबाव देखने को मिल सकता है.साथ ही अगर विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है, तेल की कीमतें नियंत्रण में रहती हैं और कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर आते हैं, तो बाजार एक बार फिर नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ने की कोशिश कर सकता है.