Gold Silver Price Update: जिस चांदी ने 2025 में निवेशकों को राजा बना दिया, जिसने सिर्फ एक साल में 160% का रिटर्न दिया, जिसे लोग ‘नया गोल्ड’ कहने लगे थे… उसी चांदी ने साल के आखिरी हफ्ते में ऐसा झटका दिया, कि बड़े-बड़े ट्रेडर्स की सांसें अटक गईं. MCX पर चांदी ₹2,54,000 से सीधे ₹2,34,000 पर आ गिरी यानी 20 हजार रुपये एक झटके में साफ हो गए. ETF टूटे, मार्जिन बढ़ा, स्टॉपलॉस उड़े, और बाजार में सिर्फ एक सवाल गूंजा क्या चांदी का खेल खत्म हो गया? या फिर ये गिरावट उस तूफान से पहले की शांति है जो चांदी को फिर नए रिकॉर्ड तक ले जाएगी?
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अगर कोई निवेश 2025 का सुपरस्टार था, तो वो थी चांदी. साल की शुरुआत से अब तक 160% से ज्यादा रिटर्न, अंतरराष्ट्रीय बाजार में $82-84 प्रति औंस का रिकॉर्ड, भारत में ₹2.5 लाख प्रति किलो का स्तर लोग कहने लगे जिसने चांदी पकड़ ली, उसने भविष्य पकड़ लिया. इसी वजह से ETF में पैसा आया, फ्यूचर्स में लीवरेज बढ़ा, और रिटेल निवेशक FOMO में अंधे होकर कूद पड़े. लेकिन यहीं से कहानी ने खतरनाक मोड़ लिया.
चांदी क्यों टूटी?
सोमवार को जब बाजार अपने हाई पर था, तभी अमेरिका से एक खामोश लेकिन घातक खबर आई. CME Group ने गोल्ड और सिल्वर पर मार्जिन बढ़ा दिया. मतलब साफ था जिन ट्रेडर्स ने कम पैसे में बड़े दांव लगाए थे अब उन्हें ज्यादा पैसा जमा करना होगा और जो पैसा नहीं लाएगा उसकी पोजिशन जबरदस्ती काट दी जाएगी. यहीं से डोमिनो इफेक्ट शुरू हुआ. मार्जिन बढ़ते ही बड़े ट्रेडर्स ने मुनाफा बुक करना शुरू किया. एल्गो ट्रेडिंग ने बिकवाली को और तेज किया स्टॉपलॉस एक-एक कर उड़ने लगे, ये गिरावट नॉर्मल नहीं थी, ये थी ब्रूटल.
ETF में भी मची तबाही
जो लोग सोच रहे थे कि ETF सुरक्षित है, उनके लिए भी झटका था. Nippon India Silver ETF, जो इस कैटेगरी का सबसे बड़ा ETF है, वो भी एक हफ्ते में 11% टूट गया. ये साफ संकेत था ये गिरावट सिर्फ ट्रेडर्स की नहीं, पूरे सिस्टम की है. अजय केडिया की माने तो CME ने गोल्ड और सिल्वर दोनों पर मार्जिन बढ़ाया है. बाजार तकनीकी तौर पर बेहद ओवरबॉट था. ऐसी प्रॉफिट बुकिंग तय थी. उन्होंने याद दिलाया अक्टूबर में भी चांदी 18% टूटी थी, सोना 13% गिरा था मतलब इतिहास खुद को दोहरा रहा है. हालांकि चांदी की चमक अभी कमजोरी नहीं पड़ी है...ये करेक्शन चांदी के लिए हेल्दी मानी जा रही है...लंबी अवधि में चांदी और चमक सकती है.
रॉबर्ट कियोसाकी का क्या है कहना?
जाने माने फाइनेंशियल लेखक रॉबर्ट कियोसाकी कहते हैं कि चांदी आने वाले सालों में 6 लाख तक का स्तर दिखा सकती है. यानी ये गिरावट नई चाल का बेस मजबूत कर रही है. अगर आप लॉन्ग टर्म निवेशक हैं तो घबराने की जरूरत नहीं, अगर आप हाई लीवरेज ट्रेडर हैं तो सावधान रहें स्टॉपलॉस, पोजिशन साइज और रिस्क मैनेजमेंट करते चलें वरना बड़ा नुकसान हो सकता है. क्योंकि इतिहास गवाह है हर बड़ा बुल रन डर के साथ ही आगे बढ़ता है, कमजोर हाथ बाहर होते हैं और मजबूत हाथ टिके रहते हैं.
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