साल 2026 की शुरुआत में चांदी ने निवेशकों को मालामाल करने की उम्मीद जगाई थी, लेकिन इसके बाद आई तेज गिरावट ने सबका गणित बिगाड़ दिया है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी अपने रिकॉर्ड ऊंचे स्तर से करीब 60 फीसदी नीचे आ चुकी है. MCX पर भी बीते एक महीने में चांदी 14% से ज्यादा टूट चुकी है और 26 अक्टूबर 2026 को इसका दिसंबर वायदा कॉन्ट्रैक्ट करीब 1.96 लाख रुपये प्रति किलो पर कारोबार कर रहा है. HSBC की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, चांदी की कीमतें अब अपने सही आर्थिक स्तर के करीब पहुंच चुकी हैं.
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चांदी में गिरावट क्यों आ रही है?
1. कच्चे तेल की तेजी और महंगा डॉलर: मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण कच्चे तेल के दाम बढ़ रहे हैं, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है. अमेरिका के केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखने की आशंका से चांदी पर दबाव है, क्योंकि चांदी पर कोई ब्याज नहीं मिलता. इसके अलावा, मजबूत डॉलर और बॉन्ड यील्ड की तेजी भी चांदी को कमजोर कर रही है.
2. औद्योगिक मांग में सुस्ती: चांदी का इस्तेमाल सिर्फ गहनों के लिए नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर पैनल जैसे कई उद्योगों में बड़े पैमाने पर होता है. उद्योगों में सुस्ती आने से इसकी मांग कमजोर पड़ी है.
3. बाजार में चांदी की उपलब्धता बढ़ना: HSBC के अनुसार, COMEX में रखा बड़ा स्टॉक लंदन बाजार में लौटने लगा है. इसके अलावा, खदानों से बढ़ता उत्पादन और पुरानी चांदी की रिसाइक्लिंग बढ़ने से बाजार में चांदी की तंगी कम हुई है, जिससे कीमतें नीचे आई हैं.
सप्लाई और मांग का समीकरण क्या कहता है?
सिल्वर इंस्टीट्यूट के सर्वे और एचएसबीसी के मॉडल के मुताबिक, बाजार में चांदी की कमी तेजी से घट रही है
- साल 2025 में वैश्विक स्तर पर लगभग 14 करोड़ औंस की कमी थी
- साल 2026 में यह कमी घटकर सिर्फ 50 लाख औंस रहने का अनुमान है
- साल 2027 में ये हल्की बढ़कर 1.2 करोड़ औंस हो सकती है
साफ है कि बाजार में चांदी की उपलब्धता पहले से बेहतर हो रही है, इसलिए कीमतों में बहुत तेज उछाल की गुंजाइश फिलहाल सीमित है.
चांदी फिर से 100 डॉलर प्रति औंस पर पहुंचेगी?
HSBC का मानना है कि नजदीकी समय में ऐसा होना मुश्किल है. बैंक को फिलहाल किसी बड़े उछाल के बजाय सीमित दायरे में ही कारोबार की उम्मीद है. हालांकि, एक राहत की बात यह है कि घबराकर बेचने वाले निवेशक काफी हद तक बाजार से बाहर निकल चुके हैं, जिससे कीमतों को एक बेस (आधार) मिल गया है और आगे बहुत बड़ी गिरावट की आशंका कम है. साल 2027 में स्थिति थोड़ी बेहतर हो सकती है, जो ग्लोबल इकोनॉमी और ब्याज दरों की चाल पर निर्भर करेगी.
निवेशकों को किन बातों पर रखनी चाहिए नजर?
अगर आप चांदी में निवेश करने की सोच रहे हैं या पहले से फंसे हैं, तो इन 5 बातों पर खास नजर रखें:
- अमेरिकी डॉलर की चाल
- फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से जुड़े फैसले
- कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें
- सोलर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों से मिलने वाली मांग
- वैश्विक स्तर पर चांदी की कुल सप्लाई और पुरानी चांदी की रिसाइक्लिंग
कुल मिलाकर, रिकॉर्ड तेजी के बाद आई बड़ी गिरावट ने चांदी की कीमतों को बुनियादी स्तरों के करीब ला दिया है. HSBC का नजरिया पूरी तरह नकारात्मक नहीं है, लेकिन बैंक फिलहाल बड़ी तेजी की उम्मीद भी नहीं कर रहा. चांदी में रिकवरी संभव है, मगर निकट भविष्य में उतार-चढ़ाव और सीमित बढ़त की संभावना ज्यादा दिखाई देती है.
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