Silver Price Crash: चांदी में भारी गिरावट, कीमत 2 लाख रुपये से नीचे, सरकार ने 6,500 टन आयात को दी मंजूरी, पूरी डिटेल

सौरभ दीक्षित

• 05:29 PM • 24 Oct 2026

चांदी की कीमतों में भारी गिरावट जारी है. 4 लाख रुपये प्रति किलो के पार पहुंचने वाली चांदी 2 लाख रुपये के स्तर से भी नीचे आ गई है. इस बीच भारत सरकार ने अगले छह महीने के लिए करीब 6,500 मीट्रिक टन चांदी के आयात को मंजूरी दी है.

NewsTak
Google CTA

Silver Price Today: चांदी की कीमतों में भारी गिरावट के बीच भारत सरकार ने अगले छह महीने के लिए करीब 6,500 मीट्रिक टन चांदी के आयात को मंजूरी दी है. इससे त्योहारों के दौरान घरेलू बाजार में चांदी की उपलब्धता बनाए रखने और ऊंचे प्रीमियम को कम करने में मदद मिल सकती है.

Read more!

चांदी की कीमतों में जारी तेज गिरावट ने निवेशकों और कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है. कभी 4 लाख रुपये प्रति किलो के पार पहुंची चांदी अब 2 लाख रुपये के स्तर से भी नीचे आ गई है. इस बीच सरकार ने चांदी के आयात को लेकर बड़ा फैसला लिया है. Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने अगले छह महीने के लिए करीब 6,500 मीट्रिक टन चांदी के आयात को मंजूरी दी है. इस फैसले को त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली मांग के बीच घरेलू बाजार में सप्लाई बनाए रखने के लिहाज से अहम माना जा रहा है.

चांदी की कीमत 2 लाख रुपये से नीचे

चांदी की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है. 23 अक्टूबर 2026 को 4 दिसंबर 2026 की डिलीवरी वाला चांदी का वायदा भाव करीब 3,400 रुपये टूटकर 1,96,100 रुपये प्रति किलो पर बंद हुआ. इससे पहले चांदी की कीमत 4 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर को पार कर चुकी थी.

कीमतों में आई इस गिरावट के बीच निवेशकों की नजर अब सरकार के आयात संबंधी फैसले और अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुख पर है. हालांकि, चांदी के आयात को मंजूरी मिलने से कीमतों में कितनी राहत मिलेगी, यह आने वाले दिनों में सप्लाई, मांग और वैश्विक भाव पर निर्भर करेगा.

सरकार ने 6,500 टन चांदी के आयात को दी मंजूरी

Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने अगले छह महीने के लिए करीब 6,500 मीट्रिक टन चांदी के आयात को मंजूरी दी है. रिपोर्ट में चार बुलियन कारोबारियों के हवाले से बताया गया है कि इस फैसले से त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने पर बाजार में चांदी की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिल सकती है.

बुलियन कारोबार में सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं की बड़े स्तर पर खरीद-बिक्री होती है. भारत दुनिया के बड़े चांदी उपभोक्ताओं में शामिल है और अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा हिस्सा आयात करता है. ऐसे में विदेशों से आने वाली चांदी की मात्रा घरेलू बाजार की सप्लाई पर बड़ा असर डालती है.

अगर आयात में रुकावट आती है, तो बाजार में चांदी की उपलब्धता घट सकती है. वहीं, आयात की प्रक्रिया आसान होने और सप्लाई बढ़ने से कारोबारियों को मांग पूरी करने में मदद मिल सकती है.

भारत में अंतरराष्ट्रीय भाव से महंगी क्यों बिकती है चांदी?

चांदी की कीमतों को समझने के लिए घरेलू बाजार में मिलने वाले प्रीमियम को जानना जरूरी है. जब भारत में चांदी की मांग के मुकाबले सप्लाई कम होती है, तो घरेलू बाजार में इसका भाव अंतरराष्ट्रीय कीमत से ऊपर जा सकता है. अंतरराष्ट्रीय भाव के मुकाबले चुकाई जाने वाली इस अतिरिक्त रकम को प्रीमियम कहा जाता है.

कारोबारियों के मुताबिक, हाल ही में भारत में चांदी का प्रीमियम बढ़कर कुछ समय के लिए 2.50 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया था. हालांकि, गुरुवार को यह घटकर 45 सेंट प्रति औंस रह गया.

इसका मतलब है कि अंतरराष्ट्रीय कीमत के मुकाबले भारतीय बाजार में चांदी खरीदने के लिए दी जाने वाली अतिरिक्त रकम कम हुई है. अगर आयात की मंजूरी से घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ती है, तो प्रीमियम पर और दबाव आ सकता है.

हालांकि, प्रीमियम घटने और चांदी की कुल कीमत घटने में अंतर है. चांदी का घरेलू भाव अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमत, रुपये और डॉलर की विनिमय दर, आयात शुल्क और घरेलू मांग जैसे कई कारकों से प्रभावित होता है.

चांदी के आयात पर पहले भी लगी थीं पाबंदियां

सरकार ने मई के मध्य में चांदी के लगभग सभी रूपों के आयात पर प्रतिबंध लगाए थे. इसके बाद जून में चांदी के दाने और पाउडर को भी प्रतिबंधित श्रेणी में शामिल कर दिया गया. इन उत्पादों के आयात के लिए पहले से सरकारी अनुमति लेना जरूरी कर दिया गया था.

ऐसे में चांदी के आयात की प्रक्रिया कुछ श्रेणियों के लिए सामान्य नहीं रह गई थी. अब अगले छह महीने के लिए करीब 6,500 मीट्रिक टन चांदी के आयात की मंजूरी से कारोबारियों को सप्लाई की योजना बनाने और त्योहारों के दौरान मांग पूरी करने में मदद मिल सकती है.

हालांकि, आयात की मंजूरी मिलने का यह मतलब नहीं है कि पूरी मात्रा एक साथ भारत पहुंच जाएगी. वास्तविक आयात इस बात पर निर्भर करेगा कि कारोबारी कितनी चांदी मंगाते हैं और उसकी सप्लाई कब तक होती है.

क्या अब सस्ती होगी चांदी?

सरकार के इस फैसले से घरेलू बाजार में चांदी की उपलब्धता बेहतर हो सकती है. सप्लाई बढ़ने पर अंतरराष्ट्रीय कीमत के ऊपर लगने वाला प्रीमियम कम होने की संभावना भी रहती है. लेकिन सिर्फ आयात की मंजूरी के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट आएगी.

चांदी के भाव पर अंतरराष्ट्रीय बाजार की चाल, औद्योगिक और निवेश मांग, रुपये की स्थिति और आयात शुल्क का भी असर पड़ता है. इसलिए कीमतों में आगे तेजी आएगी या गिरावट जारी रहेगी, यह कई कारकों पर निर्भर करेगा.

कुल मिलाकर, चांदी की कीमत 2 लाख रुपये प्रति किलो से नीचे आने के बीच सरकार ने अगले छह महीने के लिए करीब 6,500 मीट्रिक टन चांदी के आयात को मंजूरी दी है. इस कदम से घरेलू बाजार में सप्लाई बनाए रखने में मदद मिल सकती है. हालांकि, चांदी खरीदने या निवेश का फैसला करने से पहले कीमतों में उतार-चढ़ाव और अपने जोखिम को ध्यान में रखना जरूरी है.