चांदी में आई तबाही, ₹2 लाख से ज्यादा हुई सस्ती, क्या अब और गिरेगा भाव? जानें निवेशकों को क्या करना चाहिए !

चिराग ठाकुर

• 04:24 PM • 22 Oct 2026

चांदी एमसीएक्स पर रिकॉर्ड हाई से 2.17 लाख रुपये प्रति किलो टूट चुकी है. जानें अब तेल, डॉलर और अमेरिकी ब्याज दरें कीमतों पर आगे क्या बड़ा असर डाल सकती हैं.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

गुरुवार को वायदा भाव खुलते ही 5,728 रुपये प्रति किलो फिसला

अंतरराष्ट्रीय बाजार में जनवरी के शिखर से करीब 54 फीसदी कमजोरी आई

महंगा कच्चा तेल महंगाई और ऊंची ब्याज दरों का डर बढ़ा रहा

जिस चांदी ने जनवरी 2026 में रिकॉर्ड ऊंचाई छूकर निवेशकों को चौंका दिया था, वही अब भारी गिरावट के दौर से गुजर रही है. घरेलू वायदा बाजार में चांदी अपने रिकॉर्ड स्तर से करीब 2.17 लाख रुपये प्रति किलो टूट चुकी है. गिरावट के बीच अब सवाल यह है कि क्या कीमतों में सुधार की गुंजाइश है या निवेशकों को अभी और नुकसान के लिए तैयार रहना चाहिए.

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29 जनवरी को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी का भाव 4,20,048 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया था. लेकिन गुरुवार को 4 दिसंबर एक्सपायरी वाला चांदी वायदा गिरकर 2,03,450 रुपये प्रति किलो पर आ गया. पिछले कारोबारी सत्र में इसका भाव 2,09,168 रुपये पर बंद हुआ था. इस तरह एक कारोबारी सत्र में करीब 5,728 रुपये प्रति किलो की गिरावट आई.

रिकॉर्ड हाई से आधे से भी नीचे पहुंची चांदी

जनवरी के शिखर से तुलना करें, तो चांदी की कीमत में करीब 52 फीसदी की गिरावट आ चुकी है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी अपने जनवरी के रिकॉर्ड स्तर, करीब 121 डॉलर प्रति औंस, से लगभग 54 फीसदी नीचे आ गई है. यानी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय, दोनों बाजारों में तेजी का रुख कमजोर पड़ा है.

हालांकि, इतनी बड़ी गिरावट के बाद भी यह मान लेना सही नहीं होगा कि चांदी अब सस्ती हो गई है. आगे की दिशा तय करने में वैश्विक आर्थिक हालात और निवेशकों की धारणा अहम भूमिका निभाएंगे.

चांदी की कीमतों पर दबाव क्यों बढ़ रहा है?

चांदी में गिरावट की एक बड़ी वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से जुड़ी महंगाई की चिंता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंचने से उत्पादन और परिवहन की लागत बढ़ने का खतरा है. इससे महंगाई पर काबू पाने की चुनौती बढ़ सकती है.

महंगाई लंबे समय तक ऊंची रहने की आशंका अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदों को प्रभावित करती है. अगर ब्याज दरें ऊंची बनी रहती हैं, तो ब्याज नहीं देने वाली कीमती धातुओं में निवेश का आकर्षण कम हो सकता है. मजबूत डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी भी चांदी की कीमतों पर दबाव बढ़ा सकती है.

इस तरह चांदी के सामने फिलहाल कई चुनौतियां हैं.

बड़े संस्थानों ने भी घटाए कीमतों के अनुमान

बाजार की अनिश्चितता के बीच वित्तीय संस्थानों के पूर्वानुमान भी चर्चा में हैं.

  • JPMorgan: वर्ष 2026 में चांदी की औसत कीमत का अनुमान 84 डॉलर से घटाकर 70 डॉलर प्रति औंस किया.

  • चौथी तिमाही का अनुमान: बैंक के मुताबिक, इस दौरान औसत कीमत 63 डॉलर प्रति औंस रह सकती है.

  • Bloomberg Intelligence: कमोडिटी रणनीतिकार माइक मैकग्लोन ने कीमत 50 डॉलर प्रति औंस तक गिरने की आशंका जताई है.

ध्यान रहे कि ये अनुमान हैं, कीमतों की गारंटी नहीं. आर्थिक हालात, औद्योगिक मांग और निवेशकों की खरीदारी में बदलाव आने पर चांदी का रुख पलट भी सकता है.

आगे चांदी की चाल किन बातों पर निर्भर करेगी?

निवेशकों को खास तौर पर तीन संकेतों पर नजर रखनी चाहिए.

  1. कच्चे तेल की कीमतें: तेल महंगा रहने पर महंगाई की चिंता बढ़ सकती है. कीमतें घटने पर दबाव कम हो सकता है.

  2. अमेरिकी महंगाई और ब्याज दरें: महंगाई के आंकड़े और फेड का रुख चांदी की मांग को प्रभावित कर सकते हैं.

  3. डॉलर और बॉन्ड यील्ड: डॉलर और यील्ड में तेजी आम तौर पर चांदी जैसी धातुओं के लिए चुनौती बन सकती है.

क्या अभी चांदी खरीदने का मौका है?

चांदी का रिकॉर्ड हाई से काफी नीचे आ जाना अपने आप में खरीदारी का संकेत नहीं है. कीमतों में और गिरावट संभव है, हालांकि बाजार का रुख बदलने पर तेज रिकवरी भी देखने को मिल सकती है.

लंबी अवधि के निवेशक अपनी जोखिम उठाने की क्षमता और पोर्टफोलियो में चांदी की हिस्सेदारी देखकर फैसला कर सकते हैं. एकमुश्त बड़ी रकम लगाने के बजाय चरणबद्ध निवेश पर विचार किया जा सकता है, लेकिन इसमें भी नुकसान का जोखिम बना रहता है.

फिलहाल चांदी की अगली दिशा काफी हद तक कच्चे तेल, अमेरिकी ब्याज दरों, डॉलर और औद्योगिक मांग पर निर्भर करेगी. इसलिए सिर्फ पिछली ऊंचाई से कीमत गिरने के आधार पर निवेश का फैसला करना जल्दबाजी हो सकती है.