एक झटके में करोड़पति बना देगा 12-12-25 का ये फॉर्मूला, समझ लीजिए पूरा कैलकुलेशन!

सौरभ दीक्षित

• 07:39 PM • 18 Jul 2026

कम सैलरी में भी बड़ी पूंजी बन सकती है. 12-12-25 एसआईपी तरीके से समझिए लंबे समय का असर, कंपाउंडिंग की ताकत और निवेश से पहले जरूरी सावधानियां.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

नियमित निवेश में समय और अनुशासन सबसे अहम भूमिका निभाते हैं

कंपाउंडिंग लंबे समय में छोटी मासिक रकम को तेजी से बढ़ाती है

12 प्रतिशत रिटर्न तय नहीं, बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर है

कम कमाई होने का मतलब यह नहीं है कि आप बड़ा फंड नहीं बना सकते. लंबे समय तक नियमित निवेश करने पर छोटी रकम भी समय के साथ काफी बढ़ सकती है. यही बात एसआईपी के 12-12-25 तरीके में समझाई गई है.

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फायदे के फंड शो में बताया गया कि करोड़पति बनने के लिए बहुत ज्यादा तनख्वाह से ज्यादा जरूरी समय, अनुशासन और कंपाउंडिंग की ताकत है. अगर कोई व्यक्ति हर महीने तय रकम लगाता रहे, तो लंबे समय में 2 करोड़ रुपये से ज्यादा का फंड बन सकता है.

क्या है 12-12-25 तरीका

इस तरीके का हिसाब आसान है और इसमें 3 बातें शामिल हैं.

• हर महीने 12,000 रुपये की एसआईपी.

• सालाना 12 प्रतिशत का अनुमानित औसत रिटर्न.

• लगातार 25 साल तक निवेश.

कैसे बन सकता है 2 करोड़ रुपये से ज्यादा का फंड

अगर कोई निवेशक हर महीने 12,000 रुपये लगाता है, तो 1 साल में उसका कुल निवेश 1 लाख 44 हजार रुपये होगा. इसी तरह 25 साल में वह अपनी जेब से कुल 36 लाख रुपये निवेश करेगा.

शो में दिए गए हिसाब के मुताबिक, अगर इस पूरे समय में औसतन 12 प्रतिशत सालाना रिटर्न मिलता है, तो कंपाउंडिंग की वजह से यही रकम बढ़कर करीब 2 करोड़ 28 लाख रुपये हो सकती है. यानी कुल 36 लाख रुपये के निवेश से 2 करोड़ रुपये से ज्यादा का फंड तैयार हो सकता है.

यह बात ध्यान रखना जरूरी है

यह 2 करोड़ रुपये मिलने की गारंटी नहीं है. 12 प्रतिशत कोई तय ब्याज नहीं है, बल्कि यह सिर्फ अनुमानित औसत रिटर्न है. लंबे समय में कई अच्छी इक्विटी म्यूचुअल फंड योजनाओं ने करीब 12 से 15 प्रतिशत तक रिटर्न दिया है, लेकिन शेयर बाजार में कमाई हमेशा एक जैसी नहीं रहती. आगे कितना रिटर्न मिलेगा, यह पहले से तय नहीं होता.

किसके लिए काम आ सकता है यह तरीका

रिटायरमेंट, बच्चों की पढ़ाई या घर खरीदने जैसे बड़े लक्ष्यों के लिए एसआईपी एक अच्छा विकल्प हो सकती है. हालांकि निवेश शुरू करने से पहले अपनी आय, खर्च, जोखिम उठाने की क्षमता और अपने पैसों से जुड़े लक्ष्य साफ समझना जरूरी है. जरूरत हो तो किसी योग्य सलाहकार से बात की जा सकती है.

कुल मिलाकर, इस तरीके का सबसे बड़ा संदेश यही है कि बड़ा फंड बनाने के लिए शॉर्टकट नहीं, बल्कि समय पर शुरुआत और नियमित निवेश जरूरी है. सही योजना के साथ छोटी मासिक रकम भी लंबे समय में बड़ी पूंजी में बदल सकती है.