कोरिया के शेयर बाजार में मचा हाहाकार, KOSPI 5% टूटा, Samsung और SK Hynix में भारी बिकवाली से बढ़ी चिंता

तनीषा त्यागी

• 12:46 PM • 20 Oct 2026

दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में मंगलवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली. KOSPI करीब 5% टूट गया, जबकि Samsung Electronics और SK Hynix के शेयरों पर भी दबाव रहा. AI कंपनियों के भारी खर्च, कमाई की संभावनाओं और महंगी वैल्युएशन को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ी है. जानिए इस बिकवाली के पीछे की बड़ी वजहें.

The trigger came as the KOSPI extended its losing streak to seven consecutive sessions, marking its longest run of losses since September 2024.
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दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को भविष्य की सबसे बड़ी कारोबारी संभावनाओं में गिना जा रहा है. कंपनियां AI चिप, डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ाने के लिए अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं. लेकिन अब इसी तेजी के बीच निवेशकों के मन में एक बड़ा सवाल उठने लगा है. क्या AI पर हो रहा भारी निवेश आने वाले समय में कंपनियों को उम्मीद के मुताबिक मुनाफा दे पाएगा? इसी चिंता का असर दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में देखने को मिला, जहां मंगलवार को प्रमुख इंडेक्स KOSPI करीब 5% तक टूट गया. इस गिरावट के दौरान Samsung Electronics और SK Hynix जैसे बड़े सेमीकंडक्टर शेयरों पर भी दबाव रहा. आखिर AI सेक्टर को लेकर निवेशकों की चिंता क्यों बढ़ रही है और इसका असर शेयर बाजार पर कैसे पड़ रहा है, आइए समझते हैं.

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KOSPI में 5% की गिरावट, Samsung और SK Hynix पर दबाव

दक्षिण कोरिया का शेयर बाजार AI और सेमीकंडक्टर कंपनियों के प्रदर्शन से काफी प्रभावित होता है. Samsung Electronics और SK Hynix देश की दो बड़ी कंपनियां हैं, जिनकी हिस्सेदारी KOSPI इंडेक्स में काफी अहम है. दी गई जानकारी के मुताबिक, मई में इन दोनों कंपनियों का संयुक्त भार इंडेक्स में करीब 44% था. ऐसे में जब इन कंपनियों के शेयरों में बड़ी बिकवाली होती है, तो उसका असर पूरे बाजार पर दिखाई देता है. मंगलवार को KOSPI में करीब 5% की गिरावट इसी दबाव को दिखाती है. AI चिप बनाने वाली प्रमुख कंपनी SK Hynix के शेयर अप्रैल के बाद के सबसे निचले स्तर की ओर बढ़े, जबकि Samsung Electronics के शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली. इसके अलावा, डेटा सेंटर से जुड़ी कंपनी Elice के शेयरों में कारोबार के पहले ही दिन करीब 32% तक की गिरावट दर्ज की गई. इससे संकेत मिलता है कि निवेशक अब AI से जुड़ी कंपनियों के भविष्य और उनके कारोबार की संभावनाओं को लेकर ज्यादा सतर्क हो रहे हैं.

AI कंपनियों के भारी खर्च ने क्यों बढ़ाई चिंता?

AI सेक्टर में पिछले कुछ समय से तेजी की बड़ी वजह भविष्य में बढ़ने वाली मांग की उम्मीद रही है. कंपनियां AI मॉडल तैयार करने, चिप खरीदने और डेटा सेंटर बनाने पर बड़ी रकम खर्च कर रही हैं. लेकिन अब निवेशक यह समझना चाहते हैं कि इस निवेश से वास्तव में कितनी कमाई होगी. AI के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा तैयार करना काफी महंगा है. इसमें महंगे सेमीकंडक्टर, कंप्यूटिंग सिस्टम, डेटा सेंटर और बिजली जैसी जरूरतें शामिल हैं. कंपनियों को इन सभी पर खर्च करने के बाद इतना मुनाफा कमाना होगा कि उनका निवेश सही साबित हो सके. यही वजह है कि AI सेक्टर में सिर्फ भविष्य की संभावनाओं के आधार पर निवेश करने के बजाय अब कंपनियों की वास्तविक कमाई और वित्तीय स्थिति पर भी ध्यान दिया जा रहा है. दी गई जानकारी के मुताबिक, पिछले सप्ताह दुनिया की 20 बड़ी AI और सेमीकंडक्टर कंपनियों की कुल मार्केट वैल्यू में 1 लाख करोड़ डॉलर से ज्यादा की कमी आई. इस घटनाक्रम ने निवेशकों की चिंता को और बढ़ाया है.

रिकॉर्ड तेजी के बाद KOSPI में बड़ी गिरावट

दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार ने 2026 में जबरदस्त तेजी देखी थी. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जून में KOSPI की बढ़त अपने रिकॉर्ड स्तर पर करीब 116% तक पहुंच गई थी. लेकिन इसके बाद लगातार बिकवाली ने बाजार की तेजी का बड़ा हिस्सा खत्म कर दिया. रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, इंडेक्स अपने 9,386 के शिखर से 40% से ज्यादा नीचे आ चुका है. इतनी बड़ी गिरावट के बावजूद साल के दौरान इसकी बढ़त करीब 30% बताई गई है. यह बदलाव बताता है कि बाजार में तेजी के दौरान निवेशकों ने AI और सेमीकंडक्टर कंपनियों से काफी उम्मीदें लगा रखी थीं. अब जब कंपनियों के खर्च और भविष्य में होने वाली कमाई पर सवाल उठ रहे हैं, तो शेयरों की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है. हालांकि, किसी इंडेक्स में गिरावट का मतलब यह नहीं है कि उससे जुड़ी सभी कंपनियों का कारोबार खराब हो गया है. शेयरों की कीमतें भविष्य की कमाई को लेकर निवेशकों की उम्मीदों में बदलाव से भी प्रभावित होती हैं.

OpenAI के रेवेन्यू आंकड़ों ने भी बढ़ाई चर्चा

AI कंपनियों की कमाई को लेकर उठ रहे सवालों के बीच OpenAI के रेवेन्यू से जुड़े आंकड़े भी चर्चा में रहे. दी गई जानकारी में Reuters की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया है कि OpenAI ने निवेशकों को सितंबर में अपनी सालाना आधार पर अनुमानित रेवेन्यू रन रेट करीब 50 अरब डॉलर बताई थी. वहीं, इससे पहले एक अलग कार्यक्रम में सितंबर के लिए करीब 70 अरब डॉलर के स्तर के आसपास का आंकड़ा बताया गया था. दोनों आंकड़ों में अंतर सामने आने के बाद निवेशकों के बीच AI कारोबार की कमाई को लेकर चर्चा बढ़ी. हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस अंतर का संबंध मुख्य रूप से प्रतिस्पर्धी कंपनी Anthropic के आंकड़ों से सीधी तुलना करने की कोशिश से था. इसलिए इसे OpenAI की कमाई में गिरावट का सीधा प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए. इस पूरे घटनाक्रम से यह जरूर स्पष्ट होता है कि निवेशक AI कंपनियों के कारोबार को लेकर ज्यादा बारीकी से आंकड़ों का विश्लेषण कर रहे हैं. अब केवल तेजी से बढ़ते AI बाजार का हिस्सा होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि कंपनियों को अपनी कमाई की संभावनाओं को भी साबित करना होगा.

AI सेक्टर के सामने अब पूंजी जुटाने की चुनौती

AI कंपनियों के सामने एक बड़ी चुनौती उनके विस्तार पर होने वाला भारी खर्च भी है. डेटा सेंटर और चिप से जुड़ा बुनियादी ढांचा तैयार करने के लिए बड़े निवेश की जरूरत होती है. अगर कंपनियां कर्ज लेकर इस विस्तार को आगे बढ़ाती हैं, तो उन्हें ब्याज और दूसरी वित्तीय लागतों का भी ध्यान रखना पड़ता है. दी गई जानकारी के अनुसार, Broadcom के CEO Hock Tan ने AI सेक्टर की अगली चुनौती के तौर पर पूंजी जुटाने की लागत का जिक्र किया है. Intel के CEO Lip-Bu Tan ने भी बढ़ती पूंजी लागत और निवेश पर पर्याप्त रिटर्न मिलने की जरूरत पर जोर दिया है. इसका मतलब है कि AI कंपनियों के लिए केवल नई तकनीक विकसित करना या डेटा सेंटर बनाना ही काफी नहीं होगा. उन्हें यह भी दिखाना होगा कि इस पर खर्च की गई रकम से भविष्य में कितना मुनाफा मिल सकता है. अगर निवेश की लागत बढ़ती है और कमाई उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ती, तो कंपनियों की वित्तीय स्थिति और उनके शेयरों की वैल्यूएशन पर दबाव पड़ सकता है.

क्या AI शेयरों की तेजी अब धीमी पड़ सकती है?

AI कंपनियों के शेयरों में आई तेजी के बाद अब उनकी वैल्यूएशन पर भी सवाल उठ रहे हैं. दी गई जानकारी के मुताबिक, Jefferies की रिपोर्ट में वैश्विक AI शेयरों की कमाई में वृद्धि दर 2026 में करीब 100% से घटकर 2027 में 30% और 2028 में 22% रहने का अनुमान जताया गया है. इसके मुकाबले AI सेक्टर को छोड़कर बाकी वैश्विक शेयरों की कमाई में वृद्धि 2026 में 16% रहने और 2027 तथा 2028 में करीब 9% तक आने का अनुमान है. वैल्युएशन के मामले में भी अंतर दिखाई देता है. रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक AI शेयरों का औसत फॉरवर्ड प्राइस-टू-अर्निंग यानी Forward P/E करीब 23 गुना है. वहीं, AI सेक्टर को छोड़कर बाकी वैश्विक बाजार का यह आंकड़ा करीब 13 गुना है. Forward P/E के जरिए निवेशक किसी कंपनी के अनुमानित भविष्य के मुनाफे के मुकाबले उसके शेयर की कीमत को समझते हैं. AI शेयरों का ज्यादा P/E यह दिखाता है कि निवेशक इन कंपनियों से भविष्य में मजबूत कमाई की उम्मीद कर रहे हैं. अगर कंपनियां इन उम्मीदों पर खरी नहीं उतरतीं, तो शेयरों में गिरावट का जोखिम बढ़ सकता है. हालांकि, कमाई की वृद्धि और वैल्युएशन के ये आंकड़े अनुमान हैं. वास्तविक प्रदर्शन कंपनियों के नतीजों, बाजार की परिस्थितियों और भविष्य में AI की मांग पर निर्भर करेगा.

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में आई तेज गिरावट से यह संकेत मिलता है कि AI सेक्टर को लेकर निवेशकों का नजरिया अब ज्यादा सावधानी वाला हो रहा है. बाजार में केवल AI से जुड़ी कंपनी होने के आधार पर तेजी की उम्मीद करना पर्याप्त नहीं है. निवेशकों को कंपनियों की कमाई, कर्ज, पूंजी जुटाने की लागत, वैल्युएशन और निवेश पर मिलने वाले रिटर्न पर ध्यान देना होगा. आने वाले समय में AI कंपनियों के तिमाही नतीजे और उनके निवेश से जुड़ी योजनाएं भी शेयरों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं. अगर कंपनियां अपने भारी निवेश को मजबूत कमाई में बदलने में सफल रहती हैं, तो निवेशकों का भरोसा मजबूत हो सकता है. दूसरी ओर, खर्च बढ़ने के बावजूद कमाई की रफ्तार कमजोर रहने पर महंगे AI शेयरों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है. इसलिए बाजार में आई बड़ी गिरावट को अपने आप खरीदारी का मौका मानना सही नहीं होगा. किसी भी शेयर में निवेश से पहले कंपनी के वित्तीय नतीजों, वैल्युएशन और जोखिम को समझना जरूरी है.

((डिस्क्लेमर: यह लेख निवेश की सलाह नहीं है. शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. किसी भी निवेश का फैसला लेने से पहले अपनी वित्तीय स्थिति और जोखिम उठाने की क्षमता का आकलन करें या वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें.))

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