शेयर बाजार में गुरुवार को बिकवाली का ऐसा दौर देखने को मिला, जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी. Sensex और Nifty दोनों में 1.5 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई. Sensex 1,200 अंकों से ज्यादा टूटकर 71,300 के नीचे चला गया, जबकि Nifty करीब 400 अंक फिसलकर 22,300 के नीचे पहुंच गया.
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सबसे बड़ा झटका बाजार की कुल वैल्यू को लगा. BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल Market Capitalisation करीब ₹10 लाख करोड़ घटकर ₹462 लाख करोड़ से नीचे आ गया.
लेकिन बाजार में यह गिरावट सिर्फ एक वजह से नहीं आई. विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली, अमेरिका में बढ़ती Bond Yields, कमजोर रुपया और Auto Stocks में दबाव ने मिलकर बाजार पर असर डाला.
FII Selling ने बढ़ाई बाजार की परेशानी
इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी चिंता Foreign Institutional Investors यानी FIIs की लगातार बिकवाली है.
सितंबर के आखिरी कारोबारी दिनों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली काफी तेज हुई है. 30 सितंबर को ही FIIs ने भारतीय Equity Market में करीब ₹10,148 करोड़ की Net Selling की. इससे पहले वाले कारोबारी दिन भी करीब ₹10,743 करोड़ की बिकवाली हुई थी.
यानी सिर्फ दो Sessions में FII Selling ₹20,000 करोड़ से ज्यादा रही.
सितंबर में अब तक Foreign Investors की Equity Selling करीब ₹46,000 करोड़ तक पहुंच गई है. वहीं 2026 में उनका कुल Net Outflow करीब ₹2.6 लाख करोड़ बताया जा रहा है.
FII Selling के पीछे क्या है?
बाजार में विदेशी निवेशकों के रुख को प्रभावित करने वाले कुछ बड़े फैक्टर इस समय सामने हैं.
- अमेरिका में Bond Yields लगातार ऊपर जा रही हैं.
- Dollar मजबूत हो रहा है.
- भारतीय रुपये पर दबाव बना हुआ है.
- घरेलू बाजार के Valuation और Global Risk को लेकर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है.
US Bond Yield ने बढ़ाई चिंता
अमेरिकी 10-Year Treasury Yield बढ़कर 5.31 फीसदी तक पहुंच गई है. यह स्तर लंबे समय के लिहाज से काफी ऊंचा है और सितंबर तिमाही में Yield में बड़ी बढ़ोतरी देखी गई.
इसका सीधा असर Emerging Markets पर पड़ सकता है. जब अमेरिकी Bonds पर Yield बढ़ती है, तो Global Investors के लिए अमेरिकी Debt Assets ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं. ऐसे माहौल में भारत जैसे बाजारों से विदेशी पूंजी का प्रवाह प्रभावित हो सकता है.
इसी वजह से US Bond Market की चाल इस समय भारतीय शेयर बाजार के लिए भी बेहद अहम हो गई है.
रुपया भी ₹96 के करीब
दूसरी तरफ Dollar के मुकाबले रुपया भी कमजोर हुआ और करीब ₹95.99 प्रति डॉलर तक पहुंच गया.
अमेरिकी Yield में तेजी और विदेशी पूंजी की निकासी ने रुपये पर दबाव बढ़ाया है. हालांकि बाजार में यह भी माना जा रहा है कि RBI और सरकारी बैंकों की तरफ से हस्तक्षेप ने रुपये की गिरावट को कुछ हद तक सीमित किया.
Auto Stocks में भी जोरदार बिकवाली
गिरावट सिर्फ बड़े Index तक सीमित नहीं रही. Auto Sector में खास दबाव देखने को मिला.
सितंबर के वाहन बिक्री आंकड़े उम्मीदों के मुकाबले कमजोर रहने के बाद M&M और Maruti Suzuki जैसे बड़े शेयरों में तेज गिरावट आई. Nifty Auto Index करीब 4 फीसदी तक टूट गया.
इसके अलावा Tata Steel, Adani Ports, UltraTech Cement, ITC, Hindustan Unilever और BEL जैसे कई बड़े Stocks में भी 3-4 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिली.
Midcap और Smallcap Stocks भी बिकवाली से नहीं बच पाए. Nifty Midcap 100 और Smallcap 100 दोनों करीब 2 फीसदी नीचे रहे. India VIX भी लगभग 12 फीसदी बढ़कर 15.15 पर पहुंच गया, जो बाजार में बढ़ी हुई Volatility का संकेत है.
अब बाजार के लिए आगे क्या अहम होगा?
इस समय बाजार की नजर कुछ प्रमुख संकेतकों पर रहेगी.
पहला, FII Selling कितनी लंबी चलती है.
दूसरा, US Bond Yields और Dollar का रुख क्या रहता है.
तीसरा, Crude Oil और रुपये की चाल कैसी रहती है.
और चौथा, घरेलू कंपनियों के नतीजे और आर्थिक आंकड़े बाजार को कितना सहारा देते हैं.
यानी गुरुवार की गिरावट को सिर्फ एक खराब कारोबारी दिन के तौर पर देखना पूरी तस्वीर नहीं बताता. Global Bond Market, Foreign Flows, Currency और घरेलू बाजार की कमजोरी इस समय एक-दूसरे से जुड़कर बाजार की दिशा को प्रभावित कर रहे हैं.
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