भारतीय निवेशकों के 100 करोड़ रुपये डूबे! Stockal पर अकाउंट हैक कर Apple-Nvidia के शेयर बेचने का आरोप

संदीप शर्मा

• 03:41 PM • 04 Nov 2026

करीब 30 भारतीय निवेशकों के अमेरिकी शेयर पोर्टफोलियो में सेंधमारी का आरोप लगा है. निवेशकों का दावा है कि उनके अकाउंट से बिना अनुमति Apple, Tesla, Amazon और Nvidia जैसी बड़ी कंपनियों के शेयर बेच दिए गए और उस पैसे से बेहद कम कारोबार वाले शेयर खरीद लिए गए. शुरुआती अनुमान के मुताबिक, इस पूरे मामले में निवेशकों को 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है.

NewsTak
Google CTA
▌

न्यूज़ हाइलाइट्स

30 भारतीय निवेशकों के अकाउंट में सेंधमारी का आरोप

बिना मंजूरी Apple, Tesla और Nvidia के शेयर बेचे

निवेशकों को 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान

शेयर बेचकर खरीदे गए चाइनीज पैनी स्टॉक

अमेरिका के शेयर बाजार में निवेश करने वाले भारतीय निवेशकों के साथ धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है. बेंगलुरु की फिनटेक कंपनी स्टॉकल सिक्योरिटीज के जरिए निवेश करने वाले करीब 30 भारतीय निवेशकों ने आरोप लगाया है कि उनके अकाउंट को बिना अनुमति एक्सेस किया गया और उनके शेयर बेच दिए गए. इसके बाद शेयर बेचकर मिले पैसे से ऐसी कंपनियों के शेयर खरीदे गए, जिनमें बहुत कम कारोबार होता है. मनी कंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, ये घटना 15 अक्टूबर 2026 की है. शुरुआती तौर पर दो निवेशकों के दावों के आधार पर नुकसान 100 करोड़ रुपये से ज्यादा आंका गया है. हालांकि, प्रभावित निवेशकों की संख्या और नुकसान का वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा हो सकता है.

Read more!

Apple, Tesla जैसे शेयर बेचकर खरीदे गए संदिग्ध शेयर

इस मामले में एक निवेशक ने बताया कि उसके अमेरिकी शेयर पोर्टफोलियो में मौजूद 10 बड़ी कंपनियों के शेयर बिना उसकी मंजूरी के बेच दिए गए. इनमें एप्पल, टेस्ल, अमेजन, अल्फाबेट, एनविडिया और AMD जैसी कंपनियों के शेयर शामिल थे.इन शेयरों को बेचकर करीब 3.35 लाख डॉलर जुटाए गए. लेकिन निवेशक के मुताबिक, इस रकम से उसकी मंजूरी के बिना चीन की कंपनी झिबाओ टेक्नोलॉजी के 3 लाख शेयर खरीद लिए गए. इस कंपनी का शेयर अमेरिकी बाजार में ZBAO नाम से कारोबार करता हैइन शेयरों को औसतन 1.05 डॉलर प्रति शेयर के भाव पर खरीदा गया था. लेकिन अगले कुछ दिनों में शेयर की कीमत करीब 60 फीसदी गिर गई और 23 अक्टूबर को यह 0.42 डॉलर पर बंद हुआ.निवेशक का दावा है कि इस पूरी घटना में उसे करीब 4.26 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. उसने यह भी सवाल उठाया कि इतने बड़े ट्रांजैक्शन के बावजूद उसे न तो सामान्य ट्रेड कन्फर्मेशन ईमेल मिले और न ही कोई अलर्ट भेजा गया.

दो मिनट में बेच दिए गए 29 करोड़ रुपये के शेयर

मनी कंट्रोल की रिपोर्ट में एक दूसरे निवेशक का मामला भी सामने आया है. इस निवेशक ने अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बताया कि उसके स्टॉकल अकाउंट में करीब 31 लाख डॉलर यानी लगभग 29 करोड़ रुपये के अमेरिकी शेयर थे. निवेशक के मुताबिक, उसका पूरा पोर्टफोलियो महज दो मिनट में बेच दिया गया. इसके बाद उस पैसे से एक कम कारोबार वाले शेयर के करीब 30.5 लाख शेयर खरीद लिए गए. यह खरीदारी भी महज 15 मिनट के भीतर पूरी कर ली गई. निवेशक का आरोप है कि इस दौरान न तो उससे कोई पुष्टि ली गई और न ही कोई अलर्ट दिया गया. रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय तक न तो उसका अकाउंट पहले की स्थिति में बहाल हुआ था और न ही नुकसान की भरपाई की गई थी.

Stockal की सफाई 

इस मामले पर स्टॉकल की पैरेंट कंपनी बॉर्डरलेस ने कहा है कि पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है. कंपनी के शुरुआती आकलन के मुताबिक, निवेशक के ईमेल अकाउंट से छेड़छाड़ हुई हो सकती है. सोशल इंजीनियरिंग या फिशिंग के जरिए ईमेल और उससे जुड़े लॉग-इन क्रेडेंशियल्स हासिल किए जाने की आशंका जताई गई है. कंपनी ने यह भी कहा कि शुरुआती जांच में उसके अपने प्लेटफॉर्म में सेंधमारी के सबूत नहीं मिले हैं. यानी निवेशकों के अकाउंट से अनधिकृत ट्रांजैक्शन होने की बात सामने आई है, लेकिन यह अभी साफ नहीं है कि इसके पीछे स्टॉकल के प्लेटफॉर्म की सुरक्षा में चूक थी या निवेशकों के ईमेल और लॉग-इन की जानकारी से छेड़छाड़ की गई थी.

Stockal और DriveWealth के बीच जिम्मेदारी को लेकर विवाद

इस मामले में स्टॉकल और उसकी अमेरिकी क्लियरिंग ब्रोकरेज कंपनी ड्राइव वेल्थ के बीच भी विवाद सामने आया है. ड्राइव वेल्थ अमेरिकी बाजार में ट्रेड को पूरा करने और निवेशकों के शेयरों की कस्टडी से जुड़ी सेवाएं देती है. 30 अक्टूबर को एक प्रभावित निवेशक को भेजे गए पत्र में ड्राइव वेल्थ ने कहा कि अनधिकृत एक्सेस निवेशक के स्टॉकल इंटरफेस के जरिए हुआ था. कंपनी के मुताबिक, स्टॉकल प्लेटफॉर्म से जुड़ी सुरक्षा की जिम्मेदारी स्टॉकल की है और यह गतिविधि ड्राइव वेल्थ की तरफ से शुरू नहीं हुई थी. ड्राइव वेल्थ ने यह भी कहा कि स्टॉकल के निर्देश पर उसने प्रभावित अकाउंट फ्रीज कर दिए थे. हालांकि, उसने अकाउंट में मौजूद संदिग्ध शेयरों से निवेशकों को होने वाले संभावित नुकसान को सीमित करने के लिए कुछ कदम उठाने की जरूरत भी बताई थी. कंपनी का आरोप है कि सुधार के लिए की जा रही शुरुआती कार्रवाई को स्टॉकल के निर्देश पर रोक दिया गया था. इस तरह दोनों कंपनियों के बीच यह सवाल खड़ा हो गया है कि निवेशकों के अकाउंट से हुए अनधिकृत ट्रांजैक्शन के लिए जिम्मेदारी किसकी है.

HDFC Securities का क्या है कनेक्शन?

इस पूरे मामले में HDFC सिक्योरिटीज का नाम भी सामने आया है. दरअसल, HDFC सिक्योरिटीज ने साल 2019 में Stockal के साथ साझेदारी कर GlobalInvesting.in प्लेटफॉर्म लॉन्च किया था. इसी साझेदारी के जरिए कई भारतीय निवेशकों को अमेरिकी शेयरों में निवेश की सुविधा मिली थी. हालांकि, दोनों कंपनियों की यह ऑपरेशनल साझेदारी जुलाई 2024 में खत्म हो गई थी. बेंगलुरु में दर्ज FIR में ड्राइव वेल्थ LLC, स्टॉकल सिक्योरिटीज, बॉर्डरलेस सॉफ्टेक, बॉर्डरलेस इंवेस्टिंग और HDFC सिक्योरिटीज का नाम शामिल है. लेकिन मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, FIR में HDFC Securities को आरोपी नहीं बनाया गया है.

निवेशकों ने SEBI और अमेरिकी SEC से लगाई गुहार

इस मामले में एक प्रभावित निवेशक ने SEBI में शिकायत दर्ज कराई है और अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन यानी SEC से भी हस्तक्षेप की मांग की है. वहीं, बेंगलुरु में इस मामले को लेकर FIR भी दर्ज की गई है.फिलहाल जांच का सबसे बड़ा सवाल यही है कि निवेशकों के अकाउंट तक अनधिकृत पहुंच कैसे बनी और बिना उनकी मंजूरी के इतने बड़े ट्रांजैक्शन कैसे पूरे हो गए.