सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए नई रिपोर्ट सामने आई है. अमेरिकी वित्तीय सेवा कंपनी स्टोनएक्स ने अपनी तिमाही कमोडिटी आउटलुक रिपोर्ट जारी की है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर हालात ज्यादा नहीं बिगड़ते, तो 2026 के आखिर तक सोना करीब 4,000 डॉलर प्रति औंस के आसपास रह सकता है. वहीं चांदी 55 से 60 डॉलर प्रति औंस के बीच रह सकती है.
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रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सोना और चांदी की चाल किन बातों से तय होगी. इसमें मध्य पूर्व का तनाव, अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेड का रुख, शेयर बाजार की चाल और केंद्रीय बैंकों की खरीद जैसे बड़े कारण शामिल हैं. स्टोनएक्स के मुताबिक आने वाले महीनों में इन संकेतों पर सबसे ज्यादा नजर रहेगी.
अभी भारत में क्या हैं दाम
13 जुलाई को दोपहर करीब 12:30 बजे मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर 5 अगस्त 2026 डिलीवरी वाला सोना करीब 1100 रुपये की गिरावट के साथ 1,42,306 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था. वहीं 4 सितंबर 2026 डिलीवरी वाली चांदी 3600 रुपये से ज्यादा की गिरावट के साथ 2,19,000 रुपये प्रति किलो पर कारोबार कर रही थी.
स्टोनएक्स ने क्या कहा
स्टोनएक्स एक अमेरिकी वित्तीय सेवा कंपनी है, जो बैंक, फंड, कंपनियों, सरकारों और बड़े निवेशकों को ट्रेडिंग, क्लियरिंग, पेमेंट, जोखिम प्रबंधन और बाजार तक पहुंच जैसी सेवाएं देती है. कंपनी का मुख्य कार्यालय न्यूयार्क में है. रिपोर्ट में कंपनी ने कहा है कि सोने और चांदी की कीमतों में आगे उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, लेकिन बड़े स्तर पर मांग अब भी बनी हुई है.
सोना 4,000 डॉलर से नीचे क्यों फिसला
स्टोनएक्स के मुताबिक उसकी पिछली रिपोर्ट में साल के अंत तक सोने के 4,000 डॉलर से नीचे जाने का अनुमान था, लेकिन यह पहले ही हो गया. जून के आखिर में सोना 4,000 डॉलर से नीचे आ गया. रिपोर्ट के अनुसार इसकी बड़ी वजह ईरान से जुड़ा भू-राजनीतिक तनाव और निवेशकों का नए निवेश से दूरी बनाना रहा.
रिपोर्ट में कहा गया है कि जब तक इस संकट का कोई स्थायी हल नहीं निकलता, तब तक सोने में तेज उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. यानी बाजार में खबरों के हिसाब से दाम तेजी से ऊपर या नीचे जा सकते हैं.
शेयर बाजार गिरा, फिर भी सोना क्यों नहीं संभला
स्टोनएक्स के मुताबिक जून की शुरुआत में अमेरिका का शेयर बाजार एसएंडपी 500 एक हफ्ते में करीब 5 प्रतिशत गिर गया. आम तौर पर माना जाता है कि शेयर बाजार गिरने पर सोना मजबूत होता है. लेकिन इस बार कई निवेशकों ने सोना बेच दिया, ताकि शेयर बाजार में हुए नुकसान और मार्जिन कॉल के लिए नकदी जुटाई जा सके.
रिपोर्ट का कहना है कि इस दौरान सोना महंगाई से बचाव का जरिया कम और नकदी जुटाने का साधन ज्यादा बन गया. यही वजह रही कि दबाव के समय सोने में उम्मीद के मुताबिक मजबूती नहीं दिखी.
फेड का रुख कितना अहम है
स्टोनएक्स ने कहा है कि फेड के नए चेयरमैन केविन वॉर्श महंगाई को लेकर सख्त रुख में दिख रहे हैं. हालांकि रिपोर्ट यह भी साफ करती है कि फेड का फैसला सिर्फ एक व्यक्ति नहीं करता. वहां 12 सदस्यों की कमेटी मिलकर फैसला लेती है. ऐसे में चेयरमैन की राय अहम होती है, लेकिन अंतिम फैसला सामूहिक होता है.
रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी मजबूत है और रोजगार बाजार भी स्थिर बना हुआ है. इसलिए फेड जल्दबाजी में ब्याज दरों में बदलाव नहीं करेगा. बाजार फिलहाल यह मानकर चल रहा है कि साल की चौथी तिमाही में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की करीब 30 प्रतिशत संभावना है.
स्टोनएक्स ने यह भी कहा है कि अमेरिका का कोर पीसीई महंगाई आंकड़ा 3.5 प्रतिशत पर पहुंच चुका है, जबकि फेड का लक्ष्य 2 प्रतिशत है. इसका मतलब है कि महंगाई अभी भी लक्ष्य से ऊपर है. ऐसे में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं, और इसका असर सोने की चाल पर पड़ सकता है.
आगे सोना कितना ऊपर या नीचे जा सकता है.
स्टोनएक्स के मुताबिक फिलहाल बहुत बड़ी तेजी या बहुत बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं है. रिपोर्ट कहती है कि तकनीकी संकेत निकट समय में थोड़ी कमजोरी दिखा रहे हैं. लेकिन अगर सोना अगले कुछ हफ्तों तक 4,000 डॉलर के आसपास टिके रहने में सफल रहता है, तो असली खरीद फिर बढ़ सकती है.
केंद्रीय बैंकों की खरीद क्यों अहम है
रिपोर्ट में वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के एक हालिया सर्वे का भी जिक्र है. इस सर्वे में 76 केंद्रीय बैंकों ने हिस्सा लिया. स्टोनएक्स के अनुसार यह सर्वे बताता है कि आने वाले समय में केंद्रीय बैंकों की खरीद सोने को सहारा दे सकती है.
रिपोर्ट के मुख्य आंकड़े इस तरह हैं.
• 90 प्रतिशत केंद्रीय बैंकों का मानना है कि अगले 12 महीनों में दुनिया के केंद्रीय बैंक सोने की खरीद बढ़ाएंगे.
• 45 प्रतिशत केंद्रीय बैंक मानते हैं कि वे खुद भी अपने सोने के भंडार में बढ़ोतरी करेंगे.
• सिर्फ 1 प्रतिशत ने कहा कि वे अपने सोने के भंडार में कमी ला सकते हैं.
• 78 प्रतिशत केंद्रीय बैंकों का मानना है कि अगले 5 वर्षों में उनके कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी और बढ़ेगी.
स्टोनएक्स के मुताबिक पिछले 4 वर्षों में दुनिया के केंद्रीय बैंकों ने मिलकर करीब 4,000 टन सोना खरीदा है. रिपोर्ट कहती है कि यह बाजार की सबसे मजबूत मांग में से एक है.
किन बातों से बढ़ सकते हैं दाम
स्टोनएक्स के अनुसार कुछ वजहें सोना और चांदी को सहारा दे सकती हैं.
• अगर मध्य पूर्व में तनाव फिर बढ़ता है, तो सोना और चांदी मजबूत हो सकते हैं.
• अगर यूक्रेन युद्ध लंबा चलता है, तो सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ सकती है.
• अगर केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीदते रहते हैं, तो दाम को सहारा मिल सकता है.
• अगर दुनिया में अनिश्चितता बनी रहती है, तो सोना और चांदी में खरीद बढ़ सकती है.
किन बातों से दबाव बन सकता है
रिपोर्ट के मुताबिक कुछ वजहें सोना और चांदी पर दबाव भी बना सकती हैं.
• अगर ईरान और मध्य पूर्व में स्थायी युद्धविराम हो जाता है, तो सुरक्षित निवेश की मांग घट सकती है.
• अगर शेयर बाजार में और गिरावट आती है, तो निवेशक नकदी के लिए सोना बेच सकते हैं.
• अगर केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाते हैं, तो सोने पर दबाव बढ़ सकता है.
• अगर फेड का नया नेतृत्व उम्मीद से ज्यादा सख्त रुख अपनाता है, तो भी दाम पर असर पड़ सकता है.
निष्कर्ष
कुल मिलाकर स्टोनएक्स का कहना है कि 2026 के बाकी महीनों में सोना और चांदी में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. फिर भी रिपोर्ट का अनुमान है कि साल के आखिर तक सोना करीब 4,000 डॉलर प्रति औंस के आसपास रह सकता है, जबकि चांदी 55 से 60 डॉलर प्रति औंस के दायरे में कारोबार कर सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक आगे सबसे बड़ी नजर मध्य पूर्व के हालात, अमेरिकी ब्याज दरों और केंद्रीय बैंकों की खरीद पर रहेगी.
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