एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन और जी एंटरटेनमेंट के फाउंडर सुभाष चंद्रा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने सुभाष चंद्रा और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ कथित धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है. आरोप है कि LIC हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड के साथ 1,322 करोड़ रुपये से ज्यादा की वित्तीय धोखाधड़ी की गई.
ADVERTISEMENT
समाचार एजेंसी ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला LIC हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है. इस केस में सुभाष चंद्रा के अलावा पंकज सुरोलिया, अमीश पांड्या और राजीव ढोलकिया को भी आरोपी बनाया गया है. शिकायत में 2018 से 2026 के बीच LIC हाउसिंग फाइनेंस के साथ कथित तौर पर 1,322 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है.
क्या है पूरा मामला?
मामला सुभाष चंद्रा से जुड़ी कंपनियों को दिए गए लोन और उनकी कथित नेटवर्थ से संबंधित है. LIC हाउसिंग फाइनेंस की शिकायत के मुताबिक, M/s वसंत सागर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड और कुछ अन्य कंपनियों के लिए लोन सुविधा हासिल करने के दौरान सुभाष चंद्रा की तरफ से एक नेटवर्थ सर्टिफिकेट पेश किया गया था.
शिकायत में दावा किया गया है कि इस सर्टिफिकेट में वर्ष 2018 के दौरान सुभाष चंद्रा की नेटवर्थ करीब 59,113 करोड़ रुपये बताई गई थी. इसी आधार पर सुभाष चंद्रा से जुड़ी तीन कंपनियों को लोन उपलब्ध कराया गया.
बाद में हालात उस समय बदले जब संबंधित कंपनियों के खिलाफ दिवालियापन की कार्यवाही शुरू हुई.
नेटवर्थ को लेकर क्या है विवाद?
LIC हाउसिंग फाइनेंस की शिकायत के अनुसार, दिवालियापन की कार्यवाही के दौरान सुभाष चंद्रा की ओर से कथित तौर पर यह दावा किया गया कि उनकी नेटवर्थ कभी भी 50,000 करोड़ रुपये के स्तर पर नहीं थी.
यहीं से नेटवर्थ सर्टिफिकेट और लोन प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हुए. LIC हाउसिंग फाइनेंस ने आरोप लगाया है कि लोन हासिल करने के लिए दी गई जानकारी और बाद में दिवालियापन की कार्यवाही के दौरान सामने आए दावों में अंतर था.
इसी आधार पर कंपनी की ओर से आपराधिक शिकायत दर्ज कराई गई और अब CBI ने मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू की है.
किन आरोपों में दर्ज हुआ मामला?
शिकायत में सुभाष चंद्रा और अन्य आरोपियों के खिलाफ कथित धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और साजिश जैसे आरोप लगाए गए हैं. हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये फिलहाल जांच एजेंसी के सामने दर्ज शिकायत में लगाए गए आरोप हैं. आरोप साबित होना अभी बाकी है.
CBI की जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि कथित तौर पर पेश किए गए नेटवर्थ सर्टिफिकेट की वास्तविक स्थिति क्या थी, लोन किस आधार पर मंजूर किए गए और लोन से जुड़े लेनदेन में किसी तरह की अनियमितता हुई या नहीं.
₹1,322 करोड़ के मामले में आगे क्या होगा?
CBI द्वारा केस दर्ज किए जाने के बाद अब मामले की जांच आगे बढ़ेगी. जांच एजेंसी दस्तावेजों, लोन से जुड़े रिकॉर्ड, कंपनियों के वित्तीय लेनदेन और कथित नेटवर्थ सर्टिफिकेट समेत दूसरे संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर सकती है.
मामले में आरोपियों की भूमिका और कथित वित्तीय अनियमितताओं की पूरी तस्वीर जांच आगे बढ़ने के बाद ही साफ होगी.
सुभाष चंद्रा भारतीय मीडिया और कारोबारी जगत का जाना-पहचाना नाम हैं. ऐसे में उनके खिलाफ दर्ज हुआ यह मामला खास तौर पर चर्चा में है. फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि CBI ने LIC हाउसिंग फाइनेंस की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया है और आरोपों की जांच की जा रही है. मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा.
ADVERTISEMENT

