NCLT से सुभाष चंद्रा को मिली बड़ी राहत, ₹22,006 करोड़ का कर्ज… चुकाने होंगे सिर्फ ₹6.5 करोड़, उठे कई बड़े सवाल!

सौरभ दीक्षित

27 Aug 2026 (अपडेटेड: Aug 27 2026 3:36 PM)

एनसीएलटी ने सुभाष चंद्रा की भुगतान योजना मंजूर कर दी है. ₹22,006.57 करोड़ दावों के मुकाबले सिर्फ ₹6.5 करोड़ भुगतान होगा. जानिए कर्जदाताओं की बहस क्यों तेज हुई.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

योजना को कर्जदाताओं की 80.81 फीसदी वोटिंग हिस्सेदारी का समर्थन मिला

एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस ने कम वसूली पर सबसे कड़ी आपत्ति जताई

ट्रिब्यूनल बोला, योजना खारिज होती तो बेहतर वसूली की गारंटी नहीं

जी समूह के संस्थापक सुभाष चंद्रा से जुड़े कर्ज मामले में एनसीएलटी ने उनकी भुगतान योजना को मंजूरी दे दी है. इस योजना के तहत कुल स्वीकार दावों की रकम ₹22,006.57 करोड़ है, जबकि भुगतान सिर्फ ₹6.5 करोड़ होगा.

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यह फैसला इसलिए चर्चा में है क्योंकि कर्जदाताओं को उनके दावों के मुकाबले बहुत कम रकम मिलेगी. इसके बाद वसूली, कर्जदाताओं के अधिकार और बहुमत से लिए गए फैसले की भूमिका पर फिर बहस तेज हो गई है.

मुख्य आंकड़े

- कुल स्वीकार दावे ₹22,006.57 करोड़ रहे. - मंजूर भुगतान ₹6.5 करोड़ है. - इसमें ₹6.25 करोड़ कर्जदाताओं में बांटे जाएंगे. - ₹25 लाख प्रक्रिया के खर्च के लिए रखे गए हैं. - कर्जदाताओं की वसूली करीब 0.03 फीसदी बैठती है. - दावों पर करीब 99.97 फीसदी की कटौती मानी जा रही है.

फैसला कैसे आया

इस मामले में एनसीएलटी की दो सदस्यीय मूल पीठ की राय एक जैसी नहीं थी. दोनों सदस्यों ने अलग-अलग फैसला दिया. इसके बाद मामले को सुलझाने के लिए न्यायिक सदस्य निलेश शर्मा को तीसरे सदस्य के तौर पर नियुक्त किया गया.

भुगतान योजना को कर्जदाताओं की 80.81 फीसदी वोटिंग हिस्सेदारी का समर्थन मिला. यानी बहुमत ने इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया.

विरोध करने वाले कर्जदाताओं की दलील

सभी कर्जदाता इस योजना से सहमत नहीं थे. कई कर्जदाताओं ने इसका विरोध किया. इनमें एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस भी शामिल थी. उसका कहना था कि इतनी कम वसूली वाले प्रस्ताव को मंजूरी देना ठीक नहीं है.

एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस का स्वीकार दावा करीब ₹1,322.39 करोड़ था. योजना के तहत उसे सिर्फ करीब ₹38.09 लाख मिलने थे. यह उसके कुल दावे का लगभग 0.028 फीसदी है.

एनसीएलटी ने मंजूरी क्यों दी

ट्रिब्यूनल ने कहा कि जरूरी बहुमत से कर्जदाताओं ने जो व्यावसायिक फैसला लिया है, उसे वह अपनी पसंद के आधार पर बदल नहीं सकता. आसान शब्दों में, अगर कानून के हिसाब से जरूरी बहुमत किसी भुगतान योजना को मंजूरी देता है, तो हर मामले में ट्रिब्यूनल उसे बदलने नहीं बैठ सकता.

ट्रिब्यूनल ने सुभाष चंद्रा की निजी संपत्तियों के आकलन को भी देखा. उसके मुताबिक उपलब्ध संपत्तियों की स्थिति को देखते हुए योजना खारिज करने पर विरोध करने वाले कर्जदाताओं को इससे बेहतर वसूली मिलना तय नहीं था. यानी सवाल सिर्फ कम रकम का नहीं था, बल्कि यह भी था कि योजना रद्द होने पर क्या सच में ज्यादा पैसा मिल पाता. ट्रिब्यूनल ने माना कि इसकी बेहतर गारंटी नहीं थी.

सभी कर्जदाताओं पर लागू होगी योजना

एनसीएलटी ने कहा कि मंजूर की गई यह भुगतान योजना सभी कर्जदाताओं पर लागू होगी. यानी जिन लोगों ने इसके खिलाफ वोट किया था, उन पर भी यही योजना लागू रहेगी. ट्रिब्यूनल ने इसके लिए आईबीसी की धारा 115 का हवाला दिया.

विजय माल्या की प्रतिक्रिया

इस फैसले पर कारोबारी विजय माल्या ने भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर सुभाष चंद्रा के ₹6.5 करोड़ वाले समझौते का जिक्र करते हुए भारत की कर्ज निपटान व्यवस्था पर सवाल उठाए.

माल्या ने अपने पोस्ट में दावा किया कि बैंकों और सरकार ने उनसे करीब ₹14,100 करोड़ की वसूली स्वीकार की है, जबकि निर्णय के मुताबिक कर्ज करीब ₹6,203 करोड़ था. उन्होंने अपने मामले की तुलना सुभाष चंद्रा के मामले से करते हुए पूछा कि क्या अलग-अलग कर्ज लेने वालों के साथ एक जैसा व्यवहार हो रहा है.

हालांकि, यह भी ध्यान देने वाली बात है कि विजय माल्या पहले भी सरकार और बैंकों की वसूली से जुड़े आंकड़ों पर सवाल उठाते रहे हैं. वह यह साफ करने की मांग भी करते रहे हैं कि उनकी संपत्तियों से हुई वसूली को किस तरह गिना गया.

अब आगे क्या

यह मामला अब फिर मूल एनसीएलटी पीठ के पास जाएगा. वहां बहुमत वाले नजरिये के मुताबिक औपचारिक आदेश जारी किया जाएगा. फिलहाल सबसे बड़ी बात यही है कि एनसीएलटी ने सुभाष चंद्रा की भुगतान योजना को मंजूरी दे दी है, और इस फैसले ने कर्ज वसूली, कर्जदाताओं के अधिकार और बहुमत के व्यावसायिक फैसले पर बड़ी चर्चा शुरू कर दी है.