चीनी महंगी होते ही सरकार सख्त, बदला नियम, कीमतों पर पड़ेगा सीधा असर!

सौरभ दीक्षित

• 05:48 PM • 25 Aug 2026

चीनी के तेज दामों के बीच सरकार ने आयातित कच्ची चीनी को 2 महीने में बाजार में लाने का नियम बना दिया है. जानिए इससे जमाखोरी पर कितना असर पड़ सकता है.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

31 अक्टूबर तक 10 लाख टन चीनी आयात की मंजूरी दी गई

कोल्ड ड्रिंक और आइसक्रीम कंपनियों पर स्टॉक सीमा भी तय हुई

एक महीने में औसत खुदरा कीमत करीब 29 फीसदी बढ़ गई

चीनी की तेजी से बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने कच्ची चीनी के आयात नियम बदल दिए हैं. इसका मकसद जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाना है, ताकि बाजार में चीनी जल्दी पहुंचे और लोगों को राहत मिल सके.

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नए नियम के तहत अब टीआरक्यू के जरिए आयात की गई कच्ची चीनी को 2 महीने के भीतर सफेद चीनी में बदलकर घरेलू बाजार में बेचना जरूरी होगा. सरकार ने यह बदलाव ऐसे समय किया है, जब त्योहारों से पहले चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं.

क्या बदला है

सरकार ने सोमवार को आयात की शर्तों में बदलाव किया. अब आयातित कच्ची चीनी को 2 महीने के भीतर रिफाइन करके बाजार में बेचना अनिवार्य कर दिया गया है.

पहले नियम में यह कहा गया था कि आयातित कच्ची चीनी को तय समय के भीतर प्रोसेस किया जाए, ताकि उसे 31 अक्टूबर 2026 तक घरेलू बाजार में बेचा जा सके. अब संशोधित नियम में प्रोसेसिंग और बिक्री के लिए साफ 2 महीने की समय सीमा तय कर दी गई है.

सरकार ने यह फैसला क्यों लिया

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, इस बदलाव का उद्देश्य आयातित कच्ची चीनी की जमाखोरी रोकना है. सरकार चाहती है that आयात का फायदा जल्दी से जल्दी उपभोक्ताओं तक पहुंचे और कीमतों पर दबाव कम हो.

सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन चीनी के आयात की अनुमति दी है. साथ ही कोल्ड ड्रिंक और आइसक्रीम बनाने वाली कंपनियों, कारोबारियों और थोक खरीदारों पर स्टॉक सीमा भी तय की गई है. कई राज्यों ने केंद्र से चीनी की जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी.

कीमतों में कितना उछाल आया

सोमवार को अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत 63.05 रुपये प्रति किलो रही.एक महीने पहले यह 48.73 रुपये प्रति किलो थी.यानी एक महीने में कीमत करीब 29 फीसदी बढ़ी.अधिकतम खुदरा कीमत 75 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई.

खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने कहा कि मिल से मिलने वाली चीनी की कीमत सिर्फ 7 से 10 दिनों में 47 से 48 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 62 रुपये प्रति किलो हो गई. उनके मुताबिक यह बहुत तेज उछाल है.

उद्योग की क्या दलील है

इंडियन शुगर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के चेयरमैन नीरज शिरगांवकर ने कहा कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है और मौजूदा स्टॉक पर्याप्त है. उनके मुताबिक दाम बढ़ने की वजह मौसम के असर से गन्ने की कम पैदावार, महाराष्ट्र में ज्यादा क्रशिंग और उत्तर प्रदेश में किस्मों से जुड़ी दिक्कतें हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि त्योहारों के चलते मांग बढ़ी है. इसके साथ ब्राजील से सप्लाई कम होने, जमाखोरी और सट्टेबाजी ने भी बाजार पर असर डाला है. थोक खरीदारों ने स्टॉक जमा करना शुरू किया, जिससे बाजार में उपलब्ध चीनी कम दिखने लगी और दाम ऊपर गए.

अभी सबसे अहम बात

सरकार का मानना है कि 2 महीने में रिफाइनिंग और बिक्री अनिवार्य करने से आयातित चीनी बाजार में जल्दी आएगी और जमाखोरी पर रोक लगेगी. दूसरी तरफ उद्योग का कहना है कि देश में चीनी की कमी नहीं है, लेकिन पैदावार, मांग और सप्लाई के दबाव से कीमतें बढ़ी हैं. अब नजर इस बात पर रहेगी कि नए नियम से बाजार में राहत कितनी जल्दी मिलती है.