Swiggy Share Crash: Swiggy का बड़ा फैसला, निवेशक परेशान! 49.5% विदेशी हिस्सेदारी घटाने का असली खेल क्या है?

चिराग ठाकुर

• 01:37 PM • 24 Jul 2026

Swiggy ने विदेशी हिस्सेदारी 49.5 फीसदी करने का प्रस्ताव रखा है. इससे Instamart को सीधी खरीद में फायदा मिल सकता है, लेकिन शेयर पर बिकवाली का डर बढ़ा है.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

Swiggy ने विदेशी निवेश सीमा 49.5 फीसदी करने का प्रस्ताव रखा

खबर के बाद शेयर 5 फीसदी गिरकर 250 रुपये के पास पहुंचा

कंपनी Instamart के लिए भारतीय नियंत्रण वाला दर्जा पाना चाहती है

Swiggy के शेयरों में शुक्रवार को तेज गिरावट देखने को मिली. कंपनी के एक फैसले ने निवेशकों के बीच चिंता बढ़ा दी. Swiggy ने विदेशी निवेश की सीमा को 100 फीसदी से घटाकर 49.5 फीसदी करने का प्रस्ताव रखा है. इस खबर के सामने आने के बाद कंपनी के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली और शेयर एक समय करीब 7 फीसदी तक गिर गया.

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हालांकि, इस फैसले को सिर्फ गिरावट के नजरिए से देखना सही नहीं होगा. दरअसल, Swiggy का यह कदम उसकी Quick Commerce यूनिट Instamart के बिजनेस मॉडल को बदलने की बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. कंपनी खुद को Indian Owned and Controlled Company यानी IOCC के रूप में स्थापित करना चाहती है.लेकिन सवाल ये है कि आखिर Swiggy को विदेशी हिस्सेदारी घटाने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या कंपनी विदेशी निवेशकों से दूरी बना रही है या फिर इसके पीछे कोई बड़ा कारोबारी फायदा छिपा है? आइए समझते हैं पूरी कहानी.

Swiggy के शेयर क्यों गिरे?

Swiggy के शेयरों में शुक्रवार को गिरावट देखने को मिली. शेयर शुरुआती कारोबार में करीब 7 फीसदी तक टूट गया था. हालांकि बाद में कुछ रिकवरी आई और खबर लिखे जाने तक शेयर करीब 5 फीसदी की गिरावट के साथ 250 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा था.बाजार की चिंता की सबसे बड़ी वजह कंपनी का विदेशी स्वामित्व घटाने का प्रस्ताव है. Swiggy ने अपने Articles of Association में बदलाव का प्रस्ताव रखा है, जिसे 18 अगस्त को होने वाली Annual General Meeting यानी AGM में शेयरधोल्डर्स के सामने रखा जाएगा.अगर शेयरधोल्डर्स इस प्रस्ताव को मंजूरी देते हैं, तो इसके बाद कंपनी को विदेशी हिस्सेदारी सीमा को लागू करने के लिए RBI से भी जरूरी मंजूरी लेनी होगी.

विदेशी हिस्सेदारी घटाने के पीछे क्या है Swiggy की रणनीति?

Swiggy का यह फैसला उसकी Quick Commerce यूनिट Instamart से जुड़ा हुआ है.दरअसल, भारत के FDI नियमों के मुताबिक, अगर किसी ई-कॉमर्स कंपनी में विदेशी हिस्सेदारी 50 फीसदी से ज्यादा होती है, तो वह कंपनी खुद अपना सामान खरीदकर उसकी इन्वेंट्री नहीं रख सकती और सीधे ग्राहकों को नहीं बेच सकती.ऐसी कंपनियों को Marketplace Model पर काम करना होता है. यानी कंपनी सिर्फ खरीदार और विक्रेता को जोड़ने का काम करती है.लेकिन अगर Swiggy अपनी विदेशी हिस्सेदारी घटाकर 49.5 फीसदी तक ले आती है और Indian Owned and Controlled Company का दर्जा हासिल कर लेती है, तो Instamart को अपने बिजनेस मॉडल में ज्यादा आजादी मिल सकती है.कंपनी सीधे ब्रांड्स और सप्लायर्स से सामान खरीद सकेगी, इन्वेंट्री पर ज्यादा नियंत्रण हासिल कर सकेगी और सप्लाई चेन को बेहतर तरीके से मैनेज कर पाएगी.इससे लंबे समय में कंपनी के मार्जिन और ऑपरेशनल क्षमता में सुधार की उम्मीद है.

Blinkit के रास्ते पर चलना चाहती है Swiggy?

Swiggy का यह कदम पूरी तरह नया नहीं है. इससे पहले Zomato की पैरेंट कंपनी Eternal की Quick Commerce यूनिट Blinkit भी इसी तरह Indian Owned and Controlled Company मॉडल में शिफ्ट हो चुकी है.

Blinkit के इस बदलाव के बाद कंपनी को सीधे इन्वेंट्री मैनेज करने और सप्लायर्स से खरीदारी करने में ज्यादा सुविधा मिली.अब Swiggy भी Instamart को मजबूत बनाने के लिए इसी रणनीति को अपनाने की कोशिश कर रही है.Quick Commerce सेक्टर में मुकाबला लगातार बढ़ रहा है और कंपनियां सिर्फ ऑर्डर की संख्या बढ़ाने के बजाय अब मुनाफे और मार्जिन पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं.

फिर बाजार को इस फैसले में डर क्यों दिखा?

अगर Swiggy का फैसला लंबे समय में फायदेमंद हो सकता है, तो फिर शेयर क्यों गिरा?इसका कारण है Global Indices में कंपनी की स्थिति.Swiggy अभी MSCI Standard Index और FTSE जैसे बड़े ग्लोबल इंडेक्स का हिस्सा है. विदेशी हिस्सेदारी की नई सीमा के कारण कंपनी अगर इन इंडेक्स की शर्तें पूरी नहीं कर पाती है, तो इसे इंडेक्स से बाहर किया जा सकता है.

ऐसा होने पर दुनिया भर के Passive Funds को Swiggy के शेयर बेचने पड़ सकते हैं.यही डर निवेशकों को परेशान कर रहा है.अनुमान लगाया जा रहा है कि MSCI और FTSE इंडेक्स में बदलाव के कारण करीब 270 से 330 मिलियन डॉलर तक का Passive Outflow देखने को मिल सकता है.इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में फंड्स Swiggy के शेयरों में बिकवाली कर सकते हैं, जिससे Short Term में शेयर पर दबाव बना रह सकता है.

UBS को क्यों दिख रहा है Swiggy में फायदा?

जहां बाजार में चिंता बनी हुई है, वहीं कुछ ब्रोकरेज कंपनियां Swiggy के इस फैसले को सकारात्मक नजरिए से देख रही हैं.UBS ने Swiggy पर अपनी Buy रेटिंग बरकरार रखी है और 355 रुपये प्रति शेयर का टारगेट प्राइस दिया है.ब्रोकरेज का मानना है कि विदेशी हिस्सेदारी घटाने से Instamart को Inventory Ownership Model अपनाने में मदद मिलेगी.UBS के मुताबिक, इस बदलाव से आने वाले समय में Instamart के EBITDA Margin में 50 से 70 बेसिस प्वाइंट तक सुधार हो सकता है.हालांकि, ब्रोकरेज ने यह भी कहा है कि 49.5 फीसदी की सीमा तय होने के बाद कंपनी के पास नए विदेशी निवेशकों के लिए ज्यादा जगह नहीं बचेगी.

Flipkart की एंट्री से बढ़ेगी चुनौती

Swiggy के लिए चुनौती सिर्फ विदेशी हिस्सेदारी का मामला नहीं है.Online Food Delivery और Quick Commerce सेक्टर में Competition भी लगातार बढ़ रहा है.ई-कॉमर्स दिग्गज Flipkart भी फूड डिलीवरी बिजनेस में उतरने की तैयारी कर रही है. कंपनी बेंगलुरु में पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की योजना बना रही है और इसके लिए अलग ऐप या ONDC नेटवर्क का इस्तेमाल किया जा सकता है.अगर Flipkart इस बाजार में मजबूती से उतरता है, तो Swiggy और Zomato जैसे खिलाड़ियों के लिए मुकाबला और ज्यादा कठिन हो सकता है.यही वजह है कि Flipkart की एंट्री की खबरों ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है.

Swiggy निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

Swiggy के सामने फिलहाल दो अलग-अलग तस्वीरें हैं.एक तरफ Global Indices से बाहर होने का खतरा और Passive Selling का दबाव है, जिसकी वजह से Short Term में शेयर पर असर दिख सकता है.वहीं दूसरी तरफ, अगर Instamart Inventory Model में सफल रहता है और कंपनी सप्लाई चेन, मार्जिन और ऑपरेशनल कंट्रोल बेहतर कर पाती है, तो यही फैसला लंबे समय में Swiggy के लिए बड़ा फायदा साबित हो सकता है.यानी Swiggy का यह कदम सिर्फ विदेशी हिस्सेदारी घटाने का फैसला नहीं है, बल्कि कंपनी के बिजनेस मॉडल को बदलने की एक बड़ी कोशिश है.अब आने वाले समय में नजर इस बात पर होगी कि शेयरधोल्डर्स इस प्रस्ताव को मंजूरी देते हैं या नहीं और Instamart इस नई रणनीति के जरिए कितना मजबूत बन पाता है.