पेट्रोकेमिकल कंपनी Tamilnadu Petroproducts Limited ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं. कंपनी ने बताया कि अप्रैल-जून तिमाही में उसकी बिक्री और मुनाफे में मजबूत बढ़ोतरी हुई है.
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Q1FY27 में कैसा रहा प्रदर्शन?
- आय 784.17 करोड़ रुपये रही, जो एक साल पहले की समान तिमाही में 468.27 करोड़ रुपये थी. यानी करीब 68 प्रतिशत की बढ़त
- ऑपरेटिंग मुनाफा 124.84 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल 52.45 करोड़ रुपये था. इसमें 138 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई
- PBT यानी टैक्स से पहले मुनाफा 103.65 करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले 45.20 करोड़ रुपये था. इसमें 129 प्रतिशत का उछाल आया
- शुद्ध मुनाफा 77.82 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 33.22 करोड़ रुपये था, यानी शुद्ध मुनाफा दोगुने से ज्यादा बढ़ गया
मांग बढ़ने और लागत नियंत्रण से फायदा
कंपनी के मुताबिक, जून तिमाही के दौरान प्रोडक्ट्स की मांग में बढ़ोतरी और लागत को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने से ऑपरेटिंग प्रदर्शन मजबूत हुआ. कंपनी ने ये भी बताया कि विस्तार परियोजना के लिए वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में योजनाबद्ध शटडाउन लिया गया था. इसलिए Q4 FY26 के आंकड़ों की तुलना Q1 FY27 से करना उचित नहीं है.
Ashwin Muthiah, Vice Chairman, Tamilnadu Petroproducts ने कहा कि पहली तिमाही में बिक्री और मुनाफे दोनों में मजबूत वृद्धि देखने को मिली है. उनके मुताबिक, लागत आधारित ऑपरेशनल एफिशिएंसी, क्षमता के बेहतर इस्तेमाल और ग्राहकों की बढ़ती मांग के अनुरूप तेजी से प्रतिक्रिया देने से कंपनी के प्रदर्शन को फायदा हुआ.
25 सितंबर को AGM
कंपनी के बोर्ड ने शेयरधारकों की Annual General Meeting 25 सितंबर 2026 को दोपहर 2 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से आयोजित करने का फैसला किया है. Tamilnadu Petroproducts की स्थापना 1984 में हुई थी. कंपनी Linear Alkyl Benzene (LAB), Caustic Soda और Propylene Oxide जैसे औद्योगिक इंटरमीडिएट केमिकल्स बनाती है.
कंपनी क्या बनाती है?
1984 में बनी तमिलनाडु पेट्रोप्रोडक्ट्स लिमिटेड देश की उन कंपनियों में है जो उद्योगों में काम आने वाले अहम रसायन बनाती हैं. इनमें लिनियर एल्काइल बेंजीन, कास्टिक सोडा और प्रोपलीन ऑक्साइड शामिल हैं. कंपनी कास्टिक सोडा के साथ क्लोरीन भी बेचती है. लिनियर एल्काइल बेंजीन का इस्तेमाल डिटर्जेंट बनाने में होता है. कास्टिक सोडा का उपयोग कपड़ा, कागज, एल्यूमिनियम और साबुन जैसे क्षेत्रों में होता है. क्लोरीन का इस्तेमाल पानी साफ करने, कागज और दूसरे रसायनों में होता है, जबकि प्रोपलीन ऑक्साइड दूसरे पेट्रोकेमिकल उत्पादों के लिए कच्चे माल की तरह काम करता है.
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