नई Tata Sierra की वापसी के साथ एक नया सवाल भी बाजार में खड़ा हो गया है. क्या पेट्रोल मॉडल खरीदना ज्यादा समझदारी होगी या फिर इलेक्ट्रिक वर्जन पर ज्यादा पैसे खर्च करना लंबे समय में फायदे का सौदा साबित होगा.
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पहली नजर में जवाब आसान लगता है. पेट्रोल Sierra की कीमत कम है, जबकि EV खरीदने के लिए शुरुआत में करीब 6 लाख रुपये ज्यादा खर्च करने पड़ सकते हैं. लेकिन कार खरीदते समय सिर्फ ऑन-रोड कीमत देखना पूरी तस्वीर नहीं दिखाता. असली सवाल यह है कि अगले 10 साल में आपकी जेब से कुल कितना पैसा निकलेगा. अगर खरीद कीमत, ईंधन, चार्जिंग, सर्विस और मेंटेनेंस जैसे सभी खर्चों को जोड़कर देखा जाए, तो तस्वीर काफी अलग नजर आती है.
खरीद कीमत में कितना अंतर?
कार खरीदते समय सबसे पहले नजर कीमत पर जाती है. अनुमानित तौर पर Tata Sierra Petrol Automatic की ऑन-रोड कीमत करीब 18 लाख रुपये हो सकती है. वहीं Long Range Tata Sierra EV की ऑन-रोड कीमत करीब 24 लाख रुपये रहने का अनुमान है.
यानी शुरुआती स्तर पर EV खरीदने के लिए लगभग 6 लाख रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे. यही वजह है कि कई खरीदार पहली नजर में पेट्रोल मॉडल को बेहतर विकल्प मान लेते हैं. लेकिन खरीद के बाद शुरू होने वाला खर्च भी उतना ही अहम होता है.
हर महीने 1,200 किलोमीटर चलाने पर कितना होगा ईंधन खर्च?
मान लेते हैं कि कोई व्यक्ति हर महीने लगभग 1,200 किलोमीटर कार चलाता है. यानी सालभर में कुल 14,400 किलोमीटर की ड्राइविंग. अगर Tata Sierra Petrol औसतन 13 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देती है और पेट्रोल की कीमत 95 रुपये प्रति लीटर मानी जाए, तो सालभर में ईंधन पर करीब 1.05 लाख रुपये खर्च होंगे.
इस हिसाब से 10 साल में सिर्फ पेट्रोल पर लगभग 10.5 लाख रुपये खर्च हो सकते हैं. अब इसी दूरी के लिए Sierra EV का हिसाब देखें. अगर गाड़ी लगभग 6 किलोमीटर प्रति यूनिट की एफिशिएंसी देती है और ज्यादातर चार्जिंग घर पर होती है, जहां बिजली की कीमत करीब 8 रुपये प्रति यूनिट है, तो सालभर की चार्जिंग लागत लगभग 19 हजार रुपये बैठेगी.
यानी 10 साल में कुल चार्जिंग खर्च करीब 1.9 लाख रुपये होगा. सिर्फ ईंधन और चार्जिंग के अंतर को देखें तो EV करीब 8.6 लाख रुपये की बचत करा सकती है.
मेंटेनेंस में भी EV का पलड़ा भारी
कार खरीदते समय लोग अक्सर EMI और पेट्रोल का हिसाब लगा लेते हैं, लेकिन नियमित सर्विसिंग पर होने वाले खर्च को नजरअंदाज कर देते हैं. Petrol कार में इंजन ऑयल, ऑयल फिल्टर, स्पार्क प्लग, अलग-अलग फ्लूइड्स और कई मैकेनिकल पार्ट्स की समय-समय पर सर्विस करनी पड़ती है. ऐसे में हर साल लगभग 12 से 15 हजार रुपये का खर्च मान सकते हैं.
10 साल में यह रकम करीब 1.4 लाख रुपये तक पहुंच सकती है. वहीं EV में पारंपरिक इंजन नहीं होता. इंजन ऑयल बदलने की जरूरत नहीं पड़ती और मूविंग पार्ट्स भी काफी कम होते हैं. इसी वजह से इसकी सर्विसिंग अपेक्षाकृत सस्ती रहती है. अनुमान के मुताबिक 10 साल में EV का मेंटेनेंस खर्च करीब 70 हजार रुपये हो सकता है. यानी यहां भी लगभग 70 हजार रुपये की अतिरिक्त बचत संभव है.
बैटरी बदलनी पड़ी तो क्या होगा?
इलेक्ट्रिक कार खरीदने से पहले सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला सवाल बैटरी को लेकर होता है. आज ज्यादातर नई EV के साथ 8 साल या 1.6 लाख किलोमीटर तक की बैटरी वारंटी दी जाती है. अगर सालाना ड्राइविंग 14,400 किलोमीटर रहे, तो 10 साल में कुल रनिंग लगभग 1.44 लाख किलोमीटर होगी. यानी यह आंकड़ा अभी भी वारंटी सीमा के आसपास रहेगा.
अगर भविष्य में बैटरी बदलने की जरूरत पड़ती भी है, तो मौजूदा अनुमान के अनुसार इसकी लागत 5 से 8 लाख रुपये के बीच हो सकती है. हालांकि यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि पिछले कुछ वर्षों में बैटरी की कीमतों में लगातार गिरावट आई है. ऐसे में अगले 10 साल बाद बैटरी बदलने की वास्तविक लागत आज के अनुमान से कम भी हो सकती है.
10 साल का पूरा खर्च कितना?
अगर Tata Sierra Petrol खरीदी जाती है, तो अनुमानित कुल खर्च इस प्रकार हो सकता है.
- खरीद कीमत: करीब 18 लाख रुपये.
- 10 साल का पेट्रोल खर्च: करीब 10.5 लाख रुपये.
- 10 साल का मेंटेनेंस: करीब 1.4 लाख रुपये.
यानी कुल अनुमानित खर्च लगभग 29.9 लाख रुपये.
अब Sierra EV का हिसाब देखें.
- खरीद कीमत: करीब 24 लाख रुपये.
- 10 साल की चार्जिंग लागत: करीब 1.9 लाख रुपये.
- 10 साल का मेंटेनेंस: करीब 70 हजार रुपये.
यानी कुल अनुमानित खर्च करीब 26.6 लाख रुपये.
इस तुलना के आधार पर शुरुआती कीमत ज्यादा होने के बावजूद EV लगभग 3.3 लाख रुपये सस्ती साबित हो सकती है.
अगर पेट्रोल महंगा हुआ तो बचत और बढ़ सकती है
यह पूरा कैलकुलेशन मौजूदा ईंधन और बिजली की कीमतों के आधार पर तैयार किया गया है. अगर आने वाले वर्षों में पेट्रोल की कीमतें बढ़ती हैं या आपकी मासिक ड्राइविंग 1,200 किलोमीटर से ज्यादा रहती है, तो EV के पक्ष में बचत और बढ़ सकती है.
किसके लिए कौन-सी Sierra बेहतर?
अगर आपकी मासिक ड्राइविंग 500 से 700 किलोमीटर के बीच है और आप हर 4 से 5 साल में कार बदल देते हैं, तो Petrol Sierra अब भी एक व्यावहारिक विकल्प हो सकती है. लेकिन अगर आप गाड़ी को 8 से 10 साल तक इस्तेमाल करना चाहते हैं, रोजाना लंबी दूरी तय करते हैं और घर पर चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध है, तो Tata Sierra EV आर्थिक नजरिए से ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकती है.
कार खरीदने का फैसला सिर्फ शोरूम में दिखाई देने वाली कीमत के आधार पर नहीं होना चाहिए. असली तस्वीर तब सामने आती है जब खरीद कीमत के साथ ईंधन, सर्विस और लंबे समय तक होने वाले कुल खर्च को भी जोड़ा जाए.
अगर सिर्फ शुरुआती कीमत देखी जाए तो पेट्रोल मॉडल आकर्षक लगता है. लेकिन 10 साल के कुल खर्च का हिसाब बताता है कि नियमित इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों के लिए Tata Sierra EV जेब पर हल्की पड़ सकती है. इसलिए सही फैसला वही होगा जो आपकी ड्राइविंग, इस्तेमाल की अवधि और कुल स्वामित्व लागत के हिसाब से मेल खाता हो.
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