टाटा ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में शुक्रवार को दबाव देखने को मिला. टाटा केमिकल्स का शेयर करीब 8% तक गिरकर 719 रुपये के निचले स्तर पर पहुंच गया. टाटा इंवेस्टमेंट में भी करीब 5% की गिरावट आई. वहीं TCS का शेयर करीब 3.5% तक टूट गया. टाटा मोटर्स, टाटा एल्क्सी और टाटा टेक्नोलॉजीज के शेयरों में भी 3% तक की गिरावट रही. इस गिरावट से टाटा ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 31,000 करोड़ रुपये कम हो गया.शेयरों में इस दबाव की बड़ी वजह टाटा ग्रुप के अंदर चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को लेकर सामने आया विवाद है. टाटा संस के बोर्ड ने चंद्रशेखरन को अगले पांच साल के लिए एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बनाए रखने का फैसला किया है. लेकिन टाटा ट्रस्ट्स ने इस फैसले पर आपत्ति जताई है और इसे कानूनी तौर पर अमान्य बताया है.
ADVERTISEMENT
क्या है पूरा विवाद?
टाटा संस के बोर्ड ने गुरुवार को बहुमत से एन. चंद्रशेखरन को उनके मौजूदा कार्यकाल के बाद अगले पांच साल के लिए फिर से एग्जीक्यूटिव चेयरमैन नियुक्त करने का फैसला किया.इस प्रस्ताव के पक्ष में चार निदेशकों ने वोट किया, जबकि टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इसका विरोध किया. इसके बाद टाटा ट्रस्ट्स ने कहा कि उनकी स्थिति पहले जैसी ही है और वह चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के फैसले से सहमत नहीं है.ट्रस्ट्स का कहना है कि टाटा संस के Articles of Association में मौजूद कुछ प्रावधानों के चलते यह प्रस्ताव कानूनी रूप से वैध नहीं है.
Tata Trust की Tata Sons में कितनी हिस्सेदारी?
टाटा ट्रस्ट्स टाटा संस का सबसे बड़ा शेयरहोल्डर है. सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के पास मिलकर टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है.वहीं शापूरजी पलोनजी ग्रुप के पास टाटा संस में करीब 18.37% हिस्सेदारी है. यह टाटा संस का सबसे बड़ा माइनॉरिटी शेयरहोल्डर है.यही वजह है कि टाटा संस में चेयरमैन की नियुक्ति और कंपनी की भविष्य की रणनीति में टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका काफी अहम है.
Tata Sons IPO को लेकर भी मतभेद
टाटा ग्रुप के अंदर यह विवाद ऐसे समय बढ़ा है, जब टाटा संस के संभावित IPO को लेकर भी स्थिति महत्वपूर्ण हो गई है.रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI ने टाटा संस को प्राइवेट और अनलिस्टेड रहने की अनुमति देने की उसकी मांग को खारिज कर दिया है. RBI के नियमों के तहत एक निश्चित आकार की NBFC के लिए पब्लिक होने की शर्त लागू होती है.इसके बाद टाटा संस के बोर्ड ने कंपनी की लिस्टिंग की दिशा में आगे बढ़ने का फैसला किया है.हालांकि टाटा ट्रस्ट्स का रुख अलग है. नोएल टाटा का कहना है कि RBI की शर्तों को पूरा करने के लिए कंपनी के पास दूसरे विकल्प भी हो सकते हैं और इसके लिए सीधे IPO पर जाना जरूरी नहीं हो सकता.उन्होंने टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के प्रतिनिधियों वाली एक टीम बनाने का सुझाव भी दिया है, जो RBI की शर्तों को पूरा करने के विकल्पों पर विचार करे.
Tata Sons की AGM क्यों अहम?
टाटा संस की अगली AGM भी इस विवाद में महत्वपूर्ण हो सकती है. चंद्रशेखरन को चेयरमैन बने रहने के लिए AGM में बतौर डायरेक्टर दोबारा नियुक्त होना होगा.टाटा ट्रस्ट्स टाटा संस का बहुमत शेयरहोल्डर है, इसलिए AGM में उसका रुख अहम होगा.फिलहाल सर रतन टाटा ट्रस्ट पर महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर की ओर से फैसले लेने को लेकर रोक होने की वजह से AGM में भी देरी हुई है. इसके चलते बैठक के लिए जरूरी कोरम पूरा नहीं हो पा रहा है.
बोर्ड में 'Assenting Vote' का क्या मतलब?
टाटा संस के Articles of Association में एक खास प्रावधान है, जिसे 'Assenting Vote' कहा जाता है. इसके तहत ट्रस्ट्स की ओर से नामित डायरेक्टरों की कुछ अहम फैसलों में भूमिका होती है. फिलहाल टाटा संस के बोर्ड में टाटा ट्रस्ट्स के दो प्रमुख नॉमिनी नोएल टाटा और वेणु श्रीनिवासन हैं. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के प्रस्ताव पर दोनों की तरफ से अलग-अलग रुख सामने आया. ऐसी स्थिति में वोट बराबर होने पर चेयरमैन के casting vote की भूमिका सामने आई. टाटा संस के बोर्ड ने कानूनी राय के आधार पर माना कि बैठक की अध्यक्षता कर रहे व्यक्ति कास्टिंग वोट का इस्तेमाल कर सकते हैं. चूंकि चंद्रशेखरन अपनी नियुक्ति पर खुद वोट नहीं कर सकते थे, इसलिए बैठक की अध्यक्षता कर रहे हरीश मनवानी ने कास्टिंग वोट का इस्तेमाल किया.
किन Tata शेयरों पर नजर?
टाटा संस में हिस्सेदारी रखने वाली कंपनियों के शेयरों पर इस पूरे घटनाक्रम का असर देखने को मिल रहा है. टाटा केमिकल्स के पास टाटा संस में करीब 2.53% हिस्सेदारी है, जबकि टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन की भी टाटा संस में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है.इसके अलावा TCS, टाटा मोटर्स, टाटा एल्क्सी, टाटा टेक्नोलॉजीज और टाटा स्टील जैसे बड़े टाटा ग्रुप शेयर भी निवेशकों के रडार पर हैं. फिलहाल बाजार की नजर तीन बड़े मुद्दों पर है चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति, टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच बढ़ता मतभेद और टाटा संस की संभावित लिस्टिंग.
ADVERTISEMENT

