Tata Sons IPO: देश के सबसे बड़े IPO की बढ़ी संभावना, ₹12.5 लाख करोड़ तक हो सकती है वैल्यूएशन

तनीषा त्यागी

• 10:49 AM • 14 Sep 2026

आरबीआई ने टाटा संस का सीआईसी रजिस्ट्रेशन छोड़ने का आवेदन ठुकराया. इससे लिस्टिंग की संभावना बढ़ी है और वैल्यूएशन ₹12.5 लाख करोड़ तक जा सकती है.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

आरबीआई ने सीआईसी रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की टाटा संस की मांग ठुकराई

कंपनी अब अपर लेयर एनबीएफसी नियमों के दायरे में बनी रहेगी

संभावित वैल्यूएशन लिस्टेड और अनलिस्टेड कारोबार के डिस्काउंट पर निर्भर करेगी

Tata Sons IPO: टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के शेयर बाजार में उतरने की संभावना अब पहले के मुकाबले काफी मजबूत हो गई है. भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने टाटा संस की ओर से Core Investment Company (CIC) के तौर पर अपना रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की मांग को खारिज कर दिया है. कंपनी ने यह रास्ता इसलिए चुना था ताकि वह NBFC के दायरे से बाहर निकल सके और अनिवार्य लिस्टिंग से बची रह सके. RBI के इस फैसले के बाद टाटा संस के लिए शेयर बाजार में लिस्टिंग की राह लगभग खुलती नजर आ रही है. हालांकि, यह अभी सीधे तौर पर IPO का ऐलान नहीं है. IPO कब आएगा, उसका आकार कितना होगा और किस स्ट्रक्चर के तहत लिस्टिंग होगी, इस पर अभी अंतिम फैसला सामने नहीं आया है. अगर टाटा संस बाजार में लिस्ट होती है और संभावित वैल्यूएशन के ऊपरी स्तर को हासिल करती है, तो यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO बन सकता है.

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₹9 लाख करोड़ से ₹12.5 लाख करोड़ तक वैल्यूएशन का अनुमान

उपलब्ध विश्लेषण के मुताबिक टाटा संस की संभावित वैल्यूएशन करीब ₹9 लाख करोड़ से ₹12.5 लाख करोड़ के बीच हो सकती है. अलग-अलग वैल्यूएशन इस बात पर निर्भर करेगी कि निवेशक टाटा संस की लिस्टेड कंपनियों में हिस्सेदारी और उसके अनलिस्टेड कारोबार को किस कीमत पर आंकते हैं. इन अनुमानों के मुताबिक अगर कंपनी को कम से कम 5 फीसदी हिस्सेदारी बाजार में उतारनी पड़ती है, तो करीब ₹45,000 करोड़ से ₹60,000 करोड़ तक की इक्विटी बाजार में आ सकती है. इस आकार का इश्यू सामने आने पर टाटा संस का IPO देश के सबसे बड़े IPO का रिकॉर्ड बना सकता है.

टाटा संस की संपत्तियों में क्या-क्या शामिल है?

टाटा संस के पोर्टफोलियो में कई बड़ी टाटा कंपनियों में हिस्सेदारी शामिल है. इसके निवेश IT, ऑटोमोबाइल, स्टील, कंज्यूमर बिजनेस, एविएशन, हॉस्पिटैलिटी और फाइनेंशियल सर्विसेज जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में फैले हुए हैं. दिए गए विश्लेषण के मुताबिक टाटा संस की अंडरलाइंग वैल्यू करीब ₹15 लाख करोड़ से ₹16 लाख करोड़ मानी जा रही है. इसमें लगभग ₹12 लाख करोड़ की लिस्टेड होल्डिंग्स और करीब ₹4 लाख करोड़ की अनलिस्टेड संपत्तियां शामिल हैं. हालांकि, अंडरलाइंग वैल्यू और शेयर बाजार पर मिलने वाली संभावित वैल्यूएशन एक जैसी नहीं होती. होल्डिंग कंपनियों के मामले में निवेशक आम तौर पर डिस्काउंट लागू करते हैं. यही वजह है कि टाटा संस की अंतिम वैल्यूएशन उसकी कुल संपत्तियों की सीधी जोड़ से कम रह सकती है.

होल्डिंग कंपनी डिस्काउंट का पड़ेगा बड़ा असर

टाटा संस की संभावित वैल्यूएशन में सबसे अहम फैक्टर होल्डिंग कंपनी डिस्काउंट हो सकता है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक लिस्टेड पोर्टफोलियो पर करीब 41 से 45 फीसदी तक का डिस्काउंट और अनलिस्टेड एसेट्स पर करीब 15 फीसदी का डिस्काउंट माना गया है. इसके अलावा IPO के समय फेयर वैल्यू पर करीब 10 से 15 फीसदी का अतिरिक्त डिस्काउंट भी संभव माना जा रहा है. यानी टाटा संस के पास जितनी वैल्यू की कंपनियां और संपत्तियां हैं, उसका पूरा मूल्य IPO में मिलना जरूरी नहीं है. बाजार यह भी देखेगा कि पैरेंट कंपनी के जरिए इन निवेशों का लाभ शेयरधारकों तक किस तरह पहुंचता है.

टाटा संस की संभावित वैल्यूएशन का गणित

पैरामीटर    अनुमानित आंकड़ा 
 लिस्टेड होल्डिंग्स        करीब ₹12 लाख करोड़
 अनलिस्टेड एसेट्स    करीब ₹4 लाख करोड़
 होल्डिंग कंपनी डिस्काउंट     41-45%
 IPO प्राइसिंग डिस्काउंट    10-15% 
 संभावित वैल्यूएशन     ₹9-12.5 लाख करोड़ 
 संभावित 5% हिस्सेदारी की वैल्यू      ₹45,000-60,000 करोड़ 

 

अनलिस्टेड कारोबार की वैल्यूएशन भी अहम

टाटा संस की वैल्यू तय करने में सिर्फ शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों की हिस्सेदारी ही मायने नहीं रखेगी. कंपनी के अनलिस्टेड बिजनेस को किस तरह वैल्यू किया जाता है, यह भी अंतिम आंकड़े को काफी प्रभावित कर सकता है. वैल्यूएशन एक्सपर्ट्स के मुताबिक लिस्टेड कंपनियों में हिस्सेदारी की कीमत बाजार भाव के आधार पर तय करना अपेक्षाकृत आसान होता है. वहीं अनलिस्टेड कारोबार के लिए हालिया वास्तविक ट्रांजैक्शन या समान कारोबार वाली कंपनियों के आधार पर मूल्यांकन किया जा सकता है. सेमीकंडक्टर और डिजिटल जैसे कारोबार के लिए भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए अलग से ऑप्शन वैल्यू भी जोड़ी जा सकती है. इसी के साथ पैरेंट कंपनी के स्तर पर डिस्काउंट लगाया जाना भी जरूरी माना जाता है, क्योंकि माइनॉरिटी शेयरधारकों का कंपनी के कैश फ्लो पर सीधा नियंत्रण नहीं होता. टैक्स से जुड़ी संभावित लागत और शेयरों की सीमित लिक्विडिटी भी वैल्यूएशन को प्रभावित कर सकती है.

डिविडेंड इनकम से भरपाई का भी फैक्टर

अनलिस्टेड पोर्टफोलियो से जुड़े अनुमान में करीब ₹40,000 करोड़ के नुकसान का भी जिक्र है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इस अंतर की भरपाई डिविडेंड इनकम के जरिए की जा रही है. यानी टाटा संस की वैल्यूएशन सिर्फ उसकी संपत्तियों के मौजूदा बाजार मूल्य पर निर्भर नहीं करेगी. निवेश से आने वाली आय, कैश फ्लो, भविष्य की ग्रोथ और होल्डिंग कंपनी स्ट्रक्चर भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण होंगे.

SP Group की करीब 18% हिस्सेदारी भी चर्चा में

टाटा संस की संभावित लिस्टिंग में Shapoorji Pallonji यानी SP Group की हिस्सेदारी भी एक अहम पहलू है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार SP Group के पास टाटा संस में करीब 18.37 फीसदी इक्विटी है. एक इन्वेस्टर नोट के मुताबिक 'लुक-थ्रू' आधार पर इस हिस्सेदारी की वैल्यू करीब ₹2.3 लाख करोड़ आंकी गई थी. लिस्टिंग होने की स्थिति में टाटा संस के मौजूदा शेयरधारकों के लिए अपनी हिस्सेदारी की बाजार वैल्यू सामने आने का रास्ता खुल सकता है. यही वजह है कि कंपनी की वैल्यूएशन और डिस्काउंट का मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है.

RBI ने क्यों खारिज किया टाटा संस का आवेदन?

टाटा संस ने मार्च 2024 में RBI के पास अपनी CIC रजिस्ट्रेशन को सरेंडर करने के लिए आवेदन किया था. कंपनी का मकसद NBFC फ्रेमवर्क से बाहर निकलना था. टाटा संस को सितंबर 2022 में RBI ने Upper Layer NBFC की श्रेणी में रखा था. इस कैटेगरी में आने वाली कंपनियों पर अतिरिक्त रेगुलेटरी नियम लागू होते हैं और लिस्टिंग की अनिवार्यता भी जुड़ी है. टाटा संस ने इस व्यवस्था से बाहर निकलने की कोशिश की. कंपनी ने 2024 में ₹21,000 करोड़ से ज्यादा का कर्ज भी चुका दिया था और इसके बाद CIC रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की दिशा में कदम उठाया. लेकिन RBI ने अब इस आवेदन को खारिज कर दिया है. इसका सीधा असर यह हुआ कि टाटा संस Upper Layer NBFC के तौर पर बनी रहेगी.

नए नियमों ने भी बढ़ाई लिस्टिंग की संभावना

टाटा संस के लिए स्थिति इसलिए भी बदल गई क्योंकि जून 2026 से RBI के संशोधित नियम लागू हुए. इन नियमों के तहत ₹1 लाख करोड़ या उससे अधिक एसेट वाली NBFC को Upper Layer में शामिल करने के लिए एक स्पष्ट सीमा तय की गई. टाटा संस की standalone assets मार्च 2026 तक ₹2 लाख करोड़ से अधिक बताई गई हैं. यानी कंपनी इस सीमा से काफी ऊपर है. अगस्त में नए नियमों के तहत टाटा संस को फिर Upper Layer में रखा गया. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इस सूची में शामिल 17 संस्थाओं में टाटा संस एकमात्र ऐसी अनलिस्टेड कंपनी थी, जिस पर सरकारी NBFCs को मिलने वाली लिस्टिंग छूट लागू नहीं होती. RBI की ओर से CIC रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की मांग खारिज होने के बाद निजी तौर पर बने रहने का प्रमुख नियामकीय रास्ता भी बंद हो गया है.

लिस्टिंग से टाटा संस में क्या बदलेगा?

अगर टाटा संस शेयर बाजार में लिस्ट होती है तो यह सिर्फ एक बड़ा IPO नहीं होगा, बल्कि टाटा ग्रुप की पैरेंट कंपनी के कामकाज में भी बड़ा बदलाव होगा. लिस्टेड कंपनी बनने के बाद टाटा संस को नियमित तौर पर वित्तीय और कारोबारी जानकारी सार्वजनिक करनी होगी. निवेशक कंपनी के निवेश, पूंजी आवंटन, रिटर्न और कारोबार से जुड़े फैसलों को ज्यादा बारीकी से देख सकेंगे. टाटा संस के लिए यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण होगा क्योंकि कंपनी एक बड़े बिजनेस ग्रुप की होल्डिंग कंपनी है. इसके पास अलग-अलग सेक्टर में मौजूद टाटा कंपनियों में बड़ी हिस्सेदारी है.

Tata Trusts और SP Group के बीच अलग-अलग रुख

टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर शेयरधारकों के बीच भी अलग-अलग नजरिया रहा है. Tata Trusts के पास टाटा संस में 65 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी है और उपलब्ध जानकारी के मुताबिक ट्रस्ट की ओर से लिस्टिंग को लेकर चिंताएं जताई गई हैं. इसके दूसरी तरफ SP Group लंबे समय से लिस्टिंग के पक्ष में रहा है. उसके लिए टाटा संस की हिस्सेदारी की वास्तविक बाजार वैल्यू सामने आना महत्वपूर्ण माना जाता है. अब RBI के फैसले के बाद यह मामला सिर्फ शेयरधारकों की पसंद का नहीं रह गया है. नियामकीय स्थिति ने लिस्टिंग की संभावना को और मजबूत कर दिया है.

N Chandrasekaran के कार्यकाल के बीच अहम मोड़

टाटा संस की लिस्टिंग का मुद्दा कंपनी के नेतृत्व में बदलाव के समय भी सामने आया है. टाटा संस के चेयरमैन N Chandrasekaran ने फरवरी 2027 में अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद एक और टर्म नहीं लेने की बात कही है. ऐसे में लिस्टिंग का मुद्दा कंपनी के भविष्य के स्ट्रक्चर और नेतृत्व से जुड़े बड़े फैसलों के बीच महत्वपूर्ण हो सकता है. हालांकि, RBI के फैसले को टाटा संस के IPO की तारीख या अंतिम इश्यू साइज की घोषणा नहीं माना जा सकता. कंपनी को अब आगे की प्रक्रिया और लिस्टिंग की रणनीति तय करनी होगी.

क्या होगा सबसे बड़ा IPO?

अगर टाटा संस की वैल्यूएशन ₹9 लाख करोड़ से ₹12.5 लाख करोड़ के बीच रहती है और कंपनी करीब 5 फीसदी हिस्सेदारी बाजार में उतारती है, तो IPO का संभावित आकार ₹45,000 करोड़ से ₹60,000 करोड़ तक पहुंच सकता है. ऐसे में टाटा संस का इश्यू भारत के IPO बाजार में अब तक के सबसे बड़े ऑफर में शामिल हो सकता है और ऊपरी अनुमान के करीब पहुंचने पर देश का सबसे बड़ा IPO बनने की क्षमता रखता है. फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि टाटा संस अपनी लिस्टिंग को किस स्ट्रक्चर के साथ आगे बढ़ाती है, वैल्यूएशन किस स्तर पर तय होती है और मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी पर इसका क्या असर पड़ता है. RBI के फैसले ने लिस्टिंग की संभावना को जरूर तेज कर दिया है, लेकिन IPO की तारीख, इश्यू साइज और अंतिम वैल्यूएशन का इंतजार अभी बाकी है.

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